Friday, February 5, 2010

अमेरिका यात्रा:चौथा भाग



रौशनी से नहाया हौलीवुड
दिन पर दिन बीतते जा रहे थे और मैं अमेरिका की खूबसूरती को अपनी आँखों में बसा लेना चाहता था उनके अनुशासन को जी लेना चाहता था आप जरा सोचिये मोबाइल, कार, और न जाने क्या क्या सबका आविष्कार अमेरिका में ही हुआ लेकिन उन सबका सभ्यता से कैसे इस्तेमाल करना है ये हम नहीं सीख पाए हाँ तकनीकी हमने जरूर ले ली पहले कार चलने का तरीका यूँ तो आप अमेरिका में कहीं भी निश्चित जगह के अलावा रोड नहीं पार कार सकते जब आप रोड पार कार रहे हों तो कोई भी अपनी गाडी का होर्न नहीं बजाएगा बल्कि धीरज से आपके सड़क पार कर जाने का इन्तिज़ार करेगा उसके पीछे भी लगी गाड़ियाँ बिलकुल हडबडाहट नहीं दिखाएंगी .
अब आइये मोबाइल पर जिसने हिन्दुस्तान में सुविधा कम और दिक्कतें ज्यादा पैदा की हैं .मैंने १० दिन के अपने प्रवास में किसी को हवा में अपना मोबाइल लहराते नहीं देखा न तो जोर जोर से गाना बजाते सुना और न ही विश्वविदयालय में इनका बेजा इस्तेमाल देखा हैरानी की बात थी की दो अभिन्न दोस्त एक दूसरे का मोबाइल नंबर नहीं जानते थे ई मेल एक बेहतर विकल्प था काम के समय मैंने कभी भी किसी को मोबाइल पर बतियाते नहीं देखा आइये इसी से जुडी एक समस्या पर विचार किया जाए जिसका भारत में काफी रोना पीटना मचा है इस भौतिकवादी युग में किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है रिश्तों की संवेदनाएं मरती जा रही हैं हम कहाँ जा रहे हैं इत्यादि हम असल में दोहरे मानदंड वाली सभ्यता की संतान हैं एक तरफ हम विकास चाहते है वो भी घनघोर अनियंत्रित और दूसरी तरफ गावं का कोना , वो नीम का पेड़ , माँ के हाथ की रोटी भी चाहते हैं संतुलन बनाना हमने सीखा नहीं अब ये नहीं हो सकता भारत सुचना तकनीक में दुनिया में अग्रणी है जबकि कम्पूटर अमेरिका में विकसित हुआ सिर्फ इसलिए कि आप कम पैसे में काम कर सकते हैं पैसे कमाने के लिए घर परिवार और अपने निजी सुखों से समझौता कर सकते हैं ऑफिस का काम घर पर नहीं करेंगे तो पिछड़ जाने का खतरा बना रहेगा घर में ही ऑफिस बना लिया है , अब जैसा ऐसा होगा तो रिश्ते मरेंगे ही संवेदनाएं ख़तम होंगी मोबाइल सुविधा के लिए बना पर किसी का मोबाइल नंबर पा जाने का मतलब हम उसे कभी भी डिस्टर्ब कर सकते हैं अरे भाई मोबाइल इसी लिए तो है

मैंने वहां किसी को भी ऑफिस का काम घर पर करते नहीं देखा वीक एंड का मतलब फन मौज मस्ती , एक अमेरिकी सिस्टम में काम करने का आदी है और हमारे यहाँ कोई सिस्टम नहीं है यही हमारा सिस्टम है इसलिए हमने उनकी नौकरियां हड़प ली हैं अब अगर ऐसा है तो इसके जिम्मेदार भी हम ही हैं खैर भले ही अमेरिका की जनसँख्या कम हो लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा चौपहिया वाहन अमेरिका में ही हैं एक मजेदार बात अमेरिका में जितनी कारें हैं उन सबका होर्न अगर १ मिनट के लिए बजा दिया तो आधा अमेरिका ध्वनि प्रदूषण से बहरा हो सकता है लेकिन परेशान होने की बात नहीं होर्न बजाना यहाँ असभ्यता का प्रतीक माना जाता है यूँ तो किसी को होर्न बजाने की जरुरत नहीं पड़ती सब कुछ इतना व्यवस्थित है कि इसकी नौबत नहीं आती मैंने अपने प्रवास में किसी को होर्न बजाते नहीं सुना हाँ रात को पुलिस का सायरन जरूर सुनाय पड़ता था.

पेपर बूथ 
एक शाम हम लॉन्ग बीच के सिग्नल हिल पर गए ये इलाका कभी तेल के कुवों का घड़ था कुएं तो अब खाली हो गए उनकी जगह घरों ने ले ली है वहां से लोस एंजिलिस का का नज़ारा देखने वाला था पूरा शहर रौशनी से जगमगा रहा था और सड़कों पर दौड़ते वाहन और दौडती रौशनी ऐसा लगा गंगा नदी में हजारों दीप एक साथ बहा दिए गए हों अद्भुत तब मुझे एहसास हुआ अमेरिका की ये सम्पनता का एक बड़ा कारण ये तेल के कुएं  हैं हाँ पहली बार मैंने जमीन से तेल निकलते देखा सब कुछ बहुत शांति से होता है लोंग्बीच में ही विश्व प्रसिद्ध बोईंग विमान का कारखाना है सुरक्षा कारण से हम न तो इसके अन्दर जा सके और न ही तस्वीर ले सके इस कारखाने में प्रतिवर्ष १८ जहाज का निर्माण होता है. ये कारखाना बाहर से काफी खुला हुआ है जहाँ से हमने अन्दर चल रही गतिविधियों पर नज़र डाली मुझे बताया गया ९/११ के बाद सुरक्षा काफी कड़ी हो गयी है. बात गाड़ियों की हो रही है तो ये बताता चलूँ यहाँ इंसान कम और गाड़ियाँ ज्यादा है तो पार्किंग की समस्या तो आनी है लेकिन उसका भी व्यवस्थित तरीका है हर जगह पार्किंग मीटर लगे हैं आप को जितनी देर के लिए रुकना है वहां निर्धारित शुल्क मीटर में डाल कर आप गाड़ियाँ पार्क कर सकते हैं और अगर आप निर्धारित समय से ज्यादा रुक रहे हैं तो पहले ही आकर और शुल्क वहां जमा कर दें ये व्यवस्था तभी सुचारू रूप से चल सकती है जब आम आदमी इमानदार हो तो आपको पता लग गया होगा आम अमेरिकी कैसा है वे जियो और जीने दो में भरोसा करते हैं मजेदार बात है कि तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कोई अमेरिका से सीखे कहीं भी कोई अतिरिक्त व्यक्ति इन सारी व्यवस्थाओं के लिए नहीं है जरा हिन्दुस्तान के विभिन्न स्टैंड्स पर काम करते लड़कों को याद कीजिये जिनका शिष्टता से कोई लेना देना नहीं होता हमारे यहाँ तो वैसे ही मानव श्रम इफराद है यही एक चीज़ जिसमे हम लगतार आगे निकलते जा रहे हैं . अमेरिका की एक चीज़ जिसने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वो थी एक दूसरे की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करना कभी मुझे ऐसा लगता था कि अगर ऐसा हमारे देश में हो जाए तो क्या होगा जहाँ हमें नियम मानने चाहिए वहां हम नहीं मानते सड़क पर कूड़ा मत डालो ,थूको मत , आदि आदि लेकिन जहाँ व्यक्तिगत स्वंत्रता का मामला आता है हम नियम , संस्कार के चक्कर में पड़ जाते हैं ऐसा तो हमारे खानदान में हुआ नहीं ये हमारे संस्कार हैं हम ऐसा नहीं कर सकते मुझे लगता है कि ये हमारी सभ्यता है जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाती है ,अजनबियों से बातें मत करो , क्या हर किसी को देख कर हँसते रहते हो ...................................................यहाँ हर अनजान आदमी आपसे मुस्कुरा के बात करता है मुझे समझ नहीं आता कि लोगों को इस सभ्यता से क्या दिक्कत है क्या सिर्फ इसलिए की ये आपके होने का एहसास कराते हैं न कि आपके परिवार का.
क्रिसमस के रंग में रंग अमेरिका 
इस वक्त पूरा अमेरिका उत्सव के रंग में रंगा है चारों तरफ क्रिसमस की धूम है शाम को रौशनी में धुले शहर को देखने का अज़ब मज़ा है चारों तरफ रौशनी घर के अन्दर क्रिसमस ट्री और घर के बाहर बिजली की सजावट और क्रिसमस की झांकी मैं भी सोच रहा था इंसान कहीं भी रहे दुनिया के किसी कोने में खुशियाँ मनाने के तरीके एक जैसे ही होते हैं खुशियों की जबान कोई भी समझ सकता है इसके लिए किसी भाषा को जानना जरुरी नहीं होता मुझे ऐसा लग रहा था कि हम दीपावली का त्यौहार मनाने की तैयारी कर रहे हों . हलकी बारिश और सर्द हवा मौसम को खुशगवार बना रही थी और मैं अपने आप को इस खूबसूरत मौसम में खोज रहा था सही है दोस्तों यात्रा में मन दार्शनिक हो जाता है हम अपनी तलाश में निकल पड़ते हैं जिसका मौका जीवन की भाग दौड़ में कम ही मिलता है . जिस शहर में मैं था उसके आस पास का एनवोइरमेंट कई मामलों में अनोखा है यहाँ पर्वत है समुद्र है रेगिस्तान और ज्वालामुखी भी और जिन्दगी भी ऐसी ही है सुख है दुख है और कभी कभी नीरसता भी लेकिन जिन्दगी तो जिन्दगी है.मैं जोशुवा ट्री नेशनल पार्क कैलिफोर्निया देखने गया असल में ये एक रेगिस्तान है जो सैकडों किलो मीटर में फैला है हाँ यहाँ के रेगिस्तान हमारे रेगिस्तान से एक दम अलग हैं यहाँ रेत की जगह चट्टानें हैं और जोशुवा पेड़ जो दुनिया में सिर्फ यही पाया जाता है जिसको दूर से देखने पर लगता है कोई इंसान बाहें पसारे आसमान की तरफ देख रहा है सन्नाटा ऐसा कि कभी कभी अपने न होने का एहसास होता है प्रकर्ति के इस अद्भुत रूप को देखने के बाद बारी थी कुछ इंसानी दुनिया की रंगीनी को देखने की हम चले होलीवूड .रौशनी से नहाया हुआ चारों ओर रौशनी और साल की पहली बारिश से भीगता शहर मै भी भीग रहा था . अब हमें लौटना था लेकिन मेरा मन तो भीग चुका था यात्रा की सुहानी यादों से
शायद यात्रा को जीना इससे को कहते है आप क्या कहते हैं


22 comments:

Jyoti Verma said...

sundar vartant! sir aapne fir ek nayi baat batai hai jisaka hum palan karenge. kisi ki to nhi par aapni zindagi ko anushasit karenge. jo chhoti par samjhdaari ki batein apne america me jana humko bataya bada aabhar!!
dher sari shubhkamnaye!

Udan Tashtari said...

बड़ी पैनी और खुली दृष्टि लिए संपूर्ण यात्रा की है आपने और फिर शाब्दों का जामा भी उतना ही खूबसूरत. वाह!

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत रोचक वृत्तांत,आभार.

pushkar said...

प्रणाम सर,अपने जिस तरह अमेरिका यात्रा का वर्णन किया है,मुझे ऐसा प्रतीत होता है,कि मै आपके साथ अमेरिका यात्रा कर रहा हूँ,धन्यवाद सर

pushkar said...

प्रणाम सर,अपने जिस तरह अमेरिका यात्रा का वर्णन किया है,मुझे ऐसा प्रतीत होता है,कि मै आपके साथ अमेरिका यात्रा कर रहा हूँ,धन्यवाद सर

deepakkibaten said...

itresting. kai chejen rochak hain.

Nikhil Srivastava said...

काफी बातें प्रभावशाली हैं. यात्रा वृत्तान्त बेहद खूबसूरत है. नजरिये से. एक बात तो मुझे हमेशा से लगती रही है कि हमारे पास सब कुछ है पर अनुसाशन नहीं. कुछ लोगों के पास है तो वो इस हद तक है कि वो भी गलत साबित हो जाता है. संतुलन बेहद जरूरी है हमारे समाज के लिए. हम सभी के लिए. आखिर हम सब से ही तो मिलकर ये देश बनता है.

vinay said...

में इगंलेन्ड गया था,जैसा आपने अमरीका के बारे में लिखा है,एसी ही इगंलेन्ड की सभयता से प्रभावित हो कर मेने एक लिखा था,जिसमें मेने लिखा था,अपने देश की और पशचिम की सभयता का एक अच्छा समिश्रण बनायें ।

Srivastava said...

Hi Mukul Sir, Exquisite explanation... Felt as if walking on LA Strees and feeling the same verve. You are as simple as water, please maintain it. Lots of Duwayen and God bless you.

shahteer said...

sir apka yatra vritant i next me padha aur aaj apke blog par bhi
jaha tak india ki baat hai to dikkte bahut jyada hai aur samadhan kam jarurat hai keval apne soch ko badlane ki jise ham hindustani shayad badlana nahi chahte
kuch esa kaam kiya jay ki hamari soch badle kya apke dimag me koi idea hai?

swetaanand said...

thanks sir aapka blog dekha kitni ajib baat hai hum us desh ke vasi hai jaha ki sabhayta pure sansar me puji jati hai kintu aaj bhi hum anusasit nahi hai aapne jin bato ki tarf ham sabhi ko le jane ki koshish ki hai uske liye sahredya dhanaywad

swetaanand said...

thanks sir aapka blog dekha kitni ajib baat hai hum us desh ke vasi hai jaha ki sabhayta pure sansar me puji jati hai kintu aaj bhi hum anusasit nahi hai aapne jin bato ki tarf ham sabhi ko le jane ki koshish ki hai uske liye sahredya dhanaywad

apni baat said...

sir, pranam..
apne yah bahut hi achchhi baat bataai.. bina anushasan ke koi bhi pragati nahi kar sakata chahein wo ek aadami ho ya ek desh..
agar bharat ko vikasit desh ki shreni me aana hai to hamein abhi se anushasit hona parega..

AAGAZ.. said...

सर मैं अमेरिका तो नहीं गयी हूँ पर सुना-समझा है की वहां के लोग बहुत अनुशासनप्रिय हैं. ये बहुत ही अच्छी बात है. हमारे भारत देश को भी इंतजार है अमेरिका जैसा बनने का. हाँ लेकिन चाहूंगी की अमेरिका जैसा बनने के चक्कर में हम अपनी पहचान न खो दें. हम " भारतीय " हैं.

virendra kumar 'veer' said...

aapke is lekh ne amirika ki yatra kara di hume aaj. janha tak maine suna hai ki wanha ke log bahut hi anushasan priya aur unity se bharpoor hain aur apas me santulan banye rakhane ka jajjba unme hain.atmosphiar ,population, sab control me hain wanha. hujmare desh ko amerika banane me bahut time lagega. aur amerika banae ke chakar me hum kanhi duniya ki bheed me kanhi na jaye. aur amerika jaise banne ki liye logo ko ek jut hona padega aur system ko badala padega. aur humesha yaad rakhna padega ki hum indian hain.

Chandni said...

Unbelieveable Sirji,you took me on a virtual tour to America...........

sana said...

sir america se india kuch sikhe ya na sikhe par sirf discipline hi sikh le to kafi kuch change ho jayga

ARUSHIVERMA said...

INTRESTING.

Yogesh Sharma said...

"अमरीका यात्रा", एक बेहतरीन वर्णन है, वहां की जीवन शैली और अनुशाशनशील होने वाबत!
हम चूँकि अभी विकासशील राष्ट्र है, और इक बेहद कठिन सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दौर से गुज़र रहे है, इस लिए अभी तो तुलना संभव नहीं है, पर हमारा अकाट्य भरोसा है, कि यहाँ भी समय बदलेगा, चूँकि लोग और सोच भी बदल रही है, गति थोड़ी धीमी है पर परिवर्तन की हवा चल रही है !

आपके लेख के लिए अनेक-अनेक बधाई !

Yogesh Sharma said...

"अमरीका यात्रा", एक बेहतरीन वर्णन है, वहां की जीवन शैली और अनुशाशनशील होने वाबत!
हम चूँकि अभी विकासशील राष्ट्र है, और इक बेहद कठिन सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दौर से गुज़र रहे है, इस लिए अभी तो तुलना संभव नहीं है, पर हमारा अकाट्य भरोसा है, कि यहाँ भी समय बदलेगा, चूँकि लोग और सोच भी बदल रही है, गति थोड़ी धीमी है, पर परिवर्तन की हवा चल रही है !

आपके लेख के लिए अनेक-अनेक बधाई !

Garima Singh said...

U r making me addicted to ur blogs Sir.. �� ��

Omnamah Shivay said...

बहुत सुंदर वृतांत सर
लगा कि आपके साथ अमरिका में हूं😁

पसंद आया हो तो