Monday, May 2, 2016

महिलाओं की ताकत बना इंटरनेट

इंटरनेट ने उम्र का एक चक्र पूरा कर लिया है। इसकी खूबियों और इसकी उपयोगिता की चर्चा तो बहुत हो लीअब इसकी सामाजिक  उपयोगिता पर भी चर्चा होनी चाहिए । पिछले तकरीबन एक दशक से भारत को किसी और चीज ने उतना नहीं बदलाजितना मोबाइल फोन और इंटरनेट ने बदल दिया है। संचार ही नहींइससे दोस्ती और रिश्ते तक बदल गए हैं। इतना ही नहींदेश में अब मोबाइल बात करने का माध्यम भर नहीं हैबल्कि यह यह हमारे दैनिक जीवन को आसान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका रही है |यूँ  तो तकनीक निरपेक्ष होती है पर भारत में इंटरनेट उन बहुत से लोगों को सबल बनाने का माध्यम बना जिनको समसामयिक दुनिया में हाशिये पर माना जाता है खासकर महिलाओं के संदर्भ में  किचन से लेकर मनचाही शादी करने तक भारत में बराबरी के समाज निर्माण में इंटरनेट क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है |इसने ने लोक व लोकाचार के तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है। बहुत-सी परंपराएं और बहत सारे रिवाज अब अपना रास्ता बदल रहे हैं।
मेट्री मोनी वेबसाइट के माध्यम से महिलायें चुन रही हैं वर
अब लोग मैट्रीमोनी वेबसाइट की सहायता से जोड़ियां ही नहीं बना रहेशादियां भी रचा रहे हैं। देश की ऑनलाइन मैट्रीमोनी का कारोबार अगले तीन साल में 1,500 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसारवैवाहिक वेबसाइटों पर साल 2013 में 8.5लाख प्रोफाइल अपलोड की गईजिनकी संख्या साल 2014 में बढ़कर 19.6 लाख हो गई। यानी एक साल में 130 प्रतिशत  का इजाफा । सामाजिक रूप से देखेंतो जहां पहले शादी के केंद्र में लड़का और लड़की का परिवार रहा करता था,जिसमें भी लड़के की इच्छा ज्यादा महत्वपूर्ण रहा करती थी | अब वह धुरी खिसककर लड़के व लड़की की इच्छा पर केंद्रित होती दिखती है। यह अच्छा भी हैक्योंकि शादी जिन लोगों को करनी हैउनकी सहमति परिवार में एक तरह के प्रजातांत्रिक आधार का निर्माण करती हैन कि उस पुरातन परंपरा के आधार परजहां माता-पिता की इच्छा ही सब कुछ होती थी। इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं को अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार देने वाला इंटरनेट और शादी करने वाले विभिन्न एप बन रहे हैं |
रसोई घर में भी हो रही है ई क्रांति
हमारे रसोई घर इनोवेशन का माध्यम भी हो सकते हैं इस ओर कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया तभी तो दादी नानी के हाथों के बने विभिन्न व्यंजन उनके जाने के साथ इतिहास हो गये पर जब हमारे रसोईघरों को इंटरनेट का साथ मिला तो भारत में एक नई तरह की खाना क्रांति आकार लेने लगी|ताजा उदाहरण है भारत में एप के माध्यम से घर में बने खाने का तेजी से बढ़ता व्यापार,बदलती जीवन शैलीबढ़ता माध्यम वर्ग और काम काजी महिलाओं की संख्या में इजाफा और दुनिया में दुसरे नंबर पर सबसे ज्यादा स्मार्ट फोन धारकों की उपस्थिति ये कुछ ऐसे कारक हैं जिनसे घर पर खाना बनाने की प्रवर्ति प्रभावित हुई है | बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के अनुसार भारत में खाने का बाजार जो साल 2014 में तेइस लाख  करोड़ रुपये का था | साल 2020 में इस बाजार के बयालीस लाख करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका खाने के विभिन्न एप निभा रहे हैं जो घर पर बना खाना वाजिब कीमत पर आपकी मनपसंद जगह पर पहुंचा रहें हैं |भारत की सबसे बड़ी घर पर  बने खाने का व्यवसाय करने वाली वेबसाईट व्हाट्स कुकिंग डॉट कॉम अभी मात्र एक साल की है जिसके पास तीन हजार एक सौ  अस्सी घर पर खाना बना कर पहुंचाने वाले लोग हैं और यह देश के तीस जगहों से अपनी सेवा दे रही है |ऐतिहासिक रूप से भारत में घर पर  खाना बनाना कभी आर्थिक गणना में शामिल नहीं रहा पर एप के माध्यम से खाने का बढ़ता कारोबार इस मिथक को तोड़ रहा है |आंकड़ों में घोषित तौर पर भारत की पंद्रह प्रतिशत महिलायें रोजगार में हैं इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है इनकी बढ़ती संख्या घर में बने खाने की मांग को बढ़ा रही है जिसका इंटरनेट अच्छा माध्यम बना है |इससे पहले घर में बने खाने का विकल्प गरीब तबके की महिलायें ही हुआ करती थीं जो घर में आकर खाना बनाती थी और उनके कोई श्रमिक अधिकार नहीं थे पर अब इसमें मध्यम वर्ग की उन महिलाओं का आगमन तेजी से हुआ है जिन्हें आमतौर पर होम मेकर की संज्ञा दी जाती हैं जो घर पर रहती हैं और पति की आमदनी पर निर्भर रहती हैं |एप आधारित खानों का यह व्यापार ऐसी महिलाओं को रोजगार से जोड़कर स्वावलंबन का अहसास करा रहा है जिनके पास खाना बनाने का अलावा और कोई हुनर नहीं है |एप जैसे किचन ,फ्रॉम होम साइबर सेफ ,मील टेंगो ,यम्मी किचन ,बाईट क्लब आदि के ग्राहकों  की बढ़ती संख्या यह इंगित कर रही है लोग बाहर का खाना तो पसंद कर रहे हैं पर गुणवत्ता घर के बने खाने जितनी चाहते हैं|इस स्थिति में अपने अपने घरों से यह महिलायें अपने संसधानों आपका मनपसन्द खाना एप के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रही हैंइस व्यवसाय का बिजनेस मॉडल ओला या उबेर जैसी टैक्सी कम्पनियों की तरह है मुनाफे में बंटवारा एप निर्माता कम्पनियों और खाना बनाने वालों के बीच बंट जाता है |
बात चाहे मनपसंद जीवन  साथी चुनने की हो या घर का वह उपेक्षित हिस्सा जहाँ महिलायें महज खाना बनाती हैं इंटरनेट के कारण अब महिलाओं के स्वावलंबन और सशक्तीकरण का जरिया बन रहा है बदलाव की शुरुवात हो चुकी है पर फिर भी अभी लंबा रास्ता तय करना है |
नवभारत टाईम्स में 02/05/16 को प्रकाशित 


19 comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सत्यजीत रे और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Aanya Jain said...

I myself being an avid user of internet would definitely agree with the post. I also use internet to get recipes online and to find answers to my several questions. i would like to say that the internet not only is helping to find things but also adding to their knowledge and helping in the growth of their intellect. They therefore are becoming more open to the outside world which develops heir self-confidence and boast their morale. Which i guess is more important aspect than any other.

Aanya Jain said...

I myself being an avid user of internet would definitely agree with the post. I also use internet to get recipes online and to find answers to my several questions. i would like to say that the internet not only is helping to find things but also adding to their knowledge and helping in the growth of their intellect. They therefore are becoming more open to the outside world which develops heir self-confidence and boast their morale. Which i guess is more important aspect than any other.

Naila Arif said...

Yeh Blog zindagi ki choti choti zarooraton se juda hua hai. itni bareeki se zindagi ke iss roop ko dekhna koi aap se seekhe.

Pushkar Chaurasia said...

yes it gives power to rise i.e for them to reveal the unrevealed structures nd theories and myths of world.

Suraj Verma said...

सही कहा सर आपने ,महिलाओं को आगे बढ़ने में इंटरनेट का अहम् योगदान रहा है यही कारण है, की वो आज पुरुषो को भी पीछे छोड़ रही है । तरह तरह की जानकारियां महिलाओं को जागरूकता को लेकर इन्टरनेट पर उपलब्ध है । महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने का काम किया है इंटरनेट ने ,जिन महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकालने दिया जाता,उनकी आवाज़ उठाने का ,और आज़ादी देने का काम किया है इंटरनेट ने,रसोई घर से लेकर,घर बैठे पढाई आदि मे इंटरनेट ने अपना योगदान दिया । यही कारण है कि महिलाएं आज विकास की ओर अग्रसर है और महिलाओं की स्तिथि मे पहले से काफी सुधार हुआ है ।

Vipra karanwal said...

Internet woh takat hai jisne mahilaon Ki bandisho ko tod Diya hai, Padhai or rozgar jsi chizo se isne humein jod Diya hai,Duniya se Jude rhene ka ek behtar afsar humein Diya hai....

harshit singh said...

internet ney keval mahilao ko hi takat nahi di hay .internet ney har us person ko takat aur apni baat rakha ney ki ajadi di hay.jo kabhi duniya kye samney nahi aapatey they..duniya ney jinko alag kar diya tha vo aaj apni baat binaa kisi bandish kye keha sakte hay...

shivangi bajpai said...

इंटरनेट कनेक्टिविटी किसी भी समाज में एक बुनियादी जरूरत बन गयी हैं।यह सामाजिक,आर्थिक विकास के लिए बहुत ही खास भूमिका निभाती है और साक्षरता व जानकारी में सुधार लातीहै।गूगल के साथ ये संयुक्त पहल खासकर अपने देश में महिलाओ तक पहुँच रही है जिससे उनके सशक्तिकरण और आत्म-जीविका की दिशा में सुधार हो रहा है।
जैसा की सर आप के ब्लॉग पे विस्तार से बताया गया है।

shivangi bajpai said...

इंटरनेट कनेक्टिविटी किसी भी समाज में एक बुनियादी जरूरत बन गयी हैं।यह सामाजिक,आर्थिक विकास के लिए बहुत ही खास भूमिका निभाती है और साक्षरता व जानकारी में सुधार लातीहै।गूगल के साथ ये संयुक्त पहल खासकर अपने देश में महिलाओ तक पहुँच रही है जिससे उनके सशक्तिकरण और आत्म-जीविका की दिशा में सुधार हो रहा है।
जैसा की सर आप के ब्लॉग पे विस्तार से बताया गया है।

vanya dixit said...

जब से हमारे समाज में इंटरनेट का प्रयोग हो रहा है हमारे समाज की काया पलटती हुई नजर आ रही है समाज प्रगति की ओर अग्रसर है ! हर रोज एक नई तकनीक का जन्म हो रहा है ! इसके माध्यम से आज महिलायें भी पुरूषों की अपेक्षा कदम से कदम मिलाकर चल पाने में और आज के इस बदलते हुये समाज में अपनी बात कह पाने में पूर्ण रुप से सक्षम हैं !

priya srivastava said...

Internet aadat k sath sath jarurt bhi ban raha hai.dekha jaye to internet apne dono roop dikha raha h .ek jaraf mahilaye kis tarah iska upyog kar rahi h khud ko aaye badhane me ,aur dursri taraf kuch log iska galat upyog kerne me bhi peeche nahi hai..mahilayon k liye internet kisi verdan se kam nahi naraz aa raha ..

Ami Nisha said...

Internet has actually changed thinking of people and with new era various apps and technologies have changed the mindset of people. As women are always said to be after men in our society but due to internet facilities things and mindest has changed their lifestyle and broadened their area of living

Santosh Kumar said...

mahilao ke liye internet takat ban gaya hai kyonki shikcha , shadi ,naukari aur kitchen me khana banane tak esaki avasyakta hai.

SANJU RANI said...

सही कहा सर आपने ,महिलाओं को आगे बढ़ने में इंटरनेट का अहम् योगदान रहा है यही कारण है, की वो आज पुरुषो को भी पीछे छोड़ रही है । तरह तरह की जानकारियां महिलाओं को जागरूकता को लेकर इन्टरनेट पर उपलब्ध है । महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने का काम किया है इंटरनेट ने ,जिन महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकालने दिया जाता,उनकी आवाज़ उठाने का ,और आज़ादी देने का काम किया है इंटरनेट ने,रसोई घर से लेकर,घर बैठे पढाई आदि मे इंटरनेट ने अपना योगदान दिया । यही कारण है कि महिलाएं आज विकास की ओर अग्रसर है और महिलाओं की स्तिथि मे पहले से काफी सुधार हुआ है ।

SANJU RANI said...

सही कहा सर आपने ,महिलाओं को आगे बढ़ने में इंटरनेट का अहम् योगदान रहा है यही कारण है, की वो आज पुरुषो को भी पीछे छोड़ रही है । तरह तरह की जानकारियां महिलाओं को जागरूकता को लेकर इन्टरनेट पर उपलब्ध है । महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने का काम किया है इंटरनेट ने ,जिन महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकालने दिया जाता,उनकी आवाज़ उठाने का ,और आज़ादी देने का काम किया है इंटरनेट ने,रसोई घर से लेकर,घर बैठे पढाई आदि मे इंटरनेट ने अपना योगदान दिया । यही कारण है कि महिलाएं आज विकास की ओर अग्रसर है और महिलाओं की स्तिथि मे पहले से काफी सुधार हुआ है ।

SANJU RANI said...

सही कहा सर आपने ,महिलाओं को आगे बढ़ने में इंटरनेट का अहम् योगदान रहा है यही कारण है, की वो आज पुरुषो को भी पीछे छोड़ रही है । तरह तरह की जानकारियां महिलाओं को जागरूकता को लेकर इन्टरनेट पर उपलब्ध है । महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने का काम किया है इंटरनेट ने ,जिन महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकालने दिया जाता,उनकी आवाज़ उठाने का ,और आज़ादी देने का काम किया है इंटरनेट ने,रसोई घर से लेकर,घर बैठे पढाई आदि मे इंटरनेट ने अपना योगदान दिया । यही कारण है कि महिलाएं आज विकास की ओर अग्रसर है और महिलाओं की स्तिथि मे पहले से काफी सुधार हुआ है ।

SANJU RANI said...

सही कहा सर आपने ,महिलाओं को आगे बढ़ने में इंटरनेट का अहम् योगदान रहा है यही कारण है, की वो आज पुरुषो को भी पीछे छोड़ रही है । तरह तरह की जानकारियां महिलाओं को जागरूकता को लेकर इन्टरनेट पर उपलब्ध है । महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने का काम किया है इंटरनेट ने ,जिन महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकालने दिया जाता,उनकी आवाज़ उठाने का ,और आज़ादी देने का काम किया है इंटरनेट ने,रसोई घर से लेकर,घर बैठे पढाई आदि मे इंटरनेट ने अपना योगदान दिया । यही कारण है कि महिलाएं आज विकास की ओर अग्रसर है और महिलाओं की स्तिथि मे पहले से काफी सुधार हुआ है ।

Arun Pratap said...

INTERNET SABKE LIYE SAHI MAENE ME UPYOGI HAI. DEKHA JAY TO MAHILAO KE LIYE JYADA TAR HAI.VO APNE JIVAN SATHI,KHANA BANANA,GHAR BAITHE DUNIYA KI SARI KI JANKARI LENA AADI.MAHILAO KE PRATI DURASASN KAFI KAM HONA.BALATKAR PAR ROK LAGANA,PRERIT KARNA EN SABHI PAR INTERNET KE MADHAM SE HI ROK PANA SAFL HUA HAI.

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