Friday, June 20, 2008

इटली यात्रा :पांचवां भाग


गुजराती युवक जो इत्तेफाक से मिला 
मैं किसी भारत वासी की तलाश में था और मेरी खोज इस साप्ताहिक बाजार में आकर तब पूरी हुई जब मैंने इटैलियन के साथ –साथ अंगरेजी में लिखा देखा मेड इन इंडिया ,जहाँ राजस्थानी जूते और गुजराती कपडे बिक रहे थे और एक भारतीय लड़का बेपरवाह सा खड़ा  सिगरेट फूंके जा रहा था |मेरा मन प्रसन्नता से भर गया चलो कोई तो मिला मैंने हिन्दी में उससे पूछा “कहाँ से” उसने थोडा झिझकते हुए बताया कि वह गुजरात से इटली अवैध तरीके से काम धंधे की तलाश में आया है और न उसके पास वीजा है न पासपोर्ट |मैं उसकी पूरी  कहानी सुनना चाहता था |पर धंधे के टाईम उसकी मुझसे बात करने में रूचि नहीं थी |शायद उसे डर था कि कहीं मैं उसे पकडवा न दूँ |बाद में मुझे पता चला कि इटली में अप्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है जिससे वहां के लोगों में काफी चिंता है |वो लड़का कई दिनों तक मेरे जेहन में घूमता रहा कि कैसे उसने भारत से इटली तक का सफर बगैर वैध कागजात के सहारे तय किया होगा ?क्या उसे अपने घर की याद नहीं आती होगी वगैरह वगैरह पर कहते हैं न जिन्दगी से बड़ी कोई क्रूर चीज नहीं होती मैं धीरे –धीरे उसको भूलने लग गया पर जब इस वृत्तांत को लिखते वक्त उसकी तस्वीर देखी तो वह घट्नाक्रम फिर आँखों के आगे घूम गया |
उस साप्ताहिक बाजार में मैंने काफी वक्त बिताया पर ले न सका कुछ भी मामला वही था मैं हर चीज की कीमत को भारतीय रुपयों में बदल कर सोच रहा था और उस लिहाज से वो सब खासी महंगी थी |विदेश यात्रा(खासकर विकसित देशों में )का आप तभी लुत्फ़ उठा सकते हैं जब आप स्थानीय मुद्रा को भारतीय रुपयों में बदल कर न देखें ,इटली में एक यूरो में पानी की बोतल बिकती है तो एक यूरो में आप हैन्किन बीयर का केन भी खरीद सकते हैं |
दीवारों पर उकेरी आकृतियाँ 
इटली के लोग खासे पढ़े लिखे और साहित्य कला के प्रेमी होते हैं और यह कला वहां की दीवारों पर देखी जा सकती है यहाँ तक की विरोध करने के तरीकों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है दीवारों पर आड़ी तिरछी रंग बिरंगी रेखाएं खींच कर कुछ लिख देना होता है |मुझे विरोध का ये तरीका बहुत भाया इससे शहर की खूबसूरती बढ़ जाती है |मैंने ऐसी ग्राफिटी शहर की दीवारों पर कई जगह देखी |मैं पहले ही लिख चुका हूँ |यह मेरी अनमनी यात्रा थी जिसमें मैंने कोई भी नोट्स नहीं लिए इसलिए जगहों चौराहों के नाम मुझे याद नहीं रहे हाँ पर कुछ चीजें और जगहें आज भी स्मृति में जीवित हैं जब मैंने पहली बार गैरीबाल्डी की एक भीमकाय मूर्ति देखी |
गैरीबाल्डी की मूर्ति 
मैंने गैरीबाल्डी को भी सिर्फ इतिहास की किताबों में पढ़ा था जिसे इटली के नायकों में से एक माना जाता है जिन्होंने इटली का एकीकरण किया था ,जब मैंने उसकी मूर्ति देखी तो मैं कुछ देर तक रुक कर उसे निहारता ही रहा |न जाने कितने भाव मेरे मन में आ जा रहे थे |
बोलोना का पुराना शहर एक गुलाबी शहर है जहाँ सारी इमारतें एक ही रंग की है हाँ नए शहर में बहु- रंगी बहु- मंजिली इमारतें हैं शहर की ऊँची मीनार से देखने पर शहर बहुत खुबसूरत दिखाई पड़ता है |
कुछ ऐसा दिखता है बोलोना 
किसी शहर के चरित्र को अगर समझना हो तो वहां की किताबों को देखना चाहिए और वही मैंने भी किया |भारत में जहाँ अंग्रेज़ी की किताबें ज्यादा दिखती हैं मुझे बोलों में इटैलियन भाषा में दुनिया भर का साहित्य मिला यहाँ तक की हमारी महाभारत और गीता भी इटैलियन भाषा में थी |महात्मा गांधी के ऊपर भी कुछ किताबें दिखी पर अंग्रेजी में कम ही किताबें दिखी |काश अपनी भाषा के प्रति ये लगाव हमारे देश में भी होता जहाँ चारो और अंग्रेजी का बोलबाला है |मैंने उस दूकान में कई घंटे किताबों को निहारते हुए बिताये और किताबों के बारे में सिल्विया मुझे बताती जा रही थी और मैं सबकुछ समझ लेना चाहता था|घूमते -घूमते भूख लग चुकी थी दिन में मैं बाहर ही इटली का कुछ भी खाना खाता पर शाम को मैं अपने होटल के नजदीक ताजमहल रेस्टोरेंट में बिरयानी उड़ना नहीं भूलता था |

सच कहूँ तो मुझे इटैलियन खाने में कहीं से कोई रूचि नहीं उत्पन्न हुई |हाँ दो दिन मैंने पिज्जा चाव से खाया |वहां पिज्जा की इतनी किस्में उपलब्ध थीं कि मैंने किस किस्म का पिज्जा खाया मुझे याद नहीं पर जो भी था स्वादिष्ट था |इटली में ही आकर मुझे पता पड़ा यहाँ सबसे महंगा गाय का गोश्त है और सबसे सस्ता मुर्गे का मांस है जिसे ज्यादातर निम्न आयवर्ग के लोग खाते थे |वाह री माया भारत में इसका उल्टा है अमूमन यहाँ गाय का गोश्त कई राज्यों में प्रतिबंधित है और भैंस का मांस ज्यादा खाया जाता है जो मुर्गे और बकरे के मुकाबले काफी सस्ता है |


1 comment:

vishal khatri said...

Abhi italy nahi jaa sakte sir par haan italy humne yahi bethe ghoom liya hai.. chunki yeh maine iss yatra vritant ka ek hi bhaag pada hua hai.. abhi pichle bhi padna chahunga..

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