हाल ही में विश्व की बड़ी तकनीकी कंपनियों में से एक ओरेकल कॉर्पोरेशन द्वारा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की खबरें सुर्खियों में रही हैं। एक ही दिन में क़रीब 30 हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की घटना ने सॉफ़्टवेयर उद्योग के भविष्य को लेकर एक गंभीर बहस को जन्म दिया है। यह घटना केवल एक कंपनी का निर्णय नहीं, बल्कि उस व्यापक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण पूरे सॉफ़्टवेयर उद्योग में देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दशकों में सॉफ़्टवेयर उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। विशेषकर भारत जैसे देशों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। टीसीएस और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने न केवल लाखों लोगों को रोजगार दिया है, बल्कि भारत को वैश्विक आईटी हब के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों का प्रमुख बिज़नेस मॉडल ‘सर्विस मॉडल’ रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में इंजीनियर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सॉफ़्टवेयर सेवाएँ प्रदान करते रहे हैं।
यदि हम अतीत की ओर देखें, तो कंप्यूटर पर काम करने का मतलब होता था अलग-अलग सॉफ़्टवेयर का उपयोग। उदाहरण के लिए, लेखन के लिए माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, डेटा प्रबंधन के लिए एक्सेल, और फोटो संपादन के लिए फोटोशॉप जैसे टूल्स का उपयोग किया जाता था। हर कार्य के लिए अलग टूल और हर टूल को सीखने के लिए समय और कौशल की आवश्यकता होती थी।किन्तु आज यह परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब उपयोगकर्ता केवल एक साधारण निर्देश यानी प्रॉम्ट देते हैं, जैसे “इस डेटा का विश्लेषण कर दो” या “इस फोटो को बेहतर बना दो” और एआई स्वयं ही पूरा कार्य कर देता है। इस परिवर्तन ने न केवल कार्यप्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि पारंपरिक सॉफ़्टवेयर उद्योग की संरचना को भी चुनौती दी है।
एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण वैश्विक आईटी बाज़ार में अस्थिरता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। हाल के महीनों में सॉफ़्टवेयर कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस और और मैकेंजी ग्लोबल की रिपोर्ट्स के अनुसार, टेक सेक्टर के वैल्यूएशन में तेज गिरावट देखी गई है, जिसका अनुमान 800 अरब डॉलर से 1 ट्रिलियन डॉलर तक लगाया गया है।इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण तब सामने आया जब एआई स्टार्टअप एनथ्रॉपिक ने अपने क्लाउड-आधारित एजेंट्स के लिए एआई प्लगइन्स पेश किए। ये टूल्स कानूनी विश्लेषण, वित्तीय मॉडलिंग, कोडिंग, ग्राहक सेवा और डेटा प्रोसेसिंग जैसे जटिल कार्यों को स्वचालित रूप से करने में सक्षम हैं। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जिन कार्यों के लिए पहले बड़ी सॉफ़्टवेयर टीमों की आवश्यकता होती थी, वे अब मशीनों द्वारा अधिक तेज़ और कम लागत में किए जा सकते हैं।
यह परिवर्तन केवल सॉफ़्टवेयर उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मक क्षेत्रों जैसे फिल्म और फोटोग्राफी पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। पहले जहाँ पटकथा लेखन एक पूर्णतः मानवीय और रचनात्मक प्रक्रिया मानी जाती थी, वहीं अब एआई टूल्स की सहायता से कथानक संरचना, संवाद और चरित्र विकास कुछ ही मिनटों में संभव हो गया है। स्टोरीबोर्डिंग और विजुअल प्लानिंग जैसे कार्य, जो पहले विशेष सॉफ़्टवेयर और विशेषज्ञता पर निर्भर थे, अब टेक्स्ट-आधारित इनपुट से ही पूरे किए जा सकते हैं।
पोस्ट-प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी सोरा, वियो और लूमा एआई जैसे टूल्स पारंपरिक वीडियो एडिटिंग और वीएफएक्स सॉफ़्टवेयर को चुनौती दे रहे हैं। ये टूल्स न केवल समय की बचत करते हैं, बल्कि रचनात्मक संभावनाओं का भी विस्तार करते हैं।फोटोग्राफी उद्योग में भी यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहाँ ‘कैप्चर’ की पारंपरिक अवधारणा अब ‘क्रिएशन’ में बदल रही है। पहले फोटोग्राफर का मुख्य कार्य सही समय, प्रकाश और फ्रेमिंग के माध्यम से एक क्षण को कैद करना होता था, जिसके बाद एडिटिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया जाता था। किन्तु अब एआई इस पूरी प्रक्रिया को एकीकृत कर रहा है। आज स्मार्टफ़ोन और कैमरे एआई की सहायता से स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं कि किस सेटिंग पर इमेज सबसे उपयुक्त होगी। इमेजिन एआई और आफ्टरशूट जैसे टूल्स न केवल फोटो चयन और संपादन को स्वचालित कर रहे हैं, बल्कि जेनरेटिव फिल जैसी तकनीकों के माध्यम से इमेज को पुनर्निर्मित और परिवर्तित भी कर रहे हैं।
तकनीकी इतिहास पर दृष्टि डालें तो सॉफ़्टवेयर उद्योग की उत्पत्ति 1970–80 के दशक की पर्सनल कंप्यूटिंग क्रांति से मानी जाती है, जब कंप्यूटर संस्थानों से निकलकर आम लोगों तक पहुँचना शुरू हुए। इसके बाद 2000 के दशक में इंटरनेट और क्लाउड सेवाओं के विस्तार ने इस उद्योग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। मैकिंज़ी वैश्विक संस्थान की रिपोर्टों में इस परिवर्तन को “डिजिटल रूपांतरण” की लहर के रूप में समझाया है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में सॉफ़्टवेयर की केंद्रीय भूमिका स्थापित की थी। इस पूरे विकासक्रम में सॉफ़्टवेयर का स्वरूप “इंटरफेस-आधारित” रहा था जिसका मतलब है प्रत्येक कार्य के लिए अलग सॉफ़्टवेयर और उसका विशिष्ट इंटरफेस होता था। किन्तु बड़े भाषाई मॉडल्स के आगमन के साथ यह स्थिति तेजी से बदल रही है। स्टैनफोर्ड मानव-केंद्रित एआई संस्थान की “एआई सूचकांक रिपोर्ट 2024” के अनुसार, संवाद-आधारित इंटरफेस पारंपरिक ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस को चुनौती दे रहे हैं, जहाँ उपयोगकर्ता केवल सामान्य भाषा के माध्यम से जटिल कार्यों को संपन्न कर पा रहे हैं। इस प्रकार “बातचीत” स्वयं एक इंटरफेस का रूप लेती जा रही है।
इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आयाम एआई-संचालित कोड जनरेशन के रूप में सामने आया है। २०२३ में आये गिटहब और माइक्रोसॉफ्ट के संयुक्त अध्ययन के अनुसार, कोपायलट का उपयोग करने वाले लगभग 55–75% डेवलपर्स ने अधिक उत्पादकता और कम मानसिक थकान की सूचना दी। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब बुनियादी कोड लेखन का कार्य धीरे-धीरे एआई द्वारा किया जा रहा है, जबकि मानव डेवलपर्स उच्च-स्तरीय समस्या-समाधान और डिजाइन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में, “कोड लिखना” अब एक मुख्य कौशल न रहकर एक सहायक टूल में परिवर्तित हो रहा है। इसी प्रकार विश्व आर्थिक मंच की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट के मुताबिक़ एआई की बढ़ती भूमिका से पुनावृत्ति वाले नौकरी पेशा पर अधिक दबाव बनेगा, बल्कि उच्च स्तरीय विश्लेषणात्मक और रचनात्मक भूमिकाओं की माँग में वृद्धि होगी।
2025 में आई रॉयटर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने एआई और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के चलते लगभग 12,000 से अधिक पदों में कटौती का संकेत दिया है।वहीं ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन वेब सर्विसेज और गूगल जैसी कंपनियाँ बड़े पैमाने पर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं। गार्टनर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सॉफ़्टवेयर उद्योग अब सॉफ़्टवेयर एज अ सर्विस से एआई एज अ सर्विस मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यानी अब कंपनियाँ सॉफ़्टवेयर नहीं, बल्कि “बुद्धिमत्ता” बेच रही हैं। हालांकि यह कहना अप्रासंगिक होगा कि एआई, सॉफ़्टवेयर उद्योग को पूरी तरह से खत्म कर देगा या यूजर्स की निर्भरता सॉफ्टवेयर से बिल्कुल कम कर देगा, सही बात यह है कि लोगों को टिके रहने के लिए को ख़ुद को एआई लिटरेसी और कर्मचारियों प्रॉम्ट इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने और बदलती तकनीक के अनुरूप ख़ुद को ढालने की क्षमता सीखनी होगी ।
दैनिक जागरण में 11/06/2026 को प्रकाशित लेख
