Wednesday, February 26, 2014

खबर पाने के तरीके को बदलता इंटरनेट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा है कि ऑनलाइन स्कोर और क्रिकेट से संबंधित सूचनाएं इंटरनेट पर टीवी लाइव प्रसारण के 15 मिनट बाद ही अपडेट की जाएंगी। यह फैसला इंटरनेट के मौजूदा दौर में टीवी कंपनियों में पैदा हुई असुरक्षा की बानगी भर है।मैच के प्रसारण का अधिकार खरीदने वाली इन टीवी कंपनियों ने इंटरनेट पर लाइव अपडेट के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। खेल ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समाचारों के कंटेंट और विविधता की दौड़ में भी पिछड़ता जा रहा है।इंटरनेट के आने से सूचना संप्रेषण की गति कई गुना बढ़ गई है। पिछले एक दशक में लाइव समाचार ब्लॉग, समाचार वेबसाइट, व्यक्तिगत ब्लॉग वगैरह की संख्या, और साख जिस तेजी से बढ़ी है, उसका सीधा असर 24 घंटे के समाचार चैनलों पर पड़ रहा है। भारत में 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान इन समाचार चैनलों की जो शुरुआत हुई थी, अगले दो दशकों तक इनकी उपयोगिता को कोई सीधी चुनौती नहीं मिली। पर इंटरनेट के विकास और बढ़ती पहुंच ने इन लाइव समाचार चैनलों की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया है।
         तहरीर चौक पर हुई विशाल क्रांति की तस्वीरें, लाइव समाचार और निजी ब्लॉग जिस तेजी से दुनिया भर के लोगों तक पहुंचे, वह सभी के लिए अभूतपूर्व अनुभव था। वर्ष 2012 में लगभग 80 लाख लोगों ने फेलिक्स बोमगर्टनेर की अंतरिक्ष से छलांग को यू-ट्यूब पर लाइव देखा। पिछले कुछ वर्षों में मीडिया परिदृश्य में ऐसे अनगिनत बदलाव आए हैं।पारंपरिक खबरिया चैनलों के सामने अनगिनत चुनौतियां हैं। पहली है पूंजी की समस्या, जहां एक औसत खबरिया चैनल को चलाने के लिए करोड़ों रुपये और ढेर सारे कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, वहीं लाइव न्यूज ब्लॉग को कोई व्यक्ति अकेले सिर्फ अपने लैपटॉप या यहां तक कि मोबाइल फोन की मदद से बहुत कम खर्च में चला सकता है। माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइटें जैसे ट्विटर और किसी घटना विशेष की पल-पल की खबर देने वाले लाइव ब्लॉग जिस गति से खबरें और उन पर टिप्पणियां लोगों तक पहुंचा रहे हैं, 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल तो उसके आस-पास भी नहीं ठहरते हैं।दूसरी चुनौती यह है कि लगातार प्रसारण इन चैनलों की मजबूरी होती है और अगर ताजा खबर न हो या किसी खबर का इंतजार हो रहा हो, तो उन्हें दर्शक को बांधे रखने के लिए बेवजह समय बिताना पडम्ता। खबरिया चैनलों की बहुत सारी बातचीत अक्सर बेमतलब और उबाऊ हो जाती है। खासकर दिन के समय दफ्तरों में काम कर रहे लोगों के पास खबर पाने का तरीका टीवी न होकर उनका कंप्यूटर या मोबाइल फोन ही होता है। इस सबके बावजूद समाचार चैनल खत्म हो रहे हैं, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन लोगों को उनका विकल्प मिल रहा है, और लोग आगे बढ़कर उसे अपना भी रहे हैं।
हिंदुस्तान में 26/02/14 को प्रकाशित 

Friday, February 7, 2014

गर्मी के नाम जाड़े की प्रेम भरी पाती

प्यारी गर्मी
फिजाओं में प्यार है शायद ये तुम्हारे आने का असर है कि बर्फ पिघल रही है और रिश्तों के साथ साथ मौसम में भी गर्मी आ रही है तुम भी सोच रही होगी कि आज अचानक इतने दिन के बाद मैं तुम्हें चिठी क्यूँ लिख रहा हूँ.तुम ये तो जानती हो कि मैं ज्यादा बोल नहीं पाता इसलिए लोग मुझे जाड़ा कहते हैं मेरा नेचर ठंडा है पर मैं लोगों को गर्मी की अहमियत समझाता हूँ कि तुम मेरे लिए खास हो  बस तो मैंने सोचा अपने दिल  की भावनाओं को लिख कर तुम्हें बताऊँ जिससे जब तुम आओ तो लोग तुमको वो इज्ज़त दें जिसकी तुम हकदार हो. वैसे भी तुमको गुस्सा जल्दी आता है आये भी क्यूँ न तुम तो गर्मी हो पर तुम खास हो मेरे लिए अब देखो न जब सारी दुनिया वेलेन्टाईन डे यानि प्यार का दिन मनाती है तब न पूरी तुम होती हो न पर लोग कितना एन्जॉय करते हैं तो तुम ये तो मानोगी कि हमारी तुम्हारी जोड़ी भले ही थोड़े समय के लिए बने पर होती गज़ब की है.मुश्किल तो यही है तुम मेरी बात मानती कहाँ हो.तुम्हारे आने की आहट मिलते ही लोग जश्न मनाने की तैयारी करने लग गए पर मेरी प्यारी गर्मी इस जश्न को देख कर ये मत समझ लेना कि लोग तुम्हें ज्यादा पसंद करते हैं क्यूंकि तुम जैसे जैसे बढ़ोगी लोग तुम्हारे जाने का इन्तजार करने लग जायेंगे यही तो जीवन का खेल है जो आया है वो जाएगा पर मेरा तुम्हारा रिश्ता अनोखा है.हम बार बार जायेंगे लेकिन आने के लिए तो जब तुम आओगी मैं जा चुका हूँगा पर मैं फिर आऊंगा ये वादा रहा.अब मैं तो रहूँगा नहीं तुम्हें सम्हालने के लिए तो इस बात का ख्याल रखना कि रिश्ते ऐसे बनाना जिसमें गए हुए लोगों के आने की गुंजाईश रहे और तुम अगर ऐसा नहीं कर पायी तो समझ लेना तुमने जिंदगी से कुछ नहीं सिखा और रिश्ते मतलब से बनाये.कोई तुमको मतलबी कहेगा तो मुझे बहुत बुरा लगेगा. तुम गुस्सा हो कर अक्सर कहा करती थी कि किसी के आने जाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं जी लूंगी अपनी जिंदगी पर मेरी प्यारी गर्मी तुम मानो या न मानो पर लोगों के आने जाने से फर्क जरुर पड़ता है.मैं जा तो रहा हूँ पर बड़े भारी मन से.काश ये काश मेरे जीवन का सच है.अब देखो न मैं और तुम कभी नहीं मिल पाते हैं जब तक मैं अपने जाड़े होने पर इतराता रहता हूँ और तुम अपनी गर्मी को अपनी ताकत मानती रहती हो पर जब ये मैं हम बन जाता है तो वेदर कितना खूबसूरत हो जाता है. थोडा मेरा और थोडा तुम्हारा तो बन गया न हमारा.मेरी सुबह सुहानी होती है तो तुम्हारी शाम पर जब बसंत आता है तो पूरा दिन वंडरफुल हो जाता है.मुझे पता है कि तुम्हें मेरी लंबी चिठ्ठी बोर करती है कितना लड़ते थे तुम मेरे लंबे खर्रे से.अच्छा सुनो न... कितना कुछ हमारे तुम्हारे बीच में हमेशा अनकहा रह जाता है.हमें एक दूसरे के साथ कभी फेस टू फेस बात करने का मौका ही नहीं मिलता तो कम्युनिकेशन गैप से कहीं तुम किसी गलतफहमी का शिकार न हो जाओ इसलिए मुझे चिठ्ठी लिखनी पडी जिससे मैं तुम्हें अपनी फीलिंग बता सकूँतुम गर्मी हो ये तुम्हारा नेचर है और मैं जाड़ा मेरे मौसम में लोग तुम्हें मिस करते हैं और तुम्हारे मौसम में मुझे हमारी यही डेस्टनी है हम एक दूसरे को हमेशा मिस ही करते रहेंगे. तुम्हारे जीवन में बहुत से लोग आयेंगे पर जाड़े की वो शाम नहीं आयेगी.मेरे जीवन में बहुत सी सुबह आयेंगी पर वैसी सुबह नहीं आयेगी और हम दोनों बस याद ही करेंगे.हम भले ही अलग अलग हों और कभी भी मिल न पायें पर क्या कभी तुमने सोचा कि कितना कुछ कॉमन है हमारे बीच में ज्यादा ठण्ड में लोग अपनी पूरी बॉडी को कवर करते हैं खासकर सिर और जब ज्यादा गर्मी पड़ती तो भी लोग सबसे पहले सिर ही ढकते हैं.आईसक्रीम स्वाद में ठंडी होती है पर उसकी तासीर गर्म होती है इसलिए जाड़ा हो या गर्मी लोग दोनों मौसम में इसे एन्जॉय करते हैं.जाड़ा और गर्मी तभी बढ़ती है जब हवाएं चलती हैं गर्मी में वही हवा लू बन जाती है तो जाड़े में शीत लहर.मौसम कैसा भी हो जिंदगी तो चलती रहती है हम भले ही कभी नहीं मिल पाते पर हमारे कारण ही लोगों को जीवन के मायने मिलते हैं.फिलहाल चलता हूँ पर इतना विश्वास दिलाता हूँ मैं कहीं भी रहूँ तुम्हें हमेशा याद करता रहूँगा.
विदा
सिर्फ तुम्हारा जाड़ा
आई नेक्स्ट में 7/02/14 को प्रकाशित 

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