Friday, March 27, 2026

रचनात्मक प्रक्रिया में हिस्सेदारी

 

पिछले कुछ दशकों में डिजिटल तकनीक ने मानव जीवन के तकरीबन हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, इस कड़ी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई ने अभूतपूर्व गति से विकास करते हुए न केवल तकनीकी परिवर्तन को तेज किया है, बल्कि आज यह डिजिटल युग की अगुवाई करने वाली केंद्रीय शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है। एआई अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक संरचनाओं को पुनर्परिभाषित करने वाली शक्ति बन गया है। विशेष रूप से फिल्म निर्माण, पत्रकारिता, फोटोग्राफी और सॉफ्टवेयर उद्योग में इसका प्रभाव अत्यंत व्यापक हो चला है।

वर्तमान में एआई का इस्तेमाल केवल डेटा विश्लेषण या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है बल्कि यह रचनात्मक प्रक्रियाओं का भी हिस्सा बन चुका है । फिल्म निर्माण में पटकथा लेखन से लेकर विजुअल इफेक्ट्स तक, फोटोग्राफ जेनरेशन से लेकर संपादन तक, एआई नई संभावनाओं का द्वारा खोल रहा है।  ओपन एआई के सोरा-2, गूगल का वियो 3.1 जैसे एआई मॉडल सिनेमाई स्तर की वीडियो जेनरेशन में सक्षम हो रहे हैं। साल 2024 में आई हॉलीवुड फिल्म हियर में एआई के इस्तेमाल ने दर्शकों को चौंका दिया था, जिसमें एआई का उपयोग करके टॉम हैंक्स और रॉबिन राइट जैसे कलाकारों को कम उम्र का दिखाया गया था। इसके अलावा टॉप गन मैवरिक फिल्म में अभिनेता वाल किलमर की आवाज को एआई वॉयस क्लोनिंग की मदद से पुननिर्मित किया गया था, क्योंकि उनकी वास्तविक आवाज बीमारी के कारण प्रभावित हो चुकी थी। भारतीय संदर्भ में भी एआई के प्रयोग के उदाहरण सामने आने लगे हैं। फिल्म रांझनाके री-रिलीज़ के दौरान निर्देशक आंनद राय ने एआई की सहायता से फिल्म के अंतिम दृश्य में परिवर्तन कर अभिनेता धनुष के चरित्र को जीवित दिखाया। यह उदाहरण दर्शाता है कि एआई अब न केवल तकनीकी सुधार बल्कि कथा और भावनात्मक संरचना में भी हस्तक्षेप करने में सक्षम हो चुका है।
सामान्यत:फिल्म निर्माण को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया जाता है, प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन। एआई के रचनात्मक इस्तेमाल ने इन तीन चरणों में कुछ परिवर्तन किये हैं, प्री-प्रोडक्शन वह चरण होता है जहाँ पटकथा लेखन, पात्रों का विकास, स्टोरीबोर्ड इत्यादि बनाने का काम किया जाता है। पहले यह प्रक्रिया काफी समय लेने वाली और श्रमसाध्य होती थी लेकिन अब एआई आधारित उपकरण इस कार्य को तेज और अधिक व्यवस्थित बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त डिजिटल स्टोरीबोर्डिंग टूल्स के माध्यम से निर्देशक शूटिंग से पहले ही फिल्म के दृश्यात्मक ढाँचे को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। फिल्म निर्माण के दौरान कैमरा संचालन, लाइटिंग, और एडिटिंग जैसे कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। एआई संचालित कैमरा सिस्टम और ड्रोन तकनीक ने एक प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और कुशल बना दिया है। ऑटोमेटेड कैमरा ट्रैकिंग, फेस रिकग्निशन और आइडेंटिफिकेशन जैसी तकनीकों के माध्यम से कैमरा स्वयं ही विषय के अनुसार अपनी स्थिति समायोजित कर सकता है। और जटिल दृश्यों की शूटिंग पहले की तुलना में अधिक सरल और कम लागत वाली हो गई है। प्रोडक्शन वह क्षेत्र है जहाँ एआई का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है, संपादन, कलर ग्रेडिंग, साउंड मिक्सिंग और विजुअल इफेक्ट्स जैसे कार्य अब एआई की सहायता से तेजी से किये जा सकते हैं। विशेष रूप से टेक्स्ट-टू-वीडियो और जेनरेटिव एआई मॉडल ने फिल्म निर्माण में एक नया अध्याय जोड़ा है। इन तकनीकों की मदद से मंहगे सेट, बड़े स्टूडियो और विशाल वीएफएक्स टीमों पर निर्भरता कम हो सकती है। दिग्गज मार्केटिंग फर्म डेलॉयट के 18वीं डिजिटल मीडिया ट्रेंड सर्वे के अनुसार 22 प्रतिशत अमेरिकी जनता ने माना कि जेनरेटिव एआई इंसानों की तुलना में अधिक रोचक टीवी शो या फिल्में लिख सकता है।

वहीं पारंपरिक फोटोग्राफी के क्षेत्र में भी एआई आधारित सॉफ्टवेयर हजारों तस्वीरों में सबसे उपयुक्त तस्वीरों का चयन स्वत कर सकते हैं, साथ ही तस्वीरों के रंग, लाइटिंग और संरचना को स्वचलित रूप से सुधार भी सकते हैं। इससे फोटोग्राफर्स का समय भी बचता है और वे रचनात्मक पहलुओं पर अधिक ध्यान दे सकते हैं। आज कल स्मार्टफोन कैमरों में एआई आधारित कम्यूटेशनल फोटोग्राफी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके माध्यम से कम रोशनी में भी स्पष्ट तस्वीरें ली जा सकती हैं और अत्यधिक जूम के बावजूद चित्र की गुणवत्ता बनी रहती है। इसके अतिरिक्त जेनरेटिव एडिटिंग तकनीक के माध्यम से तस्वीरों में किसी भी चीज को जोड़ा या हटाया जा सकता है जो पहले एक लंबी एडिटिंग प्रक्रिया का हिस्सा होता था।
एआई के विकास ने रोजगार के क्षेत्र में भी नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर यह कई पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नए प्रकार के कौशल और पेशों को जन्म दे रहा है। साथ ही प्रॉम्ट इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण जैसे नए कौशल तेजी से उभर रहे हैं। पारंपरिक सॉफ्टवेयर्स का उपयोग किसी विशेष कार्य को पूरा करने के लिए किया जाता था उदाहरण के लिए फोटो एडिटिंग के लिए एक सॉफ्टवेयर, डेटा विश्लेषण के लिए दूसरा और संचार के लिए तीसरा लेकिन एआई के विकास के साथ यह मॉडल बदल रहा है। साथ ही पारंपरिक सॉफ्टवेयर में यूजर्स को जटिल इंटरफेस और कमांड्स सीखने पड़ते थे लेकिन एआई आधारित सिस्टम पर हम अपनी भाषा के माध्यम से निर्देश दे सकते हैं। यूजर को बस अपनी आवश्यकता बतानी है और एआई उसे झट से कर देगा। साल 2025 में आई माइक्रोसॉफ्ट को-पॉयलट यूसेज रिपोर्ट के अनुसार एआई अब नेचुरल लैंग्वेज यूजर इंटरफेस की ओर बढ़ रहा है, यानि आप बस एआई से कह सकते हैं, पिछले महीने की बिक्री का विश्लेषण करो और चार्ट बनाओ और बिना एक्सेल के जटिल फार्मुले जाने ये काम मिनटों में हो जाएगा।
हालांकि एआई के प्रसार से लोगों में रचनात्मकता और ध्यान व्यवहार पर खासा फर्क पड़ रहा है। शोधकर्ता सिबेल एयदोगान की किताब निगेटिव इफेक्ट्स ऑफ एआई ऑन ह्यूमन क्रियेटिव एबिलिटी के अनुसार एआई के तुरंत सुझाव और समाधान मिलने पर लोग जटिल समस्या से बचने लगते हैं, जिससे उनकी गहरी समझ और आलोचनात्मक सोच कम हो सकती है। नतीजन मानव रचनात्मकता पर असर होता है। कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि एआई पर हमारी बढ़ती निर्भरता धीरे-धीरे क्रिएटिव डिपेंडेंसी बना सकती है, अर्थात कलाकार अपने मूल विचार पैदा करने की क्षमता खो सकते हैं। वहीं एआई के दौर में कॉपीराइट कानून पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है, आज सबसे बड़ा सवाल है कि आर्टिस्ट कौन है, वर्तमान कॉपीराइट कानून के मानव रचनाकार को ही लेखक या क्रियेटर मानता है। भारतीय कॉपीराइट कानून के मुताबिक कोई भी रचना तब तक स्वामित्व योग्य नहीं है जब तक उसके मूल में कोई मानव न हो। यदि कोई कार्य पूरी तरह से एआई द्वारा तैयार किया गया है तो वह पेटेंट या कॉपीराइट अधिनियम के दायरे में नहीं आएगा। हालांकि ब्रिटेन में ऐसी रचनाओं में सिस्टम सेटअप करने वाले व्यक्ति को रचनाकार माना जाता है। इसी के चलते इन सीमाओं के बीच सह निर्माण या को-क्रिएशन की अवधारणा उभर रही है, यानी कला में अब मानव और मशीन दोनों की साझेदारी पर बल दिया जा रहा है। वहीं भारत समेत कई देशों ने एआई जनित मीडिया के लेबलिंग और पारदर्शिता पर कदम बढ़ाए हैं, भारत सरकार के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई से बनाए गए फोटो, ऑडियो और वीडियो पर स्पष्ट रूप से एआई जनित टैग चिह्नित करना होना। साथ ही कलाकारों के अधिकार सुरक्षित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, कलाकारों की बिना अनुमति के उनके चित्र या आवाज का एआई के जरिए उपयोग करने पर कड़े प्रावधान किये जा रहे हैं।
एआई आज तकनीकी विकास के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व कर रहा है,जहाँ उसकी उपस्थिति केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह रचनात्मक प्रक्रियाओं का सक्रिय भागीदार बन चुका है। विभिन्न क्रिएटिव क्षेत्रों में उसकी बढ़ती दखल इस बात का संकेत है कि भविष्य का सृजनात्मक परिदृश्य मानव और मशीन के संयुक्त प्रयासों पर आधारित होगा। एक ओर जहाँ एआई ने कार्यों को अधिक तेज, सटीक और किफायती बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसने कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति के नए आयाम भी खोल दिए हैं। इसके बावजूद, रोजगार के बदलते स्वरूप, नैतिक सीमाओं और कॉपीराइट से जुड़े प्रश्नों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।। आगे बढ़ते हुए अत: हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई मानव रचनात्मकता का प्रतिस्थापन नहीं बल्कि विस्तारक है।
दैनिक जागरण में 27/03/2026 को प्रकाशित लेख 

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