Tuesday, April 8, 2014

कितनी खूबसूरत तस्वीर है,ये कश्मीर है :सातवां भाग (यात्रा वृतांत )

रास्ते 
श्रीनगर पहुँचने से पहले कुछ बातें कश्मीरियों को ,प्यारे भोले पर हिन्दुस्तान से जोड़ नहीं पाते अपने आपको पहले आपको शक की निगाह से देखते हैं पर अगर आप उनके दर्द को समझ सकें या उन्हें ऐसा लगता है कि आप उनकी पीड़ा को समझते हैं तो वो अपना दिल खोल देते हैं.कश्मीर समस्या को बगैर कश्मीर देखे वहां के लोगों से बात किये समझा नहीं जा सकता है .हम् में से ज्यादातर लोग कश्मीर के मामले में दिमाग की बजाय दिल का इस्तेमाल करते हैं.उनके अंदर बहुत गुस्सा है भारत को लेकर भले ही उपरी तौर पर आपको न दिखे पर अंदर सबकुछ धधक रहा है और जैसे ही उनको मौका मिलता है वो सड़कों पर कभी कभार दिख जाता है.सेना को लेकर तो बहुत ही ज्यादा हालंकि सेना वहां कई अच्छे काम कर रही है .उसने सड़कें बनवाईं हैं स्कूल खोले हैं पर लोगों का दिल नहीं जीत पायी है .मैंने वहां के संभ्रांत लोगों से लेकर एकदम गरीब तबके से बात की सभी ने स्वागत किया शुरुवात में झिझके पर जब एक बार खुले तो ऐसा लगा उन की जगह मैं होता तो शायद यही सोचता.आपको एक रोचक बात बताऊँ.हम कश्मीर समस्या के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराते हैं.पाकिस्तान एक पक्ष हो सकता है पर सब कुछ उसका किया धरा नहीं है.जम्मू संभाग में ज्यादा भारत पाकिस्तान सीमा क्षेत्र पड़ता है जबकि कश्मीर में कम और जम्मू संभाग में ज्यादा हिंदू लोग रहते हैं पर समस्या कश्मीर में घाटी में ज्यादा है यानि वहां के लोग अभी तक भारत से अपने आप को जोड़ नहीं पाए हैं ये सिर्फ पाकिस्तान की शह नहीं है हाँ वो मौके का फायदा उठा रहा है पर लोग अभी तक नहीं जुड़े हैं उन्हें लगता है उनके साथ धोखा हुआ.1947 में जो उनके साथ वायदा किया गया वो क्यूँ नहीं निभाया गया.ये गुस्सा दबा पड़ा था पर लगातार के कुशासन जिसमे भारत सरकार भी दोषी थी और फिर सेना का अत्यचार ,तलाशी अपने ही लोगों के सामने बेइज्जती ,शर्मिंदगी मिला कर ऐसा गन्दा मामला तैयार हुआ है कि अभी दिल जीतने में सालों लगेंगे.अगर आतंकवाद की घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो कश्मीर में अपराध की दर काफी कम है.छोटे मोटे अपराध को छोड़ दें तो महीनों हो जातें किसी संगीन वारदात को घटे हुए.मैं आपको आगे ऐसे कई किस्से बताऊंगा जिनमें लोगों को बिला किसी वजह के ज़लील होना पड़ा.ऐसा हम लोगों के साथ एअर पोर्ट या अन्य कई जगहों पर होता है पर हम “होता है”कह के अपने काम में मशगूल हो जाते हैं.हमारे पास काम है लोग हैं मनोरंजन के साधन है.उम्मीदें हैं सेना हमारे जीवन का हिस्सा नहीं है.हमारा कोई रिश्तेदार गायब नहीं हुआ है वो भी पूछताछ के नाम पर इसलिए अगर हम किसी सुरक्षा कर्मी के द्वारा किये गए व्यवहार से प्रताडित होते हैं तो मामला उतना ज्यादा गंभीर नहीं होता पर कश्मीर में जब यही सब कुछ किसी नौजवान के साथ होता है तो अपना ध्यान बंटाने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं होता.मनोरंजन के साधन हैं ही नहीं घाटी के सिनेमा हाल ज्यादातर बंद हो चुके हैं पच्चीस साल में एक पूरी पीढ़ी इसी माहौल में पली बढ़ी उसकी अपनी मनोवैज्ञानिक समस्याए हैं.धार्मिक सांस्कृतिक आधार पर वो अपने आप को पाकिस्तान के ज्यादा करीब पाते हैं.हम अक्सर कहते हैं पकिस्तान के पास है क्या.? पर ज्यादातर लोग आजादी चाहते हैं भारत से.फिलहाल बगैर सेना के कश्मीर की कल्पना करना असंभव है और ये उतना ही सच है जितना कि कश्मीर भारत का हिस्सा है.सरकारी कर्मचारी भी भारत पाकिस्तान के क्रिकेट मैच में पाकिस्तान का सपोर्ट करते हैं.
                               अब ये ऐसी चीजें जिसे आप सेना या बन्दुक के बल पर नहीं बदल सकते हैं इसके लिए उनका दिल जीतना पड़ेगा.
अवान्तिस्वामी मंदिर के  भग्नावशेष
अवान्तिस्वामी मंदिर के  भग्नावशेष
अगर किसी को लगता है कि अब शांति है या कश्मीर में सब ठीक है तो आप गलतफहमी में है ये ज्वालामुखी बुझा नहीं है अंदर अंदर सुलग रहा है.मैंने सडक मार्ग  से अनन्तनाग जाने का फैसला इसीलिये किया कि मैं ज़मीनी हालात समझ सकूँ.वायु मार्ग ज्यादा बेहतर विकल्प था जब मुझे ज्यादा समय वहां बिताने का मौका मिलता पर जो मैंने देखा और महसूस किया सड़क से जाने में वो नहीं जान पाता.फिलहाल हम श्रीनगर के रास्ते पर थे.अनंतनाग से श्रीनगर की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है और पुलवामा नामका एक और जिला रास्ता बीच में पड़ता है.
बैट के कारखाने 

उससे पहले संगम नाम की जगह पर चारों तरफ लकड़ी के कुछ पट्टे अजीब तरह से रखे थे.पता पड़ा पूरे भारत में सबसे ज्यादा क्रिकेट बैट यहीं पर बनते हैं विलो नामक एक पेड़ यहाँ काफी मात्रा में उगता है जो लकड़ी के बैट के लिए सबसे मुफीद होता है.पुलवामा में ही अवान्तिस्वामी मंदिर के भग्नावशेष हैं.यह मंदिर भी मार्तंड मंदिर के आस पास बना विष्णु मंदिर है जिसे राजा ललितादित्य ने बनाया था पर अब ये सिर्फ खंडहर ही मंदिर का वास्तु भी मार्तंड मंदिर से मिलता जुलता है.हालंकि यहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने यहाँ अच्छा काम किया है यहाँ मंदिर में आने का टिकट लगता है.मंदिरों के मामले में मैंने देखा कि कोई भीड़ नहीं थी जबकि ये पुरातत्व से जुडे हुए स्थल सभी के महत्व के हैं पर शायद लोग कश्मीर यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता देखने आते हैं.पुलवामा कश्मीर की दूध राजधानी है यहाँ का दूध पूरी कश्मीर घाटी में भेजा जाता है सबसे ज्यादा श्रीनगर में .बारिश लगातार हो रही है और हम भीगते ठंडाते पर्यटन का मजा लूट रहे थे.मेरा नोट पैड लगातार भरता जा रहा था.मैं सौगत का आभारी हूँ कि उसे पता था कि मैं किस तरह की यात्राओं  को जीता हूँ इसलिए मेरे काम की चीजें सारी चीजें गाड़ी में डलवा दी गयी थी जब हम निकले थे तो बदली थी बारिश होने का कोई लक्षण नहीं दिख रहा था फिर भी छाता हमारे साथ था.अब हम शहर छोड़ चुके थे चारों तरफ चौड़े खेत दिखाई पड़ रहे थे. ये खेत केसर के थे पर अभी मौसम न होने के कारण हमें केसर को देखने का मौका नहीं मिला.
जारी ......

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