Wednesday, June 28, 2017

हम मानने को तैयार नहीं

जीवन के  दो युग आमने सामने हैं|मेरा चौदह वर्षीय बेटा अक्सर शीशे के सामने खड़ा होकर अपने आप को निहारा करता है अपनी उगती हुई हल्की दाढ़ी पर हाथ फेर कर पूछता है मैं कब शेव करूँगा ?और उसी वक्त मैं भी उसी शीशे के सामने अपने बचे हुए बालों को समेटते हुए उनको रंगने की जद्दोजहद में लगा रहता हूँ जिससे अपनी बढ़ती उम्र को छुपा सकूँ |बाल तो ठीक है पर पकी हुई दाढी को कितना भी क्यों न रंग लो एक दो बाल छूट ही जाते हैं जो आपकी बढ़ती हुई उम्र की चुगली कर ही देते हैं |मैं और मेरा बेटा उम्र के एक ऐसे ही दौर से गुजर रहे हैं जहाँ हम जो हैं वो मानने को तैयार नहीं है वो अब किशोरावास्था में है जब बच्चों के लिए बड़ा हो गया है और जवानों के लिए बच्चा ही है |उसका बाप यानि मैं अपनी जवानी की उम्र छोड़ आया है पर बुढ़ापा अभी आया नहीं है दोनों उम्र के जिस मुकाम पर हैं उसे बदलना चाहते हैं |मैं अपने सफ़ेद बालों को काले रंग से जिससे लोग मुझे अधेड़ न मानें और बेटा जल्दी से जल्दी दाढी उगा कर बड़ा हो जाना चाहता है | एक आगे निकल जाना चाहता है और एक पीछे लौटना चाहता है | दोनों ही दौर थोड़े मुश्किल होते हैं पर जहाँ किशोरवस्था में सपने  उम्मीदें और आने वाले एक बेहतर कल का भरोसा होता है वहीं चालीस पार का जीवन थोडा परेशान करता है |जिन्दगी का मतलब रिश्तों के साथ से होता है पर उम्र के इस पड़ाव पर इंसान का सबसे पहला करीबी रिश्ता  टूटता है यानि माता –पिता या तो वो जा चुके होते हैं या उम्र के ऐसे मुकाम  पर होते हैं जब कभी भी कोई बुरी खबर आ सकती है | जिन्दगी में एक अजीब तरह की स्थिरता आ चुकी होती है (अपवादों को छोड़कर) जहाँ से आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि आप कितनी दूर और जायेंगे |इस चालीस पार के जीवन में वो बातें अब अजीब लगती हैं जिनका हमने खुद अपने चौदह पार के जीवन (किशोरावस्था ) में बड़े मजे से लुत्फ़ उठाया था जैसे जोर जोर से गाने सुनना और बार –बार शीशे में चेहरा देखना |बेटे को जल्दी है ये समय जल्दी से बीत जाए और वो बड़ा हो जाए |मैं समय को रोक देना चाहता हूँ ताकि कुछ समय और मिल जाए |इन दिनों मुझे लखनऊ के शायर मीर अनीस साहब का एक शेर ज्यादा याद आता है “दुनिया भी अजब सराय फानी देखी,हर चीज यहाँ की आनी जानी देखी,जो आके ना जाये वो बुढ़ापा देखा,जो जाके ना आये वो जवानी देखी |
प्रभात खबर में 28/06/17को प्रकाशित 

47 comments:

harshit singh said...

JINDAGI KAY HAR DAUR MAY HAUMAY ESAY RISTO KO KHONA PATDA TAA HAY JINKO HUM KABHI KHONA NAHI CHATE HAY LEYKIN CHAKAR BHI KUCH NAHI KAR SAKTE HAY. JAWANI AUR BUDAPA DONO JINDAGI KI ANCHAI SACHAI HAY.

Mahendra Pandey said...

बेहतरीन! जिंदगी के अनुभव और सच्चाई का मिश्रण। 👌👍

Ankit Srivastava said...

आप दोनों के बीच में हम हैं जिसकी दाढ़ी भी आ चुकी है और सफेद भी नहीं हुई। लेकिन ये काली दाढ़ी, भविष्य सफेद करने के चक्कर में परेशान रहती है।

Akash Singh said...

इन दोनों के बीच की ज़िन्दगी में हम जी रहे जो कभी बचपन की याद दिलाती है तो कभी चालीस पार जाने की पर सत्य तो यही है की जीवन अपने हिसाब से सब कुछ दिखा देती है |

Taruni Sharma said...

हम वास्तविक्ता को जानते हुए भी मानना नहीं चाहते। इन शब्दों को पढ़ते समय ख़्याल आया कि हमारे माता-पिता भी कुछ ऐसा ही सोचते होंगे, या शायद इससे ज़्यादा। उनके भावों से परिचित करवाने के लिए भेहद शुक्रिया सर।

Naila Arif said...

zindagi, humne kya khoya kya paya, isse bahut upar ki cheez hai. yeh kisi ke kiye nahi rukti. apne path per ithlati, balkhati aage badhti jati hai. wo kuch hi log hai jo iss rehti duniya tak apne karam aur vichaaron se amar ho jate hai. to kyu na hum apni iksha shakti ko badha kar unn amar logo ke sath apna naam jod len?

Sudhanshuthakur said...

ज़िंदगी हमारी एक समय चक्र है जो की एक कड़वा सच है तो फिर इतना कतराना क्यों ।

Unknown said...

हमे जीवन उस सूरज की तरह जीना चाहिए । जब वह उदय होता है तो पूरे विश्व को रौशनीमय कर देता है,लेकिन सच्चाई यही है की उसे भी अस्त होना है । और न चाहते हुए भी उसे अस्त होना पड़ता है ।

Suraj Verma said...

हमे जीवन उस सूरज की तरह जीना चाहिए । जब वह उदय होता है तो पूरे विश्व को रौशनीमय कर देता है,लेकिन सच्चाई यही है की उसे भी अस्त होना है । और न चाहते हुए भी उसे अस्त होना पड़ता है ।

Suraj Verma said...

हमे जीवन उस सूरज की तरह जीना चाहिए जब वह उदय होता है तो पूरे विश्व को रौशनीमय कर देता है,लेकिन सच्चाई यही है की उसे अस्त होना है । और न चाहते हुए भी उसे अस्त होना पड़ता है ।

ज्योति said...


वक़्त के साथ साथ सब कुछ बदलने लगता है जो अपनी उम्र गुज़ार चूका होता है उसे अपना बचपन और जो और जो बचपन के पड़ाव में होता हे उसे अपनी जवानी का बेसब्री से इंतेज़ार होता है।

priya srivastava said...

परिवर्तन हमारे जिंगदी का एक अहम् हिस्सा है ,जो जिंदगी के आगे बढ़ने के साथ हमे कदम -कदम देखने को मिलता है | अगर ये परिवर्तन जिंदगी से हटा दिया जाये तो हमें उससे भी शिकायतें होंगी कि क्या सारा जीवन बस एक ही तरह गुजरना पड़ेगा ?

priya srivastava said...

परिवर्तन हमारे जिंगदी का एक अहम् हिस्सा है ,जो जिंदगी के आगे बढ़ने के साथ हमे कदम -कदम देखने को मिलता है | अगर ये परिवर्तन जिंदगी से हटा दिया जाये तो हमें उससे भी शिकायतें होंगी कि क्या सारा जीवन बस एक ही तरह गुजरना पड़ेगा ?

Pushkar Chaurasia said...

sir hatts off to u.
har kadam pe vo nishani chod jau, budhape me ek tasveer chod jau ,
apne bacho ka hasta hua kal or , pyar bhara ghar chod jau.
regards; Pranjal Chaurasia

Pushkar Chaurasia said...

sir hatts off to u.
har kadam pe vo nishani chod jau, budhape me ek tasveer chod jau ,
apne bacho ka hasta hua kal or , pyar bhara ghar chod jau.
regards; Pranjal Chaurasia

Vipra karanwal said...

Zindgi ka yh woh sach hai,Jisko jhutla nahi skte,,Ameer Ho ya garib isko chupaa nahi skte, Yun toh man krta hai safed baalo KO aur rang lu Mein, Magar kya kru apne bachpan KO phir se wapaas nhi la skta hun Mein....

Vipra karanwal said...

Zindgi ka yeh woh sach hai,jisko jhutla nahi skte,.Ameer Ho ya garib isko chupa nhi skte, Yun toh man krta hai safed baalo KO aur rang lu Mein, Magar kya kru Apne bachpan KO phir se wapas nahi la skta hun Mein...

Ankur Sharma said...

सर ये तो ज़िंदगी का एक कड़वा सच है कि हम सभी अपने पिछले समय मे वापस जाना चाहते हैं लेकिन हमारे लिये यह एक सपना ही रह जाता है .

vanya dixit said...

ये सब समय चक्र का खेल है, आज हमारा है तो कल किसी और का होगा, क्योंकि समय अपनी गति से चलता ही रहता है और हमारी ज़िन्दगी से एक एक दिन कम करता रहता है परंतु हम ये सच्चाई स्वीकार नहीं कर पाते. हर इंसान बस युवावस्था को प्राप्त करने की जद्दोजहद में लगा रहता है.

Shweta Kulshrestha said...

Every human goes through the different stages of life i.e. childhood,adolescence,adulthood and old age.Death is a universal truth and one should accept it.We should not treat ageing as a problem.As it is a natural process and instead of worrying about ageing and death we must enjoy the little things in life and last but not the least everything comes with an expiry date.

Shweta Kulshrestha said...

Every human goes through the different stages of life i.e. childhood,adolescence,adulthood and old age.Death is a universal truth and one should accept it.We should not treat ageing as a problem.As it is a natural process and instead of worrying about ageing and death we must enjoy the little things in life and last but not the least everything comes with an expiry date.

Shweta Kulshrestha said...

Every human goes through the different stages of life i.e. childhood,adolescence,adulthood and old age.Death is a universal truth and one should accept it.We should not treat ageing as a problem.As it is a natural process and instead of worrying about ageing and death we must enjoy the little things in life and last but not the least everything comes with an expiry date.

shivangi bajpai said...

वक़्त कभी किसी के लिए नही रुकता जीवन एक निश्चित काल के लिए होता है जो पैदा हुआ है वो बड़ा भी होगा और जो बड़ा हुआ है वो एक न एक दिन बूढ़ा भी होगा इसको कोई नही रोक सकता यही जीवन है ।

Shivanshu Gupta said...

इस परिस्थिति में जब मैंने खुद को रखा तो जाना की मैं इन दोनों परिस्थितियों के बीच ही रुक जाना चाहता हूँ मैं ना तो अपनी पुराने दिनों में जाना चाहता हूँ ना ही उस आगे के जीवन में जहाँ कन्धो पर जिमेद्दारियो का बोझ और एक अलग किस्म की संत्रिप्तता घेरे रहती है, जी चाहता है बस जीवन के सारे अनुभव अभी बटोर ले जिसके लिए इंसान को एक उम्र की जरूरत पडती है और बाल सफ़ेद करने पड़ते है एक अलग सी जल्दी है जाने क्यूँ पर शायद.....इसका जवाब तब ही मिलेगा.

SIDDHARTH CHATTERJEE said...

Bachpan mai jaha chaha has lete they , Jaha chaha ro lete they, par ab muskaan ko tameej chahiye aur aasuyon ko tanhai! . " We always work for better tommorrow, But when tommorrow comes, instead of enjoying we again think of a better tommorrow. Let's have a better today."

PRASHANT TIWARI said...

परिवर्तन ही इस संसार का नियम है, इसे कबूल करो और जीना सीखो ।

shivangi bajpai said...

वक़्त कभी किसी के लिए नही रुकता जीवन एक निश्चित काल के लिए होता है जो पैदा हुआ है वो बड़ा भी होगा और जो बड़ा हुआ है वो एक न एक दिन बूढ़ा भी होगा इसको कोई नही रोक सकता यही जीवन है ।

shivangi bajpai said...

वक़्त कभी किसी के लिए नही रुकता जीवन एक निश्चित काल के लिए होता है जो पैदा हुआ है वो बड़ा भी होगा और जो बड़ा हुआ है वो एक न एक दिन बूढ़ा भी होगा इसको कोई नही रोक सकता यही जीवन है ।

alisa devish said...

ye 40 paar ka jeewan ek esa daur ata h hmare jeewan ka jisme hm bhut majbut bn jate h
hmne bhut logo ko khoya hota h hme ye jeewan bhut kuch sikha deta h or hm jb apne bachho ko dekhte h to apne un purane bachpan me lautne ka mn krta h lekin hm laut nhi sakte

aditya singh said...

jo beet gya so baat gyi. jo samay ek bar chala jata hai woh phir kabi wapas nai ata, par hm humesha beetey palo ko yaad krte rhte hai, aisa krna kuch galat nai hai par ek baat hai jo huemsha yaad rakhni chaiye ki hm apne aaj me aaj me kuch aisa accha kaam kre jo dusre bi ane aye samay me yaad kre. bachpan ek bht masti se bhara samay hota hai jisme hme koi fikar nai hoti, par badhti umar samay ke sath kuch kuch zimmedariyan bi seekha hi deti hai.

Ami Nisha said...

Its life cycle of humans from the birth to death as our age changes our perception and thinking also keeps on changing from time to time.

Unknown said...

Vastavikta aur naisergikta ko svikar kare aur appna Jivan prakrit ke hisab se dhalane ki aadat rakhani chahiye.

Santosh Kumar said...

Takni se bhasha badali no ka sakti balki usme nikhar lava ka Santa hai .iski vajah yah bhi ho sakti haiku apni bat ko jald samapt karna ho aur sath hi yah bhi chahte hi kiagla bhakti hamari bat ko puri Farah samagh sake.

SANJU RANI said...

ये सब समय चक्र का खेल है, आज हमारा है तो कल किसी और का होगा, क्योंकि समय अपनी गति से चलता ही रहता है और हमारी ज़िन्दगी से एक एक दिन कम करता रहता है परंतु हम ये सच्चाई स्वीकार नहीं कर पाते. हर इंसान बस युवावस्था को प्राप्त करने की जद्दोजहद में लगा रहता है.सर ये तो ज़िंदगी का एक कड़वा सच है कि हम सभी अपने पिछले समय मे वापस जाना चाहते हैं लेकिन हमारे लिये यह एक सपना ही रह जाता है

Kavita Rawat said...

दुनिया भी अजब सराय फानी देखी,
हर चीज यहाँ की आनी जानी देखी,
जो आके ना जाये वो बुढ़ापा देखा,
जो जाके ना आये वो जवानी देखी |

..... सच सबकुछ जानकार भी अनजान बनना अच्छा लगता है हमें ..

आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

arvind chandra said...

Ham samay ki kimat to samay bitne k bad hi pata chalta hai lekin tab bahot der ho chuki hoti h
theek usi tarah jab ham kisora awastha m hote hai to sochte hai ki jaldi s jawan ho jay lekin jab ham 40 k as pas hote hai to sochte hai ki samay ka pahiya ruk jay or mai apni jindgi or bhi kul k ji lu.

Harsh mishra said...

जब आप मन का लिखते हैं तो अच्छा लिखते हैं। अतः संसार का छोड़कर मन का ही लिखा करिए।

shabana Khan said...

मनुष्य की प्रकृति ही ऐसी है जिज्ञासा का सागर कभी भरता ही नहीं। बहुत खूब लिखा है।

prachi arya said...

काश ये होता काश वो होता, ऐसा होता तो ये होता वैसा होता तो वो होता, इक्छाएं बहुत हैं।
इंसानी दुनिया की ये निशानी देखी, चकाचौंध भरी ज़िन्दगी की दीवानी देखी।

“दुनिया भी अजब सराय फानी देखी,हर चीज यहाँ की आनी जानी देखी,जो आके ना जाये वो बुढ़ापा देखा,जो जाके ना आये वो जवानी देखी |

Aparna Dixit said...

यह जिन्दगी एक मेला हैं जहां एक ओर आपका बेटा है जो अभी इस मेले में नया हैं। उसे लगता कि मेले में दिखने वाली हर चीज उसे मिल जाए तो मज़ा आ जाए। दूसरी ओर आप हैं जो इस मेले में लंबे समय से हैं तो आप को पता हैं कि इस मेले की हर चीज आपको पल भर की खुशी देगी इस्लिए आप इस मेले का भरपूर आनंद नहीं ले पा रहहै।यह मानव जीवन की विशेषता है कि वो कभी आज में खुश नहीं रहता।आज वो भविष्य के लिए दौड़ता हैं और जब भविष्य में होता तब लालची नजर से देखता कि काश वो दिन वापस आ जाएं जो कि संभव नहीं है। इस्लिय्ये हमे अपने आज में खुश रहना सीखना चाहिए।

sneha singh said...

jab humare pass jo hota hai hm usse satisfy nh hote lekin jb vo chij chali jati hai to use miss karte hai.....mtlb ye ki hm kabhi satisfy nh ho sakte ye sabse badi reality hai

Vivek kashyap said...

वक्‍त के साथ साथ सब कुछ बदलने लगता है इन दोनो के बीच की जिन्‍दगी हम जी रहै है लेकिन ये काली दाढी भविष्‍य बनाने के चक्‍कर मे कब सफेद हो जायेगी ये हमे पता नही चलेगा क्‍योकि वक्‍त कभी किसी के लिए नही रूकता

beetu boss said...

I am impressed with this article, sir you have written so well and expressed it beautifully, I have personally felt that even i was also like the way your son behaves in the age of 14.

gyanendra Bhargava said...

जिंदगी का दौर कैसे कैसे बदलता रहता है इसका सच आपने बेहतर लिखा है। यह सच है कि मनचाहा ही जीवन नही है, समझौता जीवन के साथ चलता रहता है ।
बढ़िया हैं। अच्छा होता कि शरीर के साथ ही उम्र के इस गैप के बीच होने या करने वाली गलतियों को बताते और अपने बुढ़ापे के माध्यम से उन समस्याओं का हल। जैसे इस उम्र में हम कई गलती करते हैं, बड़े होने पे उनका एहसास होता है तो इस लेख में शीर्षक के हिसाब से ऐसी गलतियों को दूर करने का उपाय बताना चाहिए

Renu Soni said...

A beautiful description of what we call '' change in behavior, thoughts, opinion and oneself" n also of generation gap..
This is a mandatory thing that comes up with each b everyone at some point of time or the other which really makes us think as to what to say or what to think n also to what to explain but nevertheless this is LIFE.

Anonymous said...

वक्‍त के साथ साथ सब कुछ बदलने लगता है इन दोनो के बीच की जिन्‍दगी हम जी रहै है लेकिन ये काली दाढी भविष्‍य बनाने के चक्‍कर मे कब सफेद हो जायेगी ये हमे पता नही चलेगा क्‍योकि वक्‍त कभी किसी के लिए नही रूकता Vivek kashyap

Nishit Gupta said...

It would be politically correct to say that "age is not just numbers" and we should not hide our age, as every lived moment gives us wisdom and maturity.
But in yester years it was a very common practice of all to imitate and behave like matured person . our whole struggle is to "underline our presence" and prove that we are smart like big people. In doing so , we try to imbibe style of big people in our own sweet way,whether good or bad. Be it keeping beard or moustaches or smoking. We all pass through with same kind of sentiments.
But after getting over 40 years , we want to recede back.we like to revive all that we missed in settling our family, social , financial life.
There is clock ticking at the back of our mind that we are ageing. The grey hairs acts as an alarm. The fear of aging gets more intense when we hear the conversation of middle aged people. All their conversation revolves around health issues, good night sleep and vital metabolism. we want to remain young . we try to leave behind all the worries. we want to defy our age. This is a very nice write up that took attention to sentiments related to inevitable journey of Life.

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