Thursday, March 7, 2024

जिम्मेदारी निभाने का समय

 

मेरे जीवन के कई बसंत सिर्फ यह सुनते सुनते बीत गए कि देश का युवा जागरूक नहीं है  पर क्या ऐसा वास्तव में है|  मस्ती की पाठशाला में बिंदास जीवन का पाठ पढ़ रहे युवाओं ने देश ही  क्या सारी दुनिया में दिखा दिया कि ना तो वो गैर जिम्मेदार हैं और ना ही अपने आस पास के परिवेश से कटे हुए| वास्तव ऐसा है नहीं |यही युवा है जो दुनिया भर की सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर कई मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने में लगे हुए है |वो एक गाना है “ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा” कोई ध्वनि प्रदूषण नहीं हुआ पर सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर जो कुछ लिखा पढ़ा गया उसका असर सारे देश ने देखा और सुना भी |निर्भया काण्ड के बाद युवाओं की इसी मुहिम ने लोगों को  अपने घरों से बाहर निकालाये एक सेल्फ मोटीवेटेड प्रयास था ना लाउडस्पीकर बजे ना लोग घरों घरों में जाकर घूमे यानि ना बिल आये ना दिल घबराये फिर भी कमाल का असर हुआ और महिलाओं के लिए एक नया कानून बना  |अब जब सिस्टम को सुधारने की बात की जायेगी तो उसका भारत में कम से कम एक ही तरीका है राजनीति  में अच्छे और नए लोग ज्यादा से ज्यादा चुनकर आयें और ये काम पांच साल में एक ही बार होता है 

एक बार अगर हमने गलती कर दी तो पांच साल का इन्तिज़ार करना पड़ेगा .अमूमन यूथ चुनाव  के समय वोट ये सोचकर नहीं जाता कि हमारे एक वोट से क्या होगा और वही एक कम  वोट सही  कैन्डीडेट को हरा देता है . अब  देश का यूथ पोलिटकली एक्टिव हो रहा है |हम जैसा सिस्टम चाहते हैं उसको बनाने की जिम्मेदारी हम किसको सौपने जा रहे हैं और इसके लिए हमें वोट देने जाना जरूरी है .वोटिंग डे को होलिडे मत समझिए ये सबसे बड़े काम का दिन है .मेरी बात पढकर शायद आप मान जाएँ पर वो जिसने ये लेख नहीं पढ़ा या चुनाव जिसकी  प्राथमिकता में नहीं है उनका क्या करें ? चलिए एक कोशिश कर के देखते हैं हम सभी टेक्सेवी तो हैं ही ना तो तकनीक को हम  अपना माध्यम बनाते हैं .आज से सोशल नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल लोगो को इस बात को मोटिवेट करने के लिए कीजिये कि लोग वोट देने जरुर जाएँ और वोट सही उम्मीदवार को दें .

वोट देने के बाद तुरंत अपना स्टेटस अपडेट कीजिये जिससे आपका वो फ्रैंड जो थोडा सुस्त है उसे भी याद आ जाए कि जैसे हर एक फ्रैंड जरूरी होता है वैसे ही हर एक वोट भी .ब्लॉग लिखिए ,ग्रुप्स बनाइये लोगों को याद दिलाइए कि वोट डालने के लिए उन्होंने अपना नाम रजिस्टर्ड कराया या नहीं और ये काम हमें इसलिए करना है कि   ये हमारा देश है पर इसकी ज्यादा जिम्मेदारी हर यांगिस्तानी की है ध्यान रखियेगा भारत में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ऐसे युवाओं की हैजिनकी उम्र 35 वर्ष से कम है तो आपकी जिम्मेदारी ज्यादा है .सोच क्या रहे हैं जल्दी से लग जाइए काम पर ये गाते हुए हर एक वोट जरूरी होता है.

--प्रभात खबर में 07/03/2024 को प्रकाशित लेख 

'मीम' संवाद की भाषा भाषा बदल रहे हैं

 इंटरनेट ने लोक व लोकाचार के तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है। बहुत-सी परंपराएं और बहत सारे रिवाज अब अपना रास्ता बदल रहे हैं। यह प्रक्रिया इतनी तेज है कि नया बहुत जल्दी पुराना हो जा रहा है। अब शब्द नहीं भाव और परिवेश बोल रहे हैं|जहाँ संचार के लिए न तो किसी भाषा विशेष को जानने की अनिवार्यता है और न ही  वर्तनी और व्याकरण की बंदिशें|तस्वीरें एक सार्वभौमिक भाषा बनकर उभर रही हैं दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला व्यक्ति तस्वीरों और वीडियो  के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुंचा पा रहा है|जाहिर है इंटरनेट के कारण हम एक ऐसे युग के साक्षी बन रहे हैं जो अपने आप में अनूठा है |संवाद के इसी माध्यम के रूप में जेन जी में तेजी से लोकप्रिय होती शैली है “मीम” | पिछले कई वर्षों मेंइंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने नए शॉर्टहैंड बनाकर तेजी से संवाद करने के तरीके विकसित किए हैं। BTW और LOL जैसे संक्षिप्त रूप इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाए गए एक पूरी तरह से नए शब्दकोष का हिस्सा हैं। इमोटिकॉन्सया टेक्स्ट-आधारित एक्सप्रेशनजैसे =) और :-भी लोकप्रिय मीम बन गए हैं। इंटरनेट मीम  भी विषय हो सकते हैंजैसे ब्लॉग या अन्य वेबसाइटों द्वारा लोकप्रिय हुए  लोग स्थान या जानवर। उदाहरण के लिएएक सार्वजनिक घोटाले में शामिल एक राजनेता या सेलिब्रिटी कई ब्लॉगर्स के लिए इंटरनेट मीम  बन सकता है|

मीम  की |आधुनिक परिभाषा एक विनोदी छवि, वीडियो, किसी टेक्स्ट ( पाठ) का टुकड़ा या एनीमेटेड तस्वीर( जीआईएफ) है जो सोशल मीडिया पर अक्सर थोड़े बदलाव के साथ प्रसारितहै, मीम्स कोई भी बना सकता है और किसी भी चीज़ के बारे में हो सकता है, वर्तमान घटनाओं से लेकर किसी भी सांसारिक कार्यों तक, जिसमें राजनीतिक सांस्कृतिक और फिल्म के सन्दर्भ शामिल होते हैं |मीम की लंबाई अलग-अलग होती है. क्योंकि वे छवियों, प्रतीकों , पाठ, वीडियो या जीआईएफ का रूप ले सकते हैं , वे एक छवि या वाक्यांश जितने छोटे हो सकते हैं और एक विस्तृत कथा के साथ कई मिनट के वीडियो जितने लंबे हो सकते हैं। कुछ मीम्स की सोशल मीडिया पर लोकप्रियता क्षणिक  होती है, जबकि कुछ  वर्षों तक टिके रहते हैं।मीम्स की अवधारणा की जड़ें जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिन्स की 1976 में प्रकाशित  किताब, द सेल्फिश जीन से मिलती हैं । डॉकिन्स ने मीम  को एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में परिभाषित किया है | जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है, जैसे कि जीन प्रजनन के माध्यम से फैलते हैं। मीम  शब्द स्वयं ग्रीक शब्द माइमेमा  से आया है , जिसका अर्थ है "जिसकी नकल की जाती है।"डॉकिन्स की किताब से पता चलता है कि मीम्स के उदाहरण सदियों पुराने हैं। लेकिन इन दिनों, जब हम मीम्स के बारे में सोचते हैं, तो आमतौर पर इंटरनेट मीम्स ही दिमाग में आते हैं। पहला इंटरनेट मीम व्यापक रूप से " डांसिंग बेबी " माना जाता है, जिसमें एक 3डी एनिमेटेड बच्चा जो चा-चा नृत्य कर रहा था, यह 1990 के दशक के अंत में लोकप्रिय हुआ।इंटरनेट कंसल्टिंग फर्म रेड्शीर की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में भारतीय स्मार्टफोन उपयोगकर्ता प्रतिदिन तीस  मिनट का समय मीम्स देखने में बिता रहे हैं |

साल 2021 के मुकाबले भारत में मीम्स  खपत में  अस्सी प्रतिशत की वृद्धि हुई है |इसी शोध के अनुसार मीम लोगों का तनाव दूर करने का एक अच्छा माध्यम बन कर उभरा है |2021 के इंस्टाग्राम के आंकड़ों  से पता चलता है कि सारी दुनिया में मीम शेयरिंग में दोगुनी वृद्धि हुई है, आज रोज लगभग  एक मिलियन मीम शेयर किए जाते हैंजो 2018 में 500,000 से अधिक है| ये आंकड़े मीम की बढ़ती लोकप्रियता को उजागर करते  है। फोर्ब्स के एक शोध के  अनुसार  मीम विज्ञापन  अभियान ईमेल मार्केटिंग की तुलना में चौदह प्रतिशत  अधिक क्लिक-थ्रू दर प्राप्त करते हैंजो उनकी शक्तिशाली वायरल अपील और व्यापक पहुंच को प्रदर्शित करता है।हालाँकि मीम का एक अवधारणा के रूप में अभी आंकलन होना बाकी है लेकिन पर्याप्त इंटरनेट जागरूकता के अभाव में मीम चरित्र हनन का भी एक बड़ा जरिया बन रहे हैं |जिसके लिए लोगों को सचेत होने की जरुरत है |मनोरंजन के लिए किसी का मजाक किस हद तक उड़ाया जाए |दूसरी समस्या सामान्य लोगों की निजता की भी है जिनके चेहरे इंटरनेट पर किसी वजह से वायरल हो जाते हैं फिर वे तरह तरह के मीम का हिस्सा बन जाते हैं |संवाद और मनोरंजन का यह नया रूप भविष्य में कैसे जिम्मेदारी से विकसित होगा |इसका फैसला होने में अभी वक्त है |

अमर उजाला में 07/03/2024 को प्रकाशित 

Saturday, March 2, 2024

इन्फ़्लुएन्सर मार्केटिंग पर नकेल

 बात ज्यादा पुरानी नहीं है |आज से पांच साल पहले किसी ने नहीं सोचा था कि एक ऐसा वक्त भी आएगा जब आप कुछ न करते हुए भी बहुत कुछ करेंगे और पैसे भी कमाएंगे |बात चाहे यात्राओं की हो या खान –पान की या फिर फैशन की देश विदेश की बड़ी कम्पनिया ऐसे लोगों को जो इंटरनेट पर ज्यादा फोलोवर रखते हैं अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन के लिए पैसे दे रही हैं और उनके खर्चे भी उठा रही हैं इंटरनेट की दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण बात है इसकी गतिशीलता नया बहुत जल्दी पुराना हो जाता है और नई संभावनाओं के द्वार खुल जाते हैं |सोशल मीडिया प्लेटफोर्म नित नए रूप बदल रहे हैं उसमें नए –नए फीचर्स जोड़े जा रहे हैं |इस सारी कवायद का मतलब ऑडिएंस को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक अपने प्लेटफोर्म से जोड़े रखना |इसका बड़ा कारण इंटरनेट द्वारा पैदा हो रही आय भी है |अब सोशल मीडिया इतना तेज़ और जन-सामान्य का संचार माध्यम बन गया कि इसने हर उस व्यक्ति को जिसके पास स्मार्ट फोन है और सोशल मीडिया पर उसकी एक बड़ी फैन फोलोविंग  वह एक चलता फिरता मीडिया हाउस बन गया  है अब वह वक्त जा चुका है जब सेलेब्रेटी स्टेट्स माने के लिए किसी को सालों इन्तजार करना पड़ता था |सोशल मीडिया रातों रात लोगों को सेलिब्रटी बना दे रहा है जिसमें बड़ी भूमिका ,फेसबुक ,इन्स्टाग्राम और यू ट्यूब जैसी साईट्स निभा रही हैं |

मूल्यांकन सलाहकार फर्म (Valuation Advisory firm  Kroll) क्रोल  की एक नवीन रिपोर्ट के अनुसार एक साल में भारतीय ब्रांड्स ने अपनी इन्फ़्लुएन्सर मार्केटिंग पर खर्च दोगुना कर दिया |पिछले एक साल में एक तिहाई भारतीय ब्रांड्स ने सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सेर्स पर अपना खर्च दो गुना कर दिया है कोरोना महामारी ने बड़ी मात्रा में डिजिटलीकरण को प्रेरित किया भारत में सोशल मीडिया की कंटेंट क्रियेटर इंडस्ट्री पच्चीस प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रही है और जिसके साल 2025 में 290|3 मिलीयन डालर हो जाने की उम्मीद है |  सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सेर्स   अब ब्रांड को एक बड़े दर्शक वर्ग पर कम खर्च में पहुंचने का एक सुलभ तरीका बन रहा है आज भारत में लगभग 80 मिलियन कॉन्टेंट क्रिएटर हैंजिनमें वीडियो स्ट्रीमर्स,   इन्फ़्लुएन्सेर्स    और ब्लॉगर्स शामिल हैं। डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी आई क्यूब्स वायर के  एक शोध से पता चलता है कि लगभग 35 प्रतिशत  ग्राहकों के खरीदारी निर्णय सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पोस्टरील्स और वीडियो देखकर लिए जा रहे हैं | affable|ai नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित इंफ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफोर्म के आंकड़ों के अनुसार नैनो- इंफ्लुएंसरजिनके पास 10,000 से कम फॉलोअर हैंने 2022 में इंस्टाग्राम पर सबसे अधिक इंगेजमेंट अर्जित की है |जबकि माइक्रो इंफ्लुएंसर जिनके दस हजार से पचास हजार के बीच फॉलोअर ने इन्स्टाग्राम और यू ट्यूब पर ज्यादा दर्शक मिले पर उनकी इंगेजमेंट दर कम थी |

सोशल मीडिया यूजर्स अपनी बड़ी फैन फोलोइंग का फ़ायदा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर  के तौर पर उठा रहें और यह एक विज्ञापन के नए माध्यम के रूप में तेजी से उभर रहा हैसोशल मीडिया अब आम इंटरनेट यूजर्स को सितारा बना रहा है |

 देश  में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरव्यक्ति और ब्रांड प्रमोशन का बड़ा औजार  बनकर सामने आया है |  सोशल मीडिया विज्ञापन का एक अपरंपरागत माध्यम  है जो बाकी सारे मीडिया (प्रिंटइलेक्ट्रॉनिक और समानांतर मीडिया) से अलग है |यह एक वर्चुअल वर्ल्ड बनाता है जिसे उपयोग करने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म (फेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम) आदि का इंटरनेट के माध्यम से  उपयोग कर किसी भी नेट कनेक्टेड व्यक्ति तक पहुंच बना सकता है |

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वह आम व्यक्ति होता है जिसकी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर काफी सारे फोलोवर होते हैं और वह अपनी इस लोकप्रियता का इस्तेमाल  विभिन्न तरह के उत्पाद बेचने में करता है इसमें रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट दूसरे विज्ञापन  माध्यमों के मुक़ाबले अधिक हैदेश के लाखों युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को एक करियर के अच्छे विकल्प के रूप में देख रहे हैं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जहाँ विज्ञापनों की दुनिया में एक नया आयाम गढ़ रहा है वहीं विज्ञापनों की दुनिया में सेलिब्रेटी स्टेट्स को खत्म भी कर रहा है |जहाँ हमारे आपके बीच के लोग ही स्टार बन रहे है |

भारत में चूँकि अभी इंटरनेट बाजार में पर्याप्त संभावनाएं हैं इसलिए अभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का यह दौर चलेगा पर कुछ चिंताएं भी है भारत के इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग उद्योग को विनियमन की आवश्यकता है ताकि तथ्यों के गलत प्रस्तुतीकरण  से बचा जा सके। जनवरी मेंभारत के उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने घोषणा की कि ऐसे में ये गाइडलाइंस ग्राहक हितों की रक्षा के लिए जरूरी हैंसोशल मीडिया पर ऐड्स करने वाले सेलेब्रिटीज़ भी इसके दायरे में होंगेकिसी भी भ्रामक विज्ञापन व  इन्हें नहीं मानने पर इंफ्लूएंसर्स को 10 लाख तक का जुर्माना देना होगालगातार अवमानना पर 50 लाख तक जुर्माना देना होगासाथ ही एंडोर्स करने वाले को से महीने तक किसी भी एंडोर्समेंट करने  से रोका जा सकता हैउस प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने की कार्रवाई भी सम्भव है|

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को आत्म-नियंत्रित करने की आवश्यकता है जिससे वे  नीति निर्माण में भाग ले सकें ताकि इस उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव होपरम्परागत विज्ञापनों में शामिल खिलाड़ियों और सिने कलाकारों के प्रति लोगों का मोह एकदम से कम तो नहीं हुआ है पर इसकी शुरुआत जरुर हो गयी है |इन दोनों की लड़ाई में कौन जीतेगा इसका फैसला वक्त को करना है|


दैनिक जागरण में 02/03/2024 को प्रकाशित 

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