Friday, June 20, 2008

इटली यात्रा :अंतिम भाग

बोलोना के विशाल चर्च 
अब मेरे लौटने का दिन करीब आ चुका था |पूरे इटली में बहुत से चर्च हैं और बोलोना कोई अपवाद नहीं हैं |कुछ चर्च तो एक हजार साल पुराने हैं |मेरा कई चर्चों में जाना हुआ और हर जगह एक रूहानी शांति का अनुभव हुआ कारण सीधा था भगवान् और भक्त के बीच कोई बिचौलिया अर्थात पुजारी नहीं था |मैंने अपनी इच्छा से कुछ चर्च में मोमबत्तियां जलाईं और उनके वास्तु का गहनता से अध्ययन किया |सब कुछ शांत और मोहक था |
आख़िरी दिन बहुत व्यस्तता भरा था |पहले मुझे बोलोना विश्वविद्यालय के नए कैम्पस जाना था जहाँ मुझे एक व्याख्यान देना था|
बोलोना विश्वविद्यालय का नया परिसर 

बोलोना विश्वविद्यालय का नया परिसर 
उसके बाद बोलोना से पचास किलोमीटर दूर एक गाँव में एक विदाई भोज रखा गया था |गाँव में भोज का कारण मुझे बाद में बताया गया कि मैं इटली के ग्रामीण जीवन की एक झलक ले सकूँ |पहले मैं चल पड़ा बोलोना विश्वविदयालय के नए कैम्पस यह पुराने कैम्पस के मुकाबले ज्यादा खुला और विशाल था |जहाँ सब कुछ वैश्वीकरण के रंग में रंगा था |व्यख्यान से पहले मुझे पूरा विश्वविद्यालय घुमाया गया |मुझे बार –बार अचंभित करने वाली बात यही लग रही थी की किसी यूनिवर्सिटी में बार कैसे हो सकता है ?पुराने कैम्पस की तरह यहाँ भी बार था |जब मैंने अपना कौतुहल वहां के शिक्षकों के साथ बांटा तो सभी मुझे ऐसे देखने लगे जैसे मैंने कोई अजीब सी बात कह दी हो |विश्वविद्यालय की विशालता के आगे वहां छात्र संख्या बहुत कम थी इसके पीछे कारण यह बताया गया कि  यहाँ लोग उच्च शिक्षा कम ही लोग प्राप्त करने आते हैं ज्यादातर पहले ही उन्हें रोजगार मिल जाता है तो उच्च शिक्षा में लोग सिर्फ शोध करने के मकसद से ही आते हैं जिससे परिसर में भीड़ कम रहती है |एक बार  फिर भारत  और यहाँ के विश्वविद्यालय याद  आ गए |सिल्विया साए की तरह मेरे साथ थी जहाँ भाषा की समस्या आती वो हाजिर हो जाती |
दोपहर होने को आयी थी अब हम चल पड़े इटली के ग्रामीण जीवन की झलक देखने चारो तरफ खेत और उनके बीच में बना कॉटेजनुमा आवास जहाँ हमारे लिए भोजन की व्यवस्था की गयी थी |पुडिंग पेस्ट्री से लेकर अनेक शाकाहारी –मांसाहारी व्यंजन बारबेक्यू सजा हुआ था ,सच कहूँ तो ऐसा द्रश्य इससे पहले सिर्फ होलीवुड की फिल्मों में ही देखा था और एक दिन मैं ऐसी किसी पार्टी का हिस्सा बनूँगा ऐसा तो कभी सोचा ही नहीं था ,बाग़ में कुछ फल जाने पहचाने थे पर कुछ फलों के बारे में बिलकुल भी नहीं जानता था |सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम था जिससे खेत में बारिश में जैसे पानी बरसता है उसी विधी से सिंचाई की व्यवस्था थी |कुछ जंगली खरगोश भी फुदकते दिखे |
महिला बस चालक 
पर मैं वहां के लोगों से ज्यादा घुल मिल नहीं पाया क्योंकि उनमें से ज्यादातर अंग्रजी नहीं जानते थे और उनलोगों से बात करने के लिए बार –बार मुझे सिल्विया की मदद लेनी पड़ती |
मेरी अगले दिन सुबह की फ्लाईट थी जो पेरिस होते हुए मुझे भारत लाने वाली थी आने से पहले मुझे कुछ स्मारक चिन्ह खरीदने थे जिसके लिए बाजार जाना था और रात का खाना सिल्विया के उस घर में खाना था जहाँ वह अपने पुरुष मित्र के साथ रहती थी तो भाग दौड़ ज्यादा थी |हमने गाँव से विदा ली और बाजार लौट आये जहाँ एक और आश्चर्य मेरा इन्तजार कर रहा था जब बाजार में मैंने एक महिला बस चालाक को देखा जो बगैर किसी परेशानी के अपने काम को अंजाम दे रही थी मैंने पलक झपकाए बिना उसकी कई तस्वीरें खींच डालीं |सिल्विया ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं किसी दूसरे ग्रह से आया प्राणी हूँ जब मैंने अपने अचम्भे की वजह बताई तो वह हँसे बगैर न रह सकी |बाजार में भारत के अपने मित्रों के लिए कुछ उपहार खरीदे और उस वक्त यूरो खर्च करते वक्त मेरा दिल जल रहा था क्योंकि भारतीय रुपयों  में उनकी कीमत बहुत ज्यादा थी और चीजें उस मुकाबले कुछ भी नहीं पर मैं पहली बार भारत से बाहर निकला था तो सबकी कुछ न कुछ फरमाईशें थी |सिल्विया को पहले दिन से पता था कि मुझे इटैलियन खाना रास नहीं आ रहा है इसलिए जब हम उसके घर पहुंचे उसने पहला काम किया मेरे लिए कुछ चाइनीज खाना ऑर्डर कर दिया |उसका पुरुष –मित्र किसी काम से देश से बाहर गया था इसलिए उसने खाना बाजार से मंगवाना बेहतर समझा |उस दिन देर शाम तक (इटली में रात 9.30 बजे होती है ) बातें करते रहे |वह जानना चाहती थी कि मुझे इटली कैसा लगा और मैं उसकी भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछ रहा था |बातों –बातों में हमें समय का पता ही नहीं चला पर अब वक्त विदा लेने का था सिल्विया से और इटली से भी |
मैं अपनी जिन्दगी में कुछ नए अनुभवों का इजाफा किये हुए वापस लौट रहा था जहाँ मेरे अपने बेताबी से मेरे लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे |

विदा बोलोना विदा इटली .......................

1 comment:

anil chaudhry said...

मुकुल भाई वहां के गांवों की तस्‍वीर भी साझा कीजिए और हो सके तो ख्‍ोती के तरीके भी

पसंद आया हो तो