मंगलवार, 11 जनवरी 2011

जो तुमको हो पसंद

inext11
इस नए साल में जीवन के कुछ नए रंग के साथ मैं एक बार फिर हाज़िर हूँ जाहिर जब मैं हूँ तो गाने भी होंगे और कुछ नए तराने भी होंगे जो कुछ अलग हट कर होंगे पिछला साल मुन्नी और शीला के नाम रहा अब आप सोच रहे होंगे कि मैं भी क्या बात कर रहा हूँ बात बिलकुल नयी नहीं है हाँ नजरिया एकदम नया क्योंकि हम हैं नए तो अंदाज़ क्यों हो पुराना शिल्पा शेट्टी के ठुमके पर कभी यूपी-बिहार लुट जाता है तो कहीं बिपाशा दर्शकों को इश्क का नमक चखाती हैं (ओंकारा ), छैया-छैया से शुरु हुआ सफर अब मुन्नी तक पहुंच चुका है लेकिन जादू है कि बढ़ता ही जा रहा है. बात आइटम सॉंग की हो रही है अब आप माने या न माने पर एक दम सच है आइटम सॉंग भले ही आज हमें एकदम नये लग रहे हों पर हमारी फिल्मों के लिए बिलकुल नए नहीं है जैसे हमारी जिंदगी में रोज कितनी बातें हमें नईं लगती हों पर वो होती नयी नहीं ऐसे ही हैं ये आइटम सॉंग ,फिल्मों में मसाले के तडके जैसे होते हैं जो फिल्मों को एक नयी ताजगी देते हैं खाने में दाल सभी ने खाई होगी पर दाल में तडका अलग होता है कहीं घी का कहीं तेल का चलिए जरा दिमाग पर हल्का सा जोर डालिए हिंदी फिल्मों की पहली आइटम सॉंग आर्टिस्ट हेलन का नाम हमारे सामने आता है अरे शोले फिल्म का महबूबा महबूबा याद कीजिये मैं बात को और थोडा विस्तार देता हूँ हेलन भारतीय हिंदी सिनेमा की पहली आइटम सॉंग आर्टिस्ट थीं ,जिनका फिल्म में भले ही अहम रोल न हो पर उनके नृत्य और अदाओं के लोग दीवाने थे ,डोंन फिल्म का ये गाना तो अभी तक लोगों की जुबान पर चढा हुआ है “ये मेरा ल प्यार का दीवाना” मैं तो कुछ बानगी दे रहा हूँ.
सही मायनों में हेलन ने अपने नृत्य और गीतों के भाव से गीतों को अमर कर दिया सत्तर का दशक ऐसे कई गानों के लिए याद किया जाएगा .
inext2 हेलन और बिंदु जैसी अभिनेत्रियों के कैबरे नृत्य हों या “रोटी, कपड़ा और मकान” जैसी फिल्म में अरुणा ईरानी का “पंडित जी मेरे मरने के बाद” जैसे गाने पर शराबी थिरकन या कटी पतंग का प्यार से लोग मुझे मधु कहते हैं या मोनिका ओ माय डार्लिंग पर नब्बे के दशक में यह अभिनव प्रयोग सीमित हो गया पर २१ वीं शातब्दी का पहला दशक कई मायनों में क्रांतिकारी रहा इसके लिए आप ग्लोबलाइजेसन को जिम्मेदार ठहरा सकते है या फिर फिर नयी उमर की नयी फसल का असर यानि ऐसे निर्देशकों की पौध जो कुछ नया करना चाहती थी इसकी शुरुवात म्यूजिक विडियो से हुई पर भारत में म्यूजिक विडियो अपनी जड़ें जमा नहीं पाया शायद ये फिल्मों का हमारी जिंदगी में असर ही था कि हम फिल्मों से अलग किसी भी चीज को मनोरंजन से जोड़ ही नहीं पाते फिर क्या था मल्टी स्टारर फिल्मों में भी कुछ मसाला चाहिए था ग्लैमर का तडका और डांस की वर्स्तैलिटी की जरुरत को महसूस करते हुए ऐसे गाने डाले गए जिनके होने या न होने से फिल्म की कहानी पर कोई असर तो नहीं पड़ता था पर ये एड ऑन पॅकेज की तरह थे खास बात ऐसे गाने समय के साथ जबान पर चढ़ते और उतर जाते और उनकी जगह लेने के लिए नए गाने नए तेवर के साथ मौजूद रहते मुन्नी बदनाम का जादू अभी लोगों के सर से उतरा ही नहीं था कि शीला की जवानी ने लोगों को झूमा डाला अभी इस पर बहस चल ही रही थी कि शीला और मुन्नी में कौन ज्यादा पोपुलर है कि टिंकू जिया (यमला पागल दीवाना ) ने लोगों के पैरों को थिरकाने पर मजबूर कर दिया अब ये बहस का विषय हो सकता है कि ऐसे आइटम सॉंग का क्या मतलब है पर हमारे कल्चर में शादी या किसी भी शुभ मुहूर्त में ऐसे गानों की परम्परा रही है हाँ ये बात अलग है कि फिल्मों में ऐसे गानों के प्रयोग से इनको बड़ा कैनवास मिल गया पर इनसे एक नए तरह के कल्चरल फयूसोन की शुरुवात हुई याद करें बंटी बबली के गीत को कजरारे कजरारे तोरे कारे नयना ,आँखें भी कमाल करती हैं पर्सनल से सवाल करती है अब देखिये इस आइटम सॉंग में जहाँ विदेशी भाषा का टच है वहीं अपनी सोंधी मिट्टी का स्पर्श पहले सिर्फ खास नर्तकियां हीं ऎसे “आइटम गाने” करती थीं, अब ऎश्वर्य राय से लेकर कैटरीना तक सभी अभिनेत्रियां ये नृत्य करने के लिए लालायित रहती हैं। एक खास बात जो एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर इशारा करती हैं पहले आइटम सॉंग सिर्फ फीमेल एक्ट्रेस ही करती थी पर शुक्र है नयी हवाओंका अब मेल ऐक्टर भी आइटम सॉंग भी कर रहे हैं वो चाहे शाहरुख हों या ऋतिक या स्टार ऑफ दी मिलेनियम अमिताभ सभी अपने हुनर से लोगों का मन मोह रहे हैं .फिलहाल ये आइटम सॉंग आते रहेंगे और जाते रहेंगे पर इनका मकसद बस सिर्फ इतना आपको झूमना झुमाना है तो सीधी बात नो बकवास अगर आपको ये पसंद आ रहे हैं तो सब कुछ भूल इन गानों की मस्ती में खो जाइए इस बात की परवाह किये बगैर कि ये गाने क्या हैं क्योंकि हर क्या का जवाब तो साइंस के पास भी नहीं है
यह लेख ११ जनवरी २०१० को आइनेक्स्ट में प्रकाशित हुआ

13 टिप्‍पणियां:

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया सर जी,जट यमला का भी उल्लेख कर देते ,अपने गरम धरम भाई ५० साल पूरे कर लिए फिल्मी दुनियां में .
अच्छी पोस्ट.

Dr. Mukul Srivastava ने कहा…

@मनोज जी यमला पागल दीवाना का उल्लेख किया गया है

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

@मैं देख नही पाया -आपनें उल्लेख किया है.धन्यवाद.

PRATIGYA SHUKLA ने कहा…

waah sir ..... saare item song dhundh nikaale... isme se ek to maine suna hi nhi hai.......

Dr. Mukul Srivastava ने कहा…

@प्रतिज्ञा देर आये दुरुस्त आये तारीफ का शुक्रिया गूगल बाबा की मदद से जो गाना आप ने नहीं सुना उसे सुन लो

Bhawna Tewari ने कहा…

sir umeed hai log in geeton me burai dekhne k bjaye apne jeevan se buri soch ki taraf dhyan denge...

आग़ाज़.....नयी कलम से... ने कहा…

sir ji bhut mza aaya padhne me....hmara samaj aisa hai jo item song sun kr mje leta hai aur baad me usme burai dudhata hai.....ye science nhi pycology hai.......hahaa

AAGAZ.. ने कहा…

ये बात तो है सर.. पिक्चर चाहे कितनी भी बुरी हो पर अगर आइटम सोंग तड़क-भड़क वाला है तो लागत के पैसे वसूल कर ही लेगा.. इसमें सारे आइटम सोंग्स की लिस्ट है.. कुछ और भी हैं जैसे बाबूजी ज़रा धीरे चलो, निकल ले भैये, बीडी जलैले, इश्क से मीठा कुछ भी नहीं (आक्रोश,2010 ).. etc .. इन सोंग्स की बी काफी चर्चा हुई थी.. वैसे आइटम सोंग्स आज के ज़माने की मूवीज की ज़रुरत बन गए हैं.. फिल्मो से अब इन्हें अलग कर पाना संभव नहीं होगा शायद..

virendra kumar veer ने कहा…

sir humra samaj dohra samaj hai hai pahle hum munni aur sheela jaise gano pe khub thirakate aur maza lete hai aur phir baad me unme kamiya aur burai dudhate hain.pahle usa gane ko hume log hit karyenge phir baad me culture ke naam par burai karenge.

CHANDNI GULATI ने कहा…

Sir ji aajkal kitni filmein apni story ke bajaye apne item songs ki wajah se chalte hai

sana ने कहा…

sir item numbers ab har commercial movie ki zarurat si ban gye hai qk bhale hi film story se chale na chale item song se hi chal jayegi

ARUSHIVERMA ने कहा…

Supply is accoring to the demand..at present item songs seems to be very important. Success of the movie depends upon item songs

samra ने कहा…

item numbers humesha se chale aa rahe hai lekin ab kuch zayda focus mein rehte hai kyunki aj kal ki janta apne kaamo mein itni uljhi rehti hai ki use mood fresh kerne ke liye kuch tadk bhadk wale geet chahiye isiliye itne lokpriy ho rahe hai or aage bhi yeh siis tarah aate rahege..:)