Monday, December 6, 2010

अरे ये खुशबू कहाँ से आयी ......

जाड़ों का मौसम मुझे हमेशा पसंद  रहा है उसके पीछे मेरे पास ज्यादा कारण नहीं वैसे आप चाहे तो कई कारण बता सकते हैं जैसे इस मौसम में काम करने की क्षमता बढ़ जाती है ,साग सब्जियों की ज्यादा वैरायटी उपलब्ध होती है ,ठण्ड में क्राईम कम हो जाता है अब आप इसे यूँ समझे जितने मुंह उतनी बातें पर मेरे पास ठण्ड को पसंद करने का एक अनोखा कारण है मुझे अपने बचपन से ही फूलों पत्तियों पर गिरी ओस बहुत अच्छी लगती है और इस द्रश्य को देखने और महसूस करने का सबसे अच्छा मौसम है जाड़ा कुहरे में फूलों पर गिरी ओस न  जाने कितने क्रियटिव लोगों का इन्स्पीरेसअन बनी है और मुझे भी इन्स्पैएर किया है बचपन में जब हम जाड़े की शामों में  सैर पर निकलते थे तो चारों ओर फूल ही फूल दिखते  थे   फूल अपने आप में इस दुनियाकी सबसे खूबसूरत कृतियों  में से एक हैं प्रकृति के इस अनोखे रूप को महसूस करने हिंदी फिल्म के गीतकारों ने अपने अपने तरीके से महसूस किया है अब जब बात फूलों की छिड़ ही गयी है तो कुछ याद आया अरे नहीं याद आया तो सुनिए ये गाना फिर छिड़ी रात, बात फूलों की,रात है या बारात फूलों की (बाजार )कुदरत का अनमोल तोहफा हैं फूल। फूल न होते, तो दुनिया इतनी रंगीन नहीं होती। फूल ही हैं, जो हमें करवाते हैं नजाकत और नफासत का एहसास। जितने कोमल फूल होते हैं उतनी ही कोमल होती हैं हमारी भावनाएं देखिये एक भाई अपनी बहन के लिए प्यार जताने के लिए क्या गा रहा है फूलों का तारों का सबका कहना है एक हजारों में मेरी बहना है” (हरे राम हरे कृष्णा) .जरा सोचिए फूलों से हमारा कितना गहरा रिश्ता है इंसान के पैदा होने से लेकर उसके मरने तक हर खुशी हर गम में फूल हमारा साथ देते हैं इस सीख के साथ जिंदगी कैसी भी हो खूबसूरत तो हैं न खुशबू दिखती नहीं पर महसूस की जा सकती है पर उसके लिए नाक का होना जरूरी है उसी तरह जिंदगी में खुशियाँ हर मोड पर  बिखरी है पर क्या हम उन खुशियों को खोजना जानते हैं  .फूल कोमलता ,शांति और प्यार का प्रतीक होते हैं जहाँ प्यार शांति , का जिक्र होगा वहां फूलों का जिक्र होना लाजिमी है फिर हम भी तो ये ही चाहते हैं एक ऐसी दुनिया हो जहाँ चारों ओर शांति हो प्यार हो तो जब फूल खिलते हैं तो दिल भी खिल जाता है , एक प्यारा सा गाना रोटी फिल्म का जो मेरी ही बात की तस्दीक कर रहा है फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबूजब फूलों की बात चली है तो गुलाब का जिक्र होगा ही उसे फूलों का राजा यूँ ही तो नहीं कहा जाता और गानों में सबसे ज्यादा इसी फूल का जिक्र हुआ है लाल गुलाब जहाँ प्यार का प्रतीक है वहीं सफ़ेद गुलाब मैत्री और शांति का . प्यार की कोमल भावनाओं को व्यक्त करता हुआ  कुछ ऐसी कहानी बयान कर रहा है ये गाना  फूल गुलाब का लाखों हजारों में एक चेहरा जनाब का (बीवी हो तो ऐसी ) बचपन की शरारतों के बाद जब हम जवान होते हैं तो हमारे जेहन में कुछ सपने होते हैं कुछ उम्मीदें होती हैं इन्ही सपनों में एक सपना अपने घर का भी होता और घर जब फूलों के शहर में हो तो क्या कहना देखो मैंने देखा है एक सपना फूलों के शहर में है घर अपना” (लव स्टोरी ) पर अगर आपको सपने में फूल ही फूल दिखें तो ऐसे ख्वाब को क्या कहेंगे चलिए मैं आपको गाना ही बता देता हूँ देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए दूर तक निगाह में गुल खिले हुए” (सिलसिला ) पर फूल सिर्फ कोमल ही नहीं होता अगर आपकी इस कोमलता का सम्मान नहीं करेंगे तो ये अंगारा भी बन सकता है फूल कभी जब बन जाए अंगारा” (फूल बने अंगारे ) जिंदगी में हर चीज़ की अपनी अहमियत होती है और ये बात रिश्तों पर भी लागू होती है फूल को बढ़ने के लिए खाद पानी की जरुरत होती है रिश्तों को संबंधों की गर्मी और अपनेपन के एहसास की तो जाड़ों  के इस मौसम मे गर्मी का एहसास करने के लिए गर्म कपडे पहनने के अलावा  कुछ फूलों के पेड़ लगाइए, नए रिश्ते बनाइये पुराने रिश्तों पर जम गयी गर्द को झाडिये क्योंकि रिश्ते भी फूलों की तरह नाजुक होते हैं .आइये महसूस करते हैं अपने आसपास बिखरी हुई फूलों की खुशबू रिश्तों में बसी अपने पन  की महक और जाड़े के मौसम में इठलाते फूलों की सरगोशियाँ हमारी राह तक रही हैं .जाड़े का स्वागत अगर महकते हुए और महकाते हुए किया जाए तो इससे अच्छा भला और क्या हो सकता है .
आई नेक्स्ट में ६ दिसंबर को प्रकाशित 

12 comments:

gayatri said...

thand main crime kam ho jaata hai ....delhi ko dekh kar asia nahi lagta hai .... kaash 1 aisa khushboo wala phool ho.... jo zindagi k dukho ko bhi mehka de .... taaki sukh ki tamanna hi na rahe .... sir 1k baat ap itna acha likh kaise lete hai .... plz share 2 me ur secret ....

Dr. Mukul Srivastava said...

@गायत्री मैं तो सिर्फ चीज़ों को गौर से देखता हूँ फिर जो महसूस करता हूँ लिख देता हूँ इसमें राज़ जैसी कोई चीज़ नहीं आपको पसंद आया मेरा प्रयास सार्थक हुआ आभार

richa said...

सर्दियाँ... ओस... फूल... गाने... ख़ुशियाँ... प्यार... ज़िन्दगी... एक आर्टिकल में कितना कुछ समेट लिया मुकुल जी... अच्छा लगा पढ़ कर...

Dr. Mukul Srivastava said...

@ऋचा जी हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया

ashutosh tripurari singh said...

SIR YOUR ARTICLE IS COOL...


MAINE IS ARTICLE SE EK IMPORTANT BAAT SEEKHI HAI....



GAANO KI HELP SE KAISE POORA ARTICLE TAIYAAR KIYA JA SAKTA HAI..






"GUSTAKHI MAAF" SIR






#ASHUTOSH TRIPURARI SINGH

Anonymous said...

sbko thnd se kuch n kuch nya pta chlta hai...
humko iss thand k karn ye pta chla ki aapko phool v psnd hai....

आग़ाज़.....नयी कलम से... said...

सर जी आपकी लेखो से जो हम सीखते है हमेशा वो ये कि कैसे आप छोटे से विषय से कितना सुन्दर लिख देते है.......

आपने मेरा ब्लॉग पढना बंद कर दिया या आपको पसंद नहीं आ रहा....बड़े दिन से कोई कमेन्ट नहीं दिया......

Dr. Mukul Srivastava said...

शुक्रिया शुभी

virendra kumar veer said...

jis tarh crime jor pakad raha hai aisa nahi lagta thnd me crime kam ho jata hai,itani mehgaye hai log varayati ko bhul kar jaise taise log pet bhar rahe hain,phool aur humara bahut hi gara rista hai janm se lekar death tak phool saat nahi chodate hain. jitani khusbbo phool thnd me dete hai o aur kabhi nahi dete hain.to phoolo se pyar karo aur jindai phoolo i tarah mehkao.

CHANDNI GULATI said...

Sirji phool insaan ki zindagi mein bhar dete hai,,,,hame bhi geeli ghaas par nagen paon chalna bahut pasand hai

sana said...

sir phool aur thand muje b bhot jyada pasand hai isliye mujhe apka ye lekh aur jyada pasand aya

ARUSHIVERMA said...

Flowers add colours to our lifes with a pleasent smell i guess every body likes winters but as far as crime is concerned its rate will never change in any kind of atmosphere or weather.

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