Wednesday, May 6, 2009

तेरी आंखों के सिवा


मौसम ऐसा है कि पानी की ,झरनों की , फूलों की वादियों की बातें ही होनी चाहिए बातें ऐसी जो मन को सुकून दें .तो इस बार हम चलते हैं आँखों की वादियों में हंसने की बात नहीं है . आँखों की वादियों में भी गज़ब की ठंडक होती है .बस महसूस करने की जरूरत होती है .आखिर कुदरत की हर खूबसूरती दिल तक इन्हीं आँखों के जरिये ही तो पहुँचती है .ऐसी आँखों की बातें क्यों न की जाएँ .मैं गानों के बहाने आँखों की बात करूँगा और बाकी आप पर है कि आपको किस किस की आँखें याद आती हैं .आपने लोगों को बातें करते सुना होगा पर क्या कभी आँखों को बातें करते सुना है ,क्या नहीं सुना तो ये गाना सुन लीजिये "आँखों -आँखों में बात होने दो " (आँखों आँखों में)अब जब आँखें बात करेंगी तो वो डायरेक्ट दिल से होंगी और दिल की बातें एकदम प्योर होंगी सीधी बात नो बकवास सुनिए ये गाना “आँखें भी होती हैं दिल की जुबान (हासिल) , बात आगे बढ़ती है आँखें लोगों को जिन्दगी जीने का मोटिवेशन भी देती हैं भरोसा न हो तो किसी अपने की आँखों में झांक कर देख लीजिये जिसकी आँखें आपके दुःख से आँसुवों से भर जाती हैं या फिर खुशी के लम्हों में प्यार से चमक उठती हैं फिर भी भरोसा न हो रहा तो ये गाना सुन लीजिये “जीवन से भरी तेरे आँखें मजबूर करें जीने के लिए ,( सफ़र )बात यहीं ख़तम नहीं होती आँखें बहुत बड़ी राजदार भी होती हैं लेकिन आँखों में क्या क्या राज़ दफ़न हैं इनको समझना सबके वश की बात नहीं है ये गाना कुछ इसी रियलिटी को शो कर रहा है “आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं” (घर) जरा सोचिये अगर आँखें न होती तो फिल्म साहित्य संस्कृति कला का ये डेवेलोपमेंट कभी हुआ ही न होता ये हमारी आँखों का कमाल है आँखें सिर्फ देखती ही नहीं सपने भी सजाती हैं “आँखों में हमने आपके सपने सजाये हैं ' (थोडीं सी बेवफाई)आँख हमें बहुत कुछ सिखाती है खासकर जिन्दगी के बारे में ये आँख ही है जो सुख और दुःख दोनों में नम हो जाती है हमारा पूरा शरीर सुख और दुःख में अलग अलग रियक्ट  करता है लेकिन आँखें हमेशा एक जैसी रहती हैं मानो कह रह हों “तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है” पर बात यहीं ख़तम नहीं होती आँखें कभी कभी गुश्ताखियाँ भी करती हैं लेकिन बहुत प्यार से “आँखों की गुश्ताखियाँ माफ़ हो”. किसी को काली आँखें भाती है “ये काली काली आँखें”( बाजीगर) तो कोई नीली आँखों में डूब जाता है “तेरी नीली नीली आँखों के दिल पे तीर चल गए”( जाने अनजाने) किसी को गुलाबी आँखें शराबी बना देती हैं “गुलाबी आँखें जो देखी शराबी ये दिल हो गया” (दा ट्रेन) और कोई आँखों के कत्थई रंग में शिकायत करता है “कत्थई आँखों वाली लडकी एक ही बात पर रोज झगड़ती है”( डुप्लीकेट)पर पिक्चर अभी आधी है मेरे दोस्त तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि दुनिया में सबसे ज्यादा नेत्रहीन भारत में रहते हैं. हमारी जनसंख्या का एक फ़ीसदी से बड़ा हिस्सा देखने में असमर्थ है. दुनिया के लगभग साढ़े तीन करोड़ दृष्टिहीनों में से क़रीब एक तिहाई यानी की लगभग एक  करोड़ बीस लाख भारत में रहते हैं. इनमे से ज्यादातर की आँखें ठीक हो सकती हैं अगर हम अपनी आँखें दान कर दें तो .आप आँखों के इस फलसफे को समझ रहे हैं तो आज ही अपनी आँखें दान कर दीजिये जिससे आपके जाने के बाद आपकी आँखों से कोई सुहाने सपने सजा सकता है उन सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश कर सकता है आख़िर इन खूबसूरत आंखों को हमारे बाद भी कोई घर मिल जाए इससे बेहतर सपना इन आंखों के लिए भला क्या होगा ।


आई नेक्स्ट में ६ मई को प्रकाशित

16 comments:

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत सही जानकारी सर जी .

Arvind Mishra said...

बहुत बढियां मुकुल जी

Udan Tashtari said...

नेत्र दान: महा दान!!

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर लिखा है ..

अभिषेक said...

आनंददायक लेख,पढने के बाद लगा कि ..फिल्में भी...होती हैं..दिल की ज़ुबां..

Priya said...

hello sir...

fantastically written stuff on eyes...their relevance and importance in our lives...

eye donation is indeed a noble job and i would love to do that...

very well written sir...

sanjeev said...

very good . i think you wrote right but who think about this

Science Bloggers Association said...

नेत्र दान की अलख आज की आवश्यकता है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ajay said...

भाई साहब आपके इस लेख ने आखों के असली महत्‍व को समझाया है। वाकई में जब मैं इस लेख को पढ़ रहा था तो मुझे लग रहा था कि मैं यह लेख पढ़ नहीं रहा हूं, बल्कि आप मुझे पढ़कर सुना रहे हैं। आपके एक्‍सप्रेशंस कंप्‍यूटर की स्‍क्रीन पर महसूस हो रहे थे। कानों में सिर्फ आपकी आवाज। वाकई में आपने अंदर की आत्‍मा को जगा दिया।

VIVEK SRIVASTAVA said...

There is no word to say other than "jhakkas" ...

archana chaturvedi said...

Is lekh ko padhke meri aankho or man dono ko sukun pahucha hai "ankho me sapne liye gahr se hum chal hi diye majil na jane le jaye gi kaha"

virendra kumar veer said...

ankhe har baat ko keh deti hain o jubaan se bole na bole .sapne leke ghar se nikle kismat kanah le jati hai dekhan hai hume.
"najaro ne teri jab dil ko chuwa, sene se gaya mera mera dil ye diwan dil kanha, tera dil hum cura le gaye,dil banke hum aa gaye..................................."

virendra kumar veer said...

Body me sabse jarruri aur anmol chej ankhe hain ,jo baat ankhe keh jati hai o baat juban nahi keh pati, sukh aur dukh ki jhalak ankho se ho dekhi ja sakti hain.kyunki ankhe Dil ki juban hoti hai pyar ho ,ikarar ho. gussa ho sab ankhe bayan kar deti hain.
in ankho ke liye sabse acha yahi hai ki humre jane ke baad aur bhi koi ghar mil jaye in ankho ke liye isse accha aur kya hoga.

samra said...

sir waise to meine pehle se socha hua tha ki mein apni eyes donate kerungi lekin ab yeah baat pakki ho gayi hai..:)

ARUSHIVERMA said...

The eyes indicate the antiquity of the soul.

Akansha Srngar said...

hum sabhi apni akho ke jariye is puri duniya ki burayi ar khoobsurati dkh sktey hai fir bhi kuch berojgaar baithe rehte hai...lekin humare isi desh me kuch aise bhi log hai jo akhey na hitey hue bhi apne rojmaarra ki jindagi me do waqt ki roti ka intzaam krtey hai...aise jazbe ko hume salaam krna chahiye ar hme apni akho ka daan krna chahiye marnese pehle ...jo kisi dusre ke kaam aye jisey jindagi ko ek naye nazariye se dkhna ka mauka miley....

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