Monday, May 7, 2018

आइये चलते हैं अंग्रेजों के देश :लन्दन यात्रा ग्यारहवां भाग



केमडन बाजार 
लन्दन में आख़िरी दिन सुबह जल्दी ही उठकर सबसे पहले बिखरे सामान को सहेजा ,कहीं कुछ छूट न जाए |हमारी फ्लाईट रात के दस बजे थी और पूरा दिन हमारे पास था |सबसे पहले सारा सामान पैक करके होटल के लॉकर रूम में रखवा दिया जिससे एक दिन का  किराया बचे और हम नाश्ता करने निकल पड़े |एक हफ्ते रहने के कारण हम वातावरण के अभ्यस्त हो चले थे |नाश्ता करने के बाद अब बारी थी किसी मार्केट में घूमने की |हालाँकि हम सुपर मार्केट और बहुत सारे माल्स में जरुर गए थे पर खालिस ब्रिटिश मार्केट में जाने का मौका न मिल पाया था |किससे पूछा जाए इतना बड़ा शहर और इतने सारे बाजार एक बार फिर गूगल बाबा की मदद ली गयी |हमारी लोकेशन के हिसाब से उन्होंने केमडन  मार्केट जाने का सुझाव दिया |वैसे भी केमेन्डन मार्केट की रेटिंग बहुत अच्छी थी अब जिन्होंने दर्द दिया था अब दवा भी उनको ही देनी थी मतलब गूगल बाबा   को रास्ता भी बताना था |पता चला हमारे होटल से चिड़ियाघर वाले रास्ते पर आधे घंटे की दूरी पर यह बाजार पड़ता है |बस स्टॉप सामने था थोड़ी देर में हम केमडनके रास्ते में थे |
मेरे सामने वाली सीट पर एक महिला अपने कुत्ते के साथ बैठी थी |थोड़ी देर में हम केमडन  मार्केट के सामने थे पर बाहर से ऐसा कुछ नहीं लग रहा था कि यह लन्दन के प्रमुख बाजार में से एक है |धीरे –धीरे संशय मिट रहे थे और हम एक नए तरीके के बाजार से रूबरू हो रहे थे |भीड़ और दुकानों की संख्या दोनों ही बहुत ज्यादा थी पर कोई शोर कोए अफरातफरी नहीं थी |हाँ खाने की दुकानों पर दुकानदार जरुर लोगों को अपनी दुकान में आने के लिए मना रहे थे |कम्बोडिया ,मैक्सिको ,वियतनाम ,बर्मा ,चाइनीज हर तरह के खाने की दुकान न केवल सजी थीं बल्कि वहां बहुत भीड़ भी थी |असल में केमडन कभी घोड़ो का अस्तबल हुआ करता  था अब इसे शानदार बाजार का रूप दे दिया गया है पर पुरानी चीजों से छेड़छाड़ नहीं की गयी है |असल में यह आधुनिकता और इतिहास का अद्भुत समागम है |हमने कुछ स्मृति चिन्ह खरीदे और फिर विंडो शॉपिंग शुरू कर दी |
केमडन बाजार 
सब कुछ तो मिल रहा था मसलों से लेकर जेवर तक कपड़ों से लेकर कंडोंम तक |एक दुकान द्वितीय विश्वयुद्ध की सामग्री बेच रही थी |यहीं पहली बार मैंने थ्री डी प्रिंटिंग होते देखी आप अपनी तस्वीर को तीन आयामी स्थिति में प्रिंट करवा सकते हैं |एक तस्वीर को बनवाने की कीमत हिन्दुस्तानी मुद्रा में लगभग दो हजार रुपये |जहाँ से भी आप नजर डालें आपको सिर्फ सर दिखेंगे पर कहीं कोई हल्ला गुल्ला नहीं लोग आ रहे थे और जा रहे थे | केमेन्डन बाजार की ख़ास बात यह लगी यहाँ मेरा जितने भी दुकानदार से पाला पड़ा वो सारे अप्रवासी थे ,बर्मा ,अफगानिस्तान ,जापान के इन दुकानदारों से मैंने कुछ –कुछ खरीदा |भीड़ होने के कारण मैं उनसे ज्यादा बात तो नहीं कर पाया पर सभी अपना देश छोड़कर प्रसन्न थे |खाने में मगरमच्छ के मांस  से लेकर सुअर,गाय सब था |हमें घूमते हुए दो बज गए थे |हम पांच बजे तक हीथ्रो पहुँच जाना चाहते थे क्योंकि वहां के ड्यूटी फ्री बाजार के बड़े चर्चे सुने थे |होटल  लौट कर सामान उठाया और आख़िरी बार ट्यूब की यात्रा शुरू की |पहले पैडिंगटन और वहां से हीथ्रो एक्सप्रेस हमारे ओएस्टर कार्ड में तीन –चार पाउंड ही बचे थे हम संशय में थे इसे दुबारा रिचार्ज करें या न करें |रास्ते में ही अगर पैसे खत्म हो गए   तो क्या हम अपनी यात्रा जारी रख पायेंगे फिर दिमाग लगाया गया कि अगर आप एक बार ट्यूब में घुस गए तो जब आप बाहर निकलेंगे तो तभी पैसा कटेगा तो जब हम हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरे तो पता चला हमारे कार्ड में माइनस ढाई पाउंड बचे हैं |इस तरह हम अंग्रेजों के ढाई पाउंड के कर्जदार हो गए |
कंडोम बेचने का अनूठा तरीका 
केमडन बाजार का एक रेस्टोरेंट 
अब चूँकि देश वापस लौटना था तो पैसे भरवाने का कोई तुक नहीं था |वो कार्ड मैंने अभी भी सम्हाल रखा है कभी दुबारा जाने का मौका मिला तो अंग्रेजों का कर्जा जरुर चुका आऊंगा |हीथ्रो दुनिया के बेहतरीन और व्यस्त एयरपोर्ट में से एक है |हमारी फ्लाईट एमीरेट्स की थी |उसके काउंटर पर पहुँचने से पहले वहां के स्टाफ को हिन्दुस्तानी में बात करते देखा तो मन प्रफुल्लित हो गया |उनमें से एक अधेड़ महिला हमारी मदद को आगे बढ़ी ,मैंने चूँकि उसे हिन्दुस्तानी में बात करते सुना था इसलिए मैंने उत्सुकतावश पूछ लिया आप हिन्दुस्तान से हो पर पहली बार जवाब में सन्नाटा मिला |हम समझ गए कुछ गड़बड़ है बाद में पता चला वो महिला पाकिस्तानी है और एमिरेट्स के काउंटर पर ज्यादातर पाकिस्तानी ही हैं ये एमिरेट्स की नीति का हिस्सा था या कुछ और इस पर कयास ही लगाये जा सकते हैं |लन्दन में भारतीयों से ज्यादा पाकिस्तानी हैं पर उनकी पहचान  पर भारत का साया हमेशा रहता है और वे लाख कोशिश करलें पर ये पहचान का संकट उनका पीछा नहीं छोड़ने वाला |सिक्योरिटी चेक में फिर ड्रामा लगता है मेरी शक्ल में ही कुछ दिक्कत है एक अंडाकार से कमरे में हाथ खड़े कर कई कोण बनाने पड़े ये क्रिया सारे लोगों से नहीं करवाई जा रही थी |हो सकता हो मेरे चेहरे से कोई दिक्कत हो |सामने शराब की दुकान का एक बड़ा काउंटर था जहाँ एक अधेड़ एक महिला से हिन्दी में बतिया रहे थे,जाहिर है वो उस एरिया के सेल्स प्रीजेंटेटीव थे और उनका एयरपोर्ट पर आने वाले मेहमानों को ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदने के लिए प्रेरित करना था  |एक बार फिर मेरा भारतीय मन जाग उठा और मैं उनकी बातें सुनने की कोशिश करने लगा कि  ये अंग्रेज भारतीय हिन्दी में क्यों और काहे बतियाते हैं |वो मुझसे मुखातिब हुए बात शराब से शुरू हुई  कि कैसे यहाँ का ड्यूटी फ्री दिल्ली के ड्यूटी फ्री से अलग है क्योंकि दिल्ली की कीमतों से हीथ्रो की कीमतें कुछ ज्यादा अलग नहीं थी |बस यहाँ वेराईटी ज्यादा थी |पर कब हम घर परिवार पर पहुँच गए किसी को नहीं पता चला |उन्होंने बताया वे लोग कीनिया से लन्दन में बसे हैं उनके दादा गुजरात से कीनिया चले गए थे फिर उनके पिता जी कीनिया से लन्दन आ गए |जब हम बेतकुल्लफ हो गए तो मैंने पूछा एक बात बताइए ,यहाँ सब कुछ बहुत अच्छा है पर जब शाम होती है तो भारत याद आता है क्योंकि न यहाँ यार दोस्त हैं न रिश्तेदार तब आप क्या करते हैं ?उन्होंने कहा ये सब बातें दो चार दिन ही सालती हैं हम तो पहले से जड़ से कटे हुए लोग हैं |सबसे बड़ी चीजहै  आपका परिवार अगर वो आपके पास है ,सुखी प्रसन्न है तो और क्या चाहिए |मेरा बेटा जब सुबह काम पर निकलता है तो मुझे पता है वो शाम को सही सलामत लौट आएगा और अगर उसके साथ कोई गड़बड़ होगी तो यहाँ का पुलिस प्रशासन ,अस्पताल सब उसकी मदद करेंगे |भारत में क्या आप निश्चिन्त होकर निकलते हैं |मैंने कुतर्क किया होनी को कौन टाल सकता है |उन्होंने प्रतिवाद किया देखिये ये देश ऐसे ही नहीं महान बना है |यहाँ जो लोग बोलते हैं वही करते हैं पर भारत में ऐसा कुछ भी नहीं है वो भारत के सिस्टम के कटु आलोचक जरुर थे पर उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से बड़ी उम्मीदें थीं |

केमडन बाजार

तर्क –वितर्क को पीछे छोड़ अब अंग्रेजों के देश को हमेशा के लिए विदा कहने का वक्त आ गया था ,चलते वक्त बारिश शुरू हो गयी थी |मैंने विमान की खिड़की से ऊपर आसमान पर नजर डाली |आसमान खुशी में भीगा था या दुःख में इसका फैसला मैं नहीं कर पा रहा था |मुझे ये पता था मैं अपने देश लौट रहा था जहाँ मेरा परिवार था ,जहाँ मेरे दोस्त थे |
  समाप्त 

2 comments:

Unknown said...

Awsm

Anonymous said...

Keep this going please, great job!

पसंद आया हो तो