स्टार्टअप्स ने न केवल रोजगार सृजन किया है बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भरता और नवाचार की ओर प्रेरित किया है. सामाजिक दृष्टि से यह आंदोलन ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच अवसरों की खाई को कम कर रहा है, महिलाओं की भागीदारी बढ़ा रहा है और तकनीकी समाधान से शिक्षा, स्वास्थ्य व पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रहा है.
डीपीआईआईटी और वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त आकलन. के अनुसार आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। नैसकॉम (NASSCOM) और ट्रैक्शन की ‘भारतीय तकनीकी स्टार्टअप परिदृश्य रिपोर्ट’. के आंकड़े बताते हैं कि देश में 120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं. यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है जब दुनिया भर में निवेश की रफ्तार धीमी रही, जिसे ‘फंडिंग विंटर’ कहा गया। इसके बावजूद भारतीय स्टार्टअप्स ने लागत नियंत्रण, मुनाफे और स्थिर बिजनेस मॉडल पर ध्यान देकर निवेशकों का भरोसा बनाए रखा.
इस स्टार्टअप आंदोलन की सबसे अहम बात इसका भौगोलिक विस्तार है। डीपीआईआईटी की ‘राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग रिपोर्ट’. के अनुसार, भारत के लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। जयपुर, इंदौर, लखनऊ, अहमदाबाद और कोच्चि जैसे शहर अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार के केंद्र बनते जा रहे हैं। छोटे शहरों के युवा स्थानीय समस्याओं—जैसे खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक्स—के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि स्टार्टअप इंडिया ने उद्यमिता को वास्तव में लोकतांत्रिक बना दिया है.
महिला उद्यमिता के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। .‘भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाएं रिपोर्ट (WISER)’. के अनुसार, भारत के करीब 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला संस्थापक या निदेशक शामिल है। यह आंकड़ा बीते पांच वर्षों में सबसे अधिक है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि महिलाएं अब केवल फैशन या शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फिनटेक, हेल्थ-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी नेतृत्व कर रही हैं। इसी वजह से भारत महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाने लगा है.
रोजगार के मोर्चे पर स्टार्टअप्स का प्रभाव और भी गहरा है। डीपीआईआईटी की ‘स्टार्टअप प्रभाव रिपोर्ट’. के अनुसार, स्टार्टअप्स अब तक सीधे तौर पर 21 लाख से अधिक नौकरियां पैदा कर चुके हैं। वहीं .नीति आयोग की ‘भारत में गिग इकॉनमी और भविष्य का कार्य’ रिपोर्ट. बताती है कि गिग इकॉनमी तेजी से फैल रही है और आने वाले वर्षों में करोड़ों युवाओं को लचीले रोजगार के अवसर मिलेंगे। आज गिग वर्क सिर्फ डिलीवरी सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आईटी प्रोफेशनल्स, डिजाइनर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और कंसल्टेंट्स भी शामिल हैं।ये स्टार्ट अप इंडिया का ही कमाल है कि गिग एकोनॉमी स्टार्ट अप इंडिया के साथ मिलकर एक नए भारत का निर्माण कर रही है.
तकनीक के क्षेत्र में 2025 खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक का साल रहा। .नैसकॉम–जिनोव की ‘डीप-टेक स्टार्टअप रिपोर्ट’. के अनुसार, बड़ी संख्या में नए स्टार्टअप एआई, स्पेस-टेक, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी में काम कर रहे हैं। .इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ‘इंडिया एआई मिशन प्रगति रिपोर्ट’. के मुताबिक, सरकार ने स्टार्टअप्स को कंप्यूटिंग पावर और डेटा तक आसान पहुंच दी है, जिससे भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान तैयार किए जा रहे हैं.
सरकारी नीतियों ने इस पूरे सफर को मजबूती दी है। .वित्त मंत्रालय और डीपीआईआईटी की ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस सुधार रिपोर्ट’. बताती है कि एंजेल टैक्स जैसी बाधाओं को हटाया गया और नियमों को सरल किया गया। वहीं .गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) की वार्षिक रिपोर्ट. के अनुसार, स्टार्टअप्स ने सरकारी प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके अलावा .स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना और क्रेडिट गारंटी योजना पर डीपीआईआईटी की प्रगति रिपोर्ट. यह दिखाती है कि पूंजी की कमी अब अच्छे विचारों के रास्ते में बड़ी बाधा नहीं रही.
कुल मिलाकर, 2025 में दर्ज हुए ये हजारों स्टार्टअप सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर हैं जो आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अलग-अलग सरकारी और उद्योग रिपोर्टें यह साबित करती हैं कि स्टार्टअप इंडिया अब एक स्थायी और निर्णायक आंदोलन बन चुका है। चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन उद्योग संवर्धन विभाग, नीति आयोग और नैसकॉम जैसे संस्थानों के आकलन साफ संकेत देते हैं कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ने में स्टार्टअप इकोसिस्टम एक मजबूत आधार बनने जा रहा है। मोबाईल क्रांति होने के साथ अब आने वाले दशक में इसमे वृद्धि होने की संभावना है . आंकड़े बताते है की आने वाले वक्त में इससे भारतीय एप बाजार में बड़ा परिवर्तन होगा और कंप्यूटर शिक्षा में नवाचार बढ़ने से और स्टार्ट अप कम्पनियों को वित्त के लिए इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा .जाहिर है भारतीय एप के डिजीटल प्लेटफार्म पर बढ़ती संख्या देश की बड़ी आबादी का जहाँ जीवन आसान करेगी वहीं विकसित भारत का सपना जल्दी ही हकीकत का रूप लेगा.

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