Sunday, September 10, 2023

लखनऊ, तुझसे ही सीखा है मैंने जीने का अंदाज


 लक्ष्मण ने बसाया था नवाबों ने संवारा 

 लखनऊ फ़िदा है तुझ पर ये नन्हा   सा  दिल हमारा |

गोमती के किनारे बसती है एक राहगुज़र,

 इन्ही राहों से निकलें हैं  हमारे सपने करते हैं सफ़र  ।

तुझे सोचने पर धडकता है मेरा दिल 

तहजीब और तमीज के इस शहर को भूलना बड़ा  मुश्किल |

ये मनाता है कभी ईद तो कभी दीवाली 

ये शहर नहीं होता कभी उम्मीद से खाली |

चिकनकारी की कढाई  और दशहरी की बातें, 

ये है लखनऊ की निशानियाँ  और उनकी रवायतें ।

इसके  सीने पर गुजरते हुए  तांगों की आवाज़,

 वो भीगती हुई मिट्टी की खुशबू और खुशी का आगाज़ |

ये शहर है लखनऊ, जिसकी दास्ताँ हैं अनमोल,

यहाँ की गलियों में छुपे  है अदबी  शायरी के बोल  

क़ैफियत से भरी हर जगह और  जिन्दादिली का राज  , 

लखनऊ, तुझसे ही सीखा है मैंने जीने का अंदाज ||


लखनऊ पर एक कविता 

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