Saturday, July 1, 2017

एक क्लिक में मनपसन्द खाना

इंटरनेट पर्याप्त रूप से हमारी संस्कृति को प्रभावित कर रहा है और यह कार्य इतनी तेजी और शांति से हो रहा है कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या वाकई इंटरनेट इतना ताकतवर है आप इसे एप कल्चर भी कह सकते हैं जब संस्कृति का जिक्र हो तो उसमें इंसानी रहन सहनखान पान और परिधान अपने आप समावेशित हो जायेंगे |रहनसहन और परिधान के लिए पहले ही हजारों एप बाजार में आ चुके हैं और भारतीय उनका इस्तेमाल भी खूब कर रहे हैं पर इसी क्रम में खान पान भी शामिल हो चुका है|बाहर जाकर खाना खाने का दौर भले ही खत्म न हुआ हो पर मद्धिम जरुर पड़ रहा है अब लोग ऑनलाईन ऑर्डर करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं और इसमें माध्यम बन रहे हैं खान पान से जुड़े एप जिनकी सहायता से आप अपना मनपसन्द खाना मंगा सकते हैं |वैश्विक शोध संस्था रेड सीर के आंकड़ों के अनुसार भारत में ऑनलाईन फ़ूड डिलीवरी बाजार  साल 2016 में डेढ़ सौ प्रतिशत की दर से बढ़ा  है वर्तमान में यह बाजार तीन सौ मिलीयन डॉलर का है |बाजार के इस बड़े हिस्से पर कब्ज़ा ज़माने की रणनीति के तहत गूगल और उबर जैसे बड़े वैश्विक इंटरनेट खिलाड़ी भी कूद पड़े हैं |गूगल ने ऑनलाईन खान पान के इसी बाजार पर  कब्जे  लिए एरियो एप लांच किया है जो  रेस्टोरेंट डिलीवरी और होम सर्विस प्लेटफोर्म सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है  अभी  इस एप की सुविधा का लाभ हैदराबाद और मुंबई के निवासी ही उठा पा रहे हैं शीघ्र ही भारत के अन्य शहरों के निवासी इस सुविधा का लाभ उठा पायेंगे |उबर ने भी इसी साल  उबर ईट्स के नाम से एक एप सेवा भारत में भी शुरू की है  जिसकी सेवाएँ फिलहाल अभी मुम्बई में ही उपलब्ध हैं |
बदल रहा है सामाजिक ताना –बाना
एप आधारित ऑनलाईन की ये खान पान सेवाएँ भविष्य की और इशारा कर रही हैं कि किस तरह इंटरनेट हमारे जीवन के हर पहलू को हमेशा के लिए बदल डालने वाला है |संयुक्त परिवारों का पतन ,महिलाओं का कार्य क्षेत्र में बढ़ता दखल,शिक्षा के लिए घर से बाहर निकलते युवा  और शहरीकरण ऐसे कुछ कारक हैं जिन्होंने एक आदर्श भारतीय परिवार के ताने बाने पर असर डाला है |महिलाओं ने रसोईघर की देहरी को लांघ कर कम्पनी के बोर्ड रूम में अपनी जगह बनाई है जिससे यह धारणा टूटी है कि पुरुष कमाएगा और महिलायें खाना बनायेंगी |बढ़ता आय स्तर ,एकल और छोटे परिवारों ने जहाँ पति पत्नी दोनों काम करते हैं जैसे कुछ ऐसे कारक रहे हैं जिन्होंने ऑनलाईन खान पान के इस कारोबार को बढ़ावा देना शुरू किया है इसमें जहाँ एक तरफ अनेक  तरह के  खाने का लुत्फ़ मिलता है जिसमें फास्ट फ़ूड भी शामिल हैं वहीं अपने घर का आत्मीय वातावरण लोगों को ऑनलाईन खाना ऑर्डर करने के लिए प्रेरित करता है जिसके साथ आपको ऑनलाईन खरीददारी में कई तरह के डिस्काउंट भी मिलते हैं |ऑनलाईन खान पान एक पूर्णता शहरी प्रवृत्ति है और अभी भारत के टाईप टू और टाईप थ्री शहर इससे अछूते हैं इसलिए जैसे जैसे शहरीकरण बढेगा इस व्यवसाय को और पंख लगेंगे |दूसरा शहर बहुत तेजी से आकार में बढे हैं वहीं ट्रैफिक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत बदतर हुई है ऐसे में बाहर जाकर खाने का विकल्प बड़े शहरों में  एक मध्यवर्ग परिवार या व्यक्ति के लिए एक महंगा और त्रासद पूर्ण अनुभव में तब्दील हो जाता है |तुलनात्मक रूप से ऑनलाइन खाने का ऑर्डर इन सब शहरी समस्याओं से बचाता है जिसमें ट्रैफिक में लगने वाला समय और पेट्रोल और टैक्सी पर किया गया व्यय शामिल है |
चुनौतियाँ भी है और कई
दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी वाले देश में चीन के बाद सबसे ज्यादा स्मार्ट फोन हैं और यही वो मैदान है जो दुनिया भर के लोगों को नवाचार करने के लिए आकर्षित कर रहा है |साल 2015 से  कई स्टार्ट अप इस क्षेत्र में शुरू हुए जिसमें ज़ोमेटोस्विगी ,फ़ूड पांडा जैसी कम्पनियां शामिल हैं जिन्होंने एप आधारित खान पान की सेवाएँ देनी शुरू कीं हालंकि व्यवसायिक रूप से यह कम्पनिया कोई ख़ास मुनाफा अभी तक कमा नहीं पायीं हैं और बाजार में जमे रहने के लिए संघर्षरत हैं| उबर की प्रतिद्वन्दी कम्पनी ने ओला  ने एक साल के भीतर ही अपनी ऐसी ही सेवा ओला कैफे भारत में बंद कर दी |पर गूगल और उबर जैसी कम्पनियों के मैदान में उतरने से मामला बहुत दिलचस्प हो गया है वो भी ऐसे वक्त में जब इस क्षेत्र में स्टार्ट अप की संख्या में गिरावट देखी जा रही है इन कम्पनियों का इस क्षेत्र में निवेश यह दिखाता है कि भारत एक नयी तरह के फ़ूड रिवोल्यूशन के लिए तैयार हो रहा है  |जाहिर है इसकी शुरुआत पिज्ज़ा और बर्गर जैसी फास्ट फ़ूड बेचने वाली कम्पनियों से हुई और इस प्रयोग की सफलता ने पूरे के पूरे रेस्टोरेंट को ऑनलाईन बनाने के लिए प्रेरित किया |यह कहना अभी जल्दीबाजी होगी कि ऑनलाईन खान पान के  इस  कारोबार का भविष्य उज्जवल है क्योंकि भारतीय रुचियाँ   भोजन के मामले में दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अलग हैं इसका बड़ा कारण देश के खान पान में पर्याप्त विविधता होना जिसका एक बड़ा कारण जलवायु आधारित भोजन है जहाँ जिस चीज की प्रचुरता है वही वस्तु उस क्षेत्र के लोगों द्वारा सामान्य रूप से भोजन के इस्तेमाल में ज्यादा प्रयोग में लाई जाती है उत्तर भारत में जहाँ सरसों का तेल अधिक इस्तेमाल होता हैं वहीं दक्षिण भारत में नारियल का तेल |
शहरीकरण ने विस्थापन को पर्याप्त रूप से बढ़ावा दिया है और लोग देश के एक हिस्से से दूसरे  हिस्से में रोजगार के लिए जा रहे हैं और बस भी रहे हैं  पर खाने के मामले में उन्हें स्थानीय खानों पर ही निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि वही सस्ते पड़ते हैं क्या ओनलाईन फ़ूड डिलीवरी बाजार  उनकी इस कमी को पूरा कर पायेगा इस प्रश्न का उत्तर समय के गर्भ में है  |
नवभारत टाईम्स में 01/07/17 को प्रकाशित 

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