Tuesday, November 22, 2022

आंकड़ों की सुरक्षा का सवाल

 


इन्फोमोनिक्स की दुनिया  आंकड़ों से ही जुड़ी है |डाटा आज की सबसे बड़ी पूंजी है यह डाटा का ही कमाल  है कि गूगल और फेसबुक जैसी अपेक्षाकृत नई कम्पनियां दुनिया की बड़ी और लाभकारी कम्पनियां बन गयीं है|डाटा ही वह इंधन है जो अनगिनत कम्पनियों को चलाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं |वह चाहे तमाम तरह के एप्स हो या विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साईट्स सभी उपभोक्ताओं  के लिए मुफ्त हैं |असल मे जो चीज हमें मुफ्त दिखाई दे रही है |वह सुविधा हमें हमारे संवेदनशील निजी डाटा के बदले मिल रही है |इनमे से अधिकतर कम्पनियां उपभोक्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए  गए आंकड़ों को सम्हाल पाने में असफल रहती हैं| जिसका परिणाम लागातार आंकड़ों की चोरी और उनके  दुरूपयोग के मामले सामने आते रहते हैं |साल 2020 में फेसबुक ने लगभग  छियासी बिलियन डॉलर और गूगल ने एक सौ इक्यासी  बिलियन डॉलर विज्ञापन से कमाए | सारी दुनिया में आज खोज का पर्याय बन चुकी कम्पनी का नाम है गूगल | गूगल इंटरनेट का प्रवेश द्वार है और खोज-विज्ञापन के बाजार में यह विशालकाय है।गूगल लगातार हमारे जीवन में घुसपैठ बढाता रहा सर्च इंजन से शुरू हुआ सफर ई मेल फोटो वीडियो और न जाने कितनी सेवाओं को जोड़कर हमारे जीवन को आसान करता रहा | लेकिन गूगल और उस जैसी टेक कम्पनियों का एक और चेहरा है जो अपने मुनाफे को बढाने के लिए लगातार अपने उपभोक्ताओं की निजी जानकारियों का अनाधिकृत इस्तेमाल करता है |ताजा मामला अमेरिका का है जहाँ  अमेरिका के 40 राज्यों ने गूगल  पर  बड़ी कार्यवाही  करते हुए भारी भरकम जुर्माना लगाने का फैसला  किया है| मिशिगन के अटॉर्नी जनरल डाना नेसेल के ऑफिस ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि चालीस  राज्यों ने गूगल पर यह कार्रवाई लोकेशन ट्रैकिंग केस में की है| कंपनी पर यह आरोप लगा था कि वह लोकेशन ट्रैकिंग प्रैक्टिस के जरिए ग्राहकों को गुमराह कर रही थी और  कंपनी ने उपयोगकर्ताओं के स्थानों को ट्रैक करना तब भी जारी रखा, जब उन्होंने  लोकेशन ट्रेकिंग  सुविधा को बंद करने का ऑप्शन चुना था | 

जांच में पाया गया कि Google ने कम से कम 2014 से उपभोक्ताओं को उनके स्थान ट्रैकिंग प्रथाओं के बारे में गुमराह करके राज्य उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया था| गूगल की कमाई का ज्यादातर हिस्सा लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों  के जरिए ही आता है| लोग अपने जरुरत की चीजों को  अपने ब्राउजर में खोजते हैं चूँकि मोबाईल एक व्यक्तिगत माध्यम है तो लोग जहाँ भी जाते हैं मोबाईल उनके साथ रहता है और वे किन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं |यह सभी जानकारी गूगल के पास रहती है| ऐसे में इन डेटा के जरिए लोगों को उनकी पसंद का कंटेंट और ऐप्स उन्हें अपने स्क्रीन पर दिखने लगते हैं| इस मामले पर अमेरिका के चालीस  राज्यों ने गूगल के साथ समझौते के तहत अब गूगल को राज्यों को कुल 32 अरब रुपये यानी करीब 400 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का फैसला किया है| ध्यान देने वाली बात ये है कि यह अब तक का सबसे बड़ा प्राइवेसी समझौता है|

वही भारत जो कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर देश है वहां डेटा और डेटा प्राइवेसी को लेकर अभी भी कोई जागरूकता नहीं दिखती है|निजी जानकारियों को सुरक्षित रखने और इसके  गलत इस्तेमाल को रोकने  के लिए सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को लोकसभा में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पेश किया था इस पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी रिपोर्ट सदन के समक्ष नवम्बर 2021 में रख दी है जिस पर आगे चर्चा होनी है |  उम्मीद की जा रही है कि इस बजट सत्र के बाद डिजीटल डाटा सुरक्षा बिल कानून का रूप ले लेगा |जिस तरह इंटरनेट की इस दुनिया में आंकड़े महत्वपूर्ण हो चले हैं इस बिल के कानून बनने में अभी वक्त है |देश में जिस तेजी से इंटरनेट का विस्तार हुआ उस तेजी से हम अपने निजी आंकडे (फोन ई मेल आदि) के प्रति जागरूक नहीं हुए हैं परिणाम तरह तरह के एप मोबाईल में भरे हुए जिनको इंस्टाल करते वक्त कोई यह नहीं ध्यान देता कि एप को इंस्टाल करते वक्त किन –किन चीजों को एक्सेस देने की जरुरत है |यदि किसी उपभोक्ता ने मौसम का हाल जानने के लिए कोई एप डाउनलोड किया और एप ने उसके फोन में उपलब्ध सारे कॉन्टेक्ट तक पहुँचने की अनुमति माँगी तो ज्यादातर लोग बगैर यह सोचे की मौसम का हाल बताने वाला एप कांटेक्ट की जानकारी क्यों मांग रहा है उसकी अनुमति दे देंगे |अब उस एप के निर्मताओं के पास किसी के मोबाईल में जितने कोंटेक्ट उन तक पहुँचने की सुविधा मिल जायेगी|यानि एप डाउनलोड करते ही उपभोक्ता आंकड़ों में तब्दील हुआ फिर उस डाटा ने और डाटा ने पैदा करना शुरू कर दिया |इस तरह देश में हर सेकेण्ड असंख्य मात्रा में डाटा जेनरेट हो रहा है पर उसका बड़ा फायदा इंटरनेट के व्यवसाय में लगी कम्पनियों को हो रहा है |ऐसे में लोगों की डेटा प्राइवेंसी पर बहुत बड़ा सवाल उठता है| 

दैनिक जागरण में 21/11/2022 को प्रकाशित 

 

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