Monday, October 31, 2016

अब आपकी मुट्ठी में है मनोरंजन की दुनिया



कल तक स्क्रीन का मतलब घरों में सिर्फ टीवी ही  होता था पर आज उस स्क्रीन के साथ एक और स्क्रीन हमारी जिन्दगी का अहम् हिस्सा बन गयी है वो है हमारे स्मार्ट फोन की स्क्रीन जहाँ मनोरंजन से लेकर समाचारों का सारा खजाना  मौजूद है रही सही कसर फेस्वुक लाईव फीचर ने पूरी कर दी है | ऑनलाईन मनोरजन उद्योग भारत में बगैर हलचल के तेजी से पैर पसार रहा है | मनोरंजन के लिए हमारी निर्भरता का प्राथमिक माध्यम  टेलीविजन पिछड़ रहा  है |समाचारों के मामले में हमारी निर्भरता टीवी और समाचार पत्रों पर कम हुई है और इसकी जगह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पहले ही ले चुके हैं पर मनोरजन के क्षेत्र में टीवी की बादशाहत बरकरार रही पर इसको असली टक्कर इंटरनेट में 4 जी तकनीक और डाटा पैक के साथ मनोरंजन के विभिन्न एप से मिलनी शुरू हो गयी है |शुरुआत यूट्यूब के वीडियो से हुई |आज लगभग छ करोड़ भारतीय (60 मिलीयन ) महीने में अडतालीस घंटे यूट्यूब पर वीडियो देखने में बिताते हैं |ये इस ओर इशारा करता है कि भारतीय दर्शकों की मनोरंजन जरूरतों को टीवी अकेले पूरा करने में अक्षम है दूसरा अपनी मनोरंजन जरूरतों को पूरा करने के लिए दर्शक टेलीविजन की  बंधी बंधाई समय सारिणी  से निजात चाहता है |यानि पसंद का कंटेंट दर्शकों के पसंद के समय के हिसाब से |गूगल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल  देश से वीडियो अपलोड होने की संख्या में नब्बे प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और वीडियो देखने के समय में अस्सी प्रतिशत का इजाफा हुआ है |तथ्य यह भी यूट्यूब पर वीडियो देखने के समय में इजाफा स्मार्ट फोन की बढ़ती संख्या के साथ हुआ है | मनोरंजन उद्योग से जुड़े हुए सभी बड़े समूह अपने यूट्यूब चैनल के साथ मैदान में मौजूद हैं |भारतीय वीडियो देखना बहुत पसंद कर रहे हैं आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं |2015 के आंकड़ों के मुताबिक यूट्यूब भारत के कुल स्मार्टफोन उपभोक्ता मे से साठ प्रतिशत यूट्यूब के एप का नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं और कुल छाछट प्रतिशत उपभोक्ता नियमित रूप से इंटरनेट पर यूट्यूब के इतर वीडियो देखते हैं साल 2014 में यह आंकड़ा उनचास प्रतिशत था |आंकड़ों का विश्लेषण करते वक्त हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तब 4जी तकनीक देश में शुरू हुई नहीं थी |इण्डिया मोबाईल ब्रोड्बैंड इंडेक्स 2016 और के पी एम् जी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल नेट डाटा उपभोग का अडतीस से बयालीस प्रतिशत हिस्सा वीडियो और ऑडियो पर खर्च किया जाता है | डिजीटल विज्ञापनों पर बढ़ता खर्च भी इसी तथ्य को इंगित कर रहा है साल 2015 में जहाँ इन पर 6010 करोड़ रुपये खर्च किये गये जिसके साल 2020 तक करीब चार गुना 25,520 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है |
हिन्दुस्तान में 31/10/16 को प्रकाशित 

Tuesday, October 4, 2016

चालीस पार का जीवन


जीवन के  दो युग आमने सामने हैं|मेरा चौदह वर्षीय बेटा अक्सर शीशे के सामने खड़ा होकर अपने आप को
निहारा करता है अपनी उगती हुई हल्की दाढ़ी पर हाथ फेर कर पूछता है मैं कब शेव करूँगा ?और उसी वक्त मैं भी उसी शीशे के सामने अपने बचे हुए बालों को समेटते हुए उनको रंगने की जद्दोजहद में लगा रहता हूँ जिससे अपनी बढ़ती उम्र को छुपा सकूँ |बाल तो ठीक है पर पकी हुई दाढी को कितना भी क्यों न रंग लो एक दो बाल छूट ही जाते हैं जो आपकी बढ़ती हुई उम्र की चुगली कर ही देते हैं |मैं और मेरा बेटा उम्र के एक ऐसे ही दौर से गुजर रहे हैं जहाँ हम जो हैं वो मानने को तैयार नहीं है वो अब किशोरावास्था में है जब बच्चों के लिए बड़ा हो गया है और जवानों के लिए बच्चा ही है |उसका बाप यानि मैं अपनी जवानी की उम्र छोड़ आया है पर बुढ़ापा अभी आया नहीं है दोनों उम्र के जिस मुकाम पर हैं उसे बदलना चाहते हैं |मैं अपने सफ़ेद बालों को काले रंग से जिससे लोग मुझे अधेड़ न मानें और बेटा जल्दी से जल्दी दाढी उगा कर बड़ा हो जाना चाहता है | एक आगे निकल जाना चाहता है और एक पीछे लौटना चाहता है | दोनों ही दौर थोड़े मुश्किल होते हैं पर जहाँ किशोरवस्था में सपने  उम्मीदें और आने वाले एक बेहतर कल का भरोसा होता है वहीं चालीस पार का जीवन थोडा परेशान करता है |जिन्दगी का मतलब रिश्तों के साथ से होता है पर उम्र के इस पड़ाव पर इंसान का सबसे पहला करीबी रिश्ता  टूटता है यानि माता –पिता या तो वो जा चुके होते हैं या उम्र के ऐसे मुकाम  पर होते हैं जब कभी भी कोई बुरी खबर आ सकती है | जिन्दगी में एक अजीब तरह की स्थिरता आ चुकी होती है (अपवादों को छोड़कर) जहाँ से आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि आप कितनी दूर और जायेंगे |इस चालीस पार के जीवन में वो बातें अब अजीब लगती हैं जिनका हमने खुद अपने चौदह पार के जीवन (किशोरावस्था ) में बड़े मजे से लुत्फ़ उठाया था जैसे जोर जोर से गाने सुनना और बार –बार शीशे में चेहरा देखना |बेटे को जल्दी है ये समय जल्दी से बीत जाए और वो बड़ा हो जाए |मैं समय को रोक देना चाहता हूँ ताकि कुछ समय और मिल जाए |इन दिनों मुझे लखनऊ के शायर मीर अनीस साहब का एक शेर ज्यादा याद आता है “दुनिया भी अजब सराय फानी देखी,हर चीज यहाँ की आनी जानी देखी,जो आके ना जाये वो बुढ़ापा देखा,जो जाके ना आये वो जवानी देखी |

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