Wednesday, June 17, 2015

लखनऊ से लेह (यात्रा -वृत्तांत तीसरा भाग )


रास्ते
 तीन तारीख को हम एकदम फिट और घूमने के लिए तैयार थे बस सौगत का इन्तजार था उनकी फ्लाईट दस बजे आनी थी |सौगत एयरपोर्ट से सीधे गेस्ट हाउस आये और पूरे एक साल बाद हम लोगों का मिलन हुआ | सौगत के भी कुछ बाल झड गये थे पर फिर भी मुझसे बेहतर स्थिति में थे |फिर हम निकलने के लिए तैयार थे |सूरज जल्दी निकलता है और देर तक रहता है हालंकि तापमान 5C था फिर भी धूप  तेज होने के कारण वातावरण में उतनी ठंडक महसूस नहीं हो रही थी |गेस्ट हाउस के सामने बर्फ से लदे पहाड़ आज स्पष्ट दिख रहे थे |कश्मीर घाटी के मुकाबले यहाँ के मकानों में शीशे का इस्तेमाल ज्यादा होता कारण यहाँ धुप ज्यादा तेज निकलती है और उस धूप का इस्तेमाल शीशे के साथ कमरों को गर्म रखने में किया जाता है |अपराध की कोई समस्या नहीं है इसलिए आपको घरों में ज्यादा से ज्यादा शीशे का इस्तेमाल होता दिखेगा हाँ यही उत्तरप्रदेश या बिहार होता तो कब घर में चोरी हो जाए कोई भरोसा नहीं |
हीमिस गोम्पा 
हीमीस संग्रहालय 
हमारा पहला पड़ाव लेह से करीब पैंतालीस किलोमीटर दूर हीमिंस गोम्पा था |गोम्पा या मोनेस्ट्री दूर पहाड़ों की गोद में बौद्ध लामाओं के अध्ययन अध्यापन के लिए बनाये जाते थे और हीमिंस अपवाद नहीं था |स्थानीय आवागमन के लिए यहाँ मारुती वैन का इस्तेमाल होता है हालांकि इनकी संख्या कम ही है और लोग स्थानीय आवागमन के लिए अपनी गाड़ियों का प्रयोग ज्यादा करते हैं पर फिर भी आपको JK-10 नंबर वाली पीली पट्टियों सहित वैन दिख जाती हैं |
हम लेह के ग्रामीण इलाकों की ओर बढ़ चले थोड़ी दूर सीधे रास्ते के बाद गाडी ने गोल –गोल घूमना शुरू कर दिया |जैसे कोई परकार से गोले पर रेखाएं खींच रहा हो ऐसे ही रास्ते थे |पहाड़ वीरान थे तलहटी में कहीं –कहीं खेती होती दिख रही थी ,पहाड़ों की वीरानी तोड़ने वाली दो ही चीजें थी पहला सेना के द्वारा अपनी बटालियन के बनाये गए उद्घोष वाक्य जो पहाड़ों पर जगह –जगह लिखे गए थे |
दूसरी बौद्ध स्तूप के प्रतीक जिन्हें कब और किसने बनाया इसका जवाब नहीं मिला बस इतना ही बताया गया की जब यहाँ राजा का शासन था लोग राजा के आदेश से ये स्तूप जगह –जगह बनाते थे |स्तूप अब भी बनते थे पर जहाँ पहले यह मिट्टी और पत्थर से बनते थे अब यह सीमेंटसे बंनने लगे हैं |

सिन्धु तेरा पानी अमृत 
हमारे साथ –साथ पुरातन सिन्धु नदी बह रही थी |सिन्धु नदी का जिक्र अभी तक इतिहास की किताबों में ही सुना था |पहली बार साक्षात अपनी आँखों से देख रहा था |उत्तर भारत में बहने वाली नदियों के मुकाबले इसका आकार नाले जैसा था पर पानी में वेग बहुत था |पानी में प्रदुषण या पौलीथीन जैसी चीजें सिरे से गायब  थीं पानी शीशे की तरह साफ़ और नीला था |सिन्धु को देखकर मन थोडा भावुक हो रहा था |सिन्धु ही वह नदी है जिसके आस पास भारत में सभ्यता की शुरुवात हुई ,हमारे पूर्वजों  की नदी हमारी नदी पर अब इस नदी का तीन चौथाई हिस्सा पकिस्तान में बहता है |
सिन्धु नदी मुझे रोमांचित कर रही थी |हमने गाडी रोक कर सिन्धु के पास जाने का निश्चय किया |न जाने क्या क्या सोच रहा था उस नदी के साफ़ उजले पानी को बहता देखकर कभी सिकंदर याद आता तो कभी बाबर ,इसी नदी के किनारे भारत में सभ्यता की शुरुआत हुई मैं कितनी पीढ़ियों को सिन्धु के बहते पानी में देख रहा था |मैंने सिन्धु को जल हाथ में लिया यह मेरा अपना तरीका था सिन्धु से हाथ मिलाने का उसे शुक्रिया कहने का ,पानी बहुत ठंडा था जहाँ मैं खड़ा था वहां पानी बिलकुल गहरा नहीं था लेकिन नहाने की हिम्मत तो उसमें बिलकुल नहीं हो सकती थी |अभी हमें लंबा रास्ता तय करना था फिर सिन्धु से विदा तो नहीं ले सकते थे क्योंकि वो तो सदियों से हमारी संभ्यता के साथ बह रही है |हाँ उससे ये भरोसा जरुर लिया कि मैं रहूँ न रहूँ तुम ऐसे ही मानव सभ्यता के साथ बहती रहना |
प्रार्थना चक्र 

 हीमिंस गोम्पा पहाड़ों के बीच में छुपा सा है |मुझे बताया गया की एक वक्त अपनी धन संपदा  के कारण गोम्पा में लूट पाट की बहुत सी घटनाएँ  हुआ करती थीं पर हीमिंस के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ क्योंकि यह अपनी विशेष जगह के कारण सुरक्षित था और लूटपाट करने वालों को इसकी जगह का पता ही नहीं चलता था | किसी मठ या गोम्पा में जाने का यह मेरा पहला अनुभव  था इससे पहले मैंने इन्हें फिल्मों में ही देखा था |दरवाजे पर एक लामा जैसी वेशभूषा में बैठा एक व्यक्ति प्रवेश टिकट बेच रहा था |मठ में टिकट थोडा झटका लगा बाद में पता चला चूँकि इन गोम्पाओं में अब पर्यटक ज्यादा आने लगे हैं इसलिए टिकट लगा दिया गया है जिससे गोम्पा को कुछ आय हो सके |
बुद्ध का काली रूप 
गोम्पा वह जगह है जहाँ बौध भिक्षु दीन दुनिया से अलग अध्ययन अध्यापन कर सकें |गोम्पा का कुछ हिस्स्सा ही पर्यटकों के लिए खोला गया है जिसमें मुख्य मंदिर और संग्रहालय ही शामिल हैं शेष जगहों पर पर्यटक नहीं जा सकते हैं खासकर उनके रहने और पढने की जगहों पर ,विशाल मठ जहाँ सबसे पहली हिदायत शांत रहें ,कैमरे के फ्लैश के साथ फोटो न लें ,मंदिर में घुसते ही जुटे चप्पल बाहर उतार दें|मेरी एक बात समझ नहीं आती ईसाई धर्म को छोड़कर बाकी सारे धर्मों को इन जुटे चप्पलों से क्या परेशानी है |श्रद्धा ह्रदय  में होती है क्या जूते चप्पल उतार कर सारी भक्ति प्रदर्शित  की जा सकती है |अकसर इस तरह के सवाल पूछने वालों को पागल घोषित कर दिया जाता है या पाप पड़ेगा जैसे जवाब देकर शांत करा दिया जाता है |
बुद्ध का काली रूप 
मैंने अपने इस सवाल को भविष्य के लिए छोड़कर मठ में प्रवेश किया सामने कई सारे प्रार्थना चक्र लगे थे जो लेह में आपको हर जगह हर चौराहे पर दिख जायेंगे पर यहाँ कई सारे छोटे प्रार्थना चक्र लगे थे जिन्हें क्लॉक वाईज घुमा कर प्रार्थना की जा सकती है |चूँकि किसी मठ में यह मेरा पहला अनुभव था इसलिए बहुत से सवाल मेरे मन में उठ रहे थे और मैं किसी लामा को खोज रहा था जो मेरी जिज्ञासाओं  का समाधान कर सके पर पहले मैंने गोम्पा के संग्रहालय को देखने का फैसला किया एक बार फिर टिकट जुटे उतारने का अनुरोध और कैमरा लॉकर में रखने आदेश सब कुछ एक दम मशीनी अंदाज़ में हुआ |एक ठन्डे तहखाने में हम नीचे उतर गये चारों तरफ गोम्पा से सम्बन्धित चीजें और छाया चित्र लगे हुए थे |उनका रखने का ढंग बता रहा था कि गोम्पा की रूचि उन चीजों के रख रखाव में कम और विदेशी पर्यटकों के लिए इन चीजों की ब्रांडिंग में ज्यादा थी |मैंने लगभग एक घंटे उस अँधेरे तहखाने में बिताये |बाहर निकलने पर देखा मौसम बदल चुका था |चमकीली धूप की जगह बादलों ने ले ली थी और हल्की बूंदा बांदी हो रहे थी |
सोयाबीन के तेल की बोतलें 
हम मुख्य मंदिर की तरफ चले ,चारों तरफ शान्ति सिर्फ कुछ पर्यटकों की फुसफुसाने की आवाज ,भगवान् बुध की मूर्ति के सामने सलीके से दान में दिए गए पैसे ,हाँ हिन्दू मंदिरों की तरह यहाँ दान देने का हठ करने वाला कोई पुजारी नहीं था|सोयाबीन तेल में जलता दिया,तेल की सही किस्म  इसलिए बता पा रहा हूँ कि कई गोम्पा में मैंने सैकड़ों लीटर तेल की बोतलें देखीं जो जलने के इन्तजार में रखीं थीं |मंदिर (गोम्पा) में  लिखा था कि लामा के दैनिक कामों में हस्तक्षेप न किया जाए इसलिए बहुत सी जिज्ञासाओं का समाधान न कर सका | 
लामा सोनम 
मैं दीवार पर बने भित्ति चित्रों को देखने में व्यस्त हो गया जिसमें बुद्ध के विभिन्न रूप चित्रित थे |एक चित्र ने मुझे रोक लिया जिसमें भगवान् बुद्ध,हिन्दुवों की देवी  माँ काली की तरह गले में नरमुंडों की माला पहने थे ऐसे कई विशाल भित्ति चित्र थे जिसमें खासी हिंसा थी |यह हिन्दू इफेक्ट था या कोई और कारण मैंने वहां के एक लामा से पूछा जिसका नाम सोनम था और वो वहां नौ साल से था पर वह मेरे प्रश्नों का संतोषजनक जवाब न दे सके |
दोपहर होने को आयी अब हमारा अगला पड़ाव थिकसे गोम्पा था यह लेह से बीस किलोमीटर की दूरी पर है |यहाँ पर भी वही एक विशाल प्रार्थना  चक्र फिर बहुत सारे छोटे छोटे चक्र नीचे बहती हुई सिन्धु दिखाई पड़ रही  थी|
जारी .......................................
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