
सोमवार, 17 अगस्त 2009
नो कन्फयूजन ओनली फ्यूजन

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बुधवार, 5 अगस्त 2009
सावन आया और अब जा रहा है

लीजिये सावन आया और अब जा रहा है यूँ तो सावन सिर्फ साल का एक महीना है लेकिन इसका जिक्र आते ही जो तस्वीर हमारे जेहन में उभरती है वो है बरसात ,हरियाली झूले लेकिन इस बार का सावन वैसा नहीं था हम सब थोडा और विश करते ही रह गए लेकिन बादल उतना बरसे नहीं खैर छोडिये जब रियलिटी अच्छी न हो तो कुछ वर्चुअल रियलिटी की बात कर ली जाए. जी हाँ फिल्मों का सावन से गहरा रिश्ता रहा है या यूँ कहें बगैर बारिश के हमारी हिंदी फिल्में कुछ अधूरी सी लगती हैं ,अगर बारिश है तो गाने भी होंगे तो क्यों न इन गानों के बहाने ही सही जाते हुए सावन को याद किया जाए वैसे भी फिल्मों की दुनिया में सावन का एक अहम् रोल रहा है. सबसे पहले १९४९ में सावन शीर्षक से पहली फिल्म बनी उसकी बाद सावन आया रे , सावन भादों , `सावन की घटा´, `आया सावन झूम के´, `सावन को आने दो´ और `प्यासा सावन´ नाम से फिल्में बनीं.
अब सावन का महीना है तो पवन तो शोर करेगा ही .शोर नहीं बाबा सोर जी हाँ ये गाना आज भी हमारे तन मन को मोर सा नचा देता है ,सावन का महीना पवन करे सोर (मिलन).हब पवन शोर करेगा तो बदल , बिजली और बरसात आ ही जायेंगे ये सारे सावन राजा के दरबारी हैं. तभी तो सावन को राजा का खिताब दिया गया है “ओ सावन राजा कहाँ से आये तुम” (दिल तो पागल है) .
कहते हैं आग और पानी का रिश्ता होता है चौंकिए मत इस रिश्ते को हमारे गीतकारों ने बड़ी खूबसूरती से गीतों में ढाला है "दिल में आग लगाये सावन का महीना " (अलग -अलग ) या फिर "अब के सजन सावन में आग लगेगी बदन में " (चुपके -चुपके ) एक फिल्म में “रिम झfम गिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन” (दहक) एक खूबसूरत सा गीत और है जो सावन की रूमानियत का जिक्र करता है "तुझे गीतों में ढालूँगा सावन को आने दो "(सावन को आने दो ) अब अगर सावन की बारिश का मज़ा घर में बैठ के लिया तो ये सावन के साथ अन्याय होगा "सावन बरसे तरसे दिल क्यों न निकले घर से दिल "(दहक). वैसे भी सावन बेशकीमती है और इसकी कीमत का अंदाजा करता ये गाना “तेरी दो टकिया की नौकरी रे मेरा लाखों का सावन जाए” (रोटी कपडा और मकान )
सावन के महीने में इंसान तो क्या बादल भी दीवाना हो जाता है "दीवाना हुआ बादल सावन की घटा छाई" (कश्मीर की कली ) जब ऐसा सुहाना मौसम हो तो किसी की याद आ ही जायेगी "सावन के झूले पड़े तुम चले आओ "(जुर्माना ) यहाँ एक रोचक बात है कि सावन और झूलों का गहरा सम्बन्ध है घरों में झूले सावन के महीने ही में लगाये जाते हैं . बात तो सावन की चल रही है लेकिन इसे जिन्दगी से जोड़ दिया जाए तो सावन के दर्शन को समझना आसान हो जाएगा और जिन्दगी जीना थोडा सा आसान हो जाएगा पहला सबक जो आएगा वो जाएगा भी सावन भी जा रहा है किसी से भी उम्मीदें ज्यादा मत पालिए उम्मीदें टूटने से कष्ट ज्यादा होगा . चलते चलते एक बात जो सबसे ज्यादा इम्पोर्टेंट है शायद जो आप भी भूल रहे हैं नहीं याद आया चलिए मैं याद दिला देता हूँ रक्षा बंधन का त्यौहार भी सावन के महीन में ही पड़ता है.
चलते चलते एक बात जो सबसे ज्यादा इम्पोर्टेंट है शायद जो आप भी भूल रहे हैं नहीं याद आया चलिए मैं याद दिला देता हूँ रक्षा बंधन का त्यौहार भी सावन के महीने में ही पड़ता है और ये प्यारा गाना भाई बहिन के रिश्ते इस त्योहार की याद दिलाता है "अब के बरस भेज भैया को बाबुल सावन में "(बंदिनी )
तो सावन को याद करने के तरीके और मौके कई हो सकते हैं लेकिन जाता सावन यही कहता है जिन्दगी अपने हिसाब चलेगी लेकिन अपने मन के आँगन में सूखा मत पड़ने दीजियेगा अपनी खुशियों आशाओं उमंगों के सावन को साल भर बरसने दीजियेगा इतना तो वादा मैं आप से ले ही सकता हूँ तो सावन के गानों को गुनगुनाते रहिये .
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