Wednesday, January 14, 2009

अँधेरा भर नहीं होती रात

रात खूबसूरत होती है या दिन कहना मुश्किल है लेकिन रात अपने आप में एक एहसास है हाँ एक बात जरूर तो जरूर है कि रात में जो अलग किस्म का अपनापन होता है एक दुलार होता है शान्ति होती है .सारे दिन की थकान, बैचैनी जब रात के हवाले होती है तो शरीर ही नहीं मन को भी राहत मिलती है .रात का मतलब अँधेरा , सन्नाटा ,अकेलापन , नींद घर ,आराम और न जाने क्या क्या होता है लेकिन रात इनके अलावा भी बहुत कुछ है .रात होते ही  न जाने कितनी यादें मन के कोने से निकल कर सामने आ जाती हैं .सुबह का इंतज़ार करते हुए रात काटना और बात है लेकिन रात को जीते हुए रात काटना बिल्कुल अलग एहसास है . गीत कार ने यूँ ही नहीं लिखा की "बात होती है शुरू आधी रात को , बेला महका रे महका आधी रात को' (फ़िल्म : उत्सव ) न जाने कितने हिसाब किताब रात के अंधेरे में अनजाने अनचाहे खुलकर बिखर जाते हैं . नींद भर नहीं होती रात हर रात अपने आप में आशा का एक सिम्बल  है .
"रात भर का मेहमान है अँधेरा किसके रोके रुका है सवेरा" (फ़िल्म :सोने की चिडिया), सही है सवेरा तो आएगा लेकिन जब तक रात है हमें पेशेंस नहीं खोना है बस रात के बीत जाने का इंतज़ार करना है और इसके लिए पेशेंस की जरूरत है आज की इस भागती दौड़ती जिन्दगी में अगर हम थोड़ा सा पेशेंस रख लें तो असफलता की रात जाते देर नहीं लगेगी ..उसके बाद एक भरा पूरा  दिन हमारा इंतज़ार  कर ही रहा है . ये रात तो ख़ुद को रीचार्ज करने के लिए भी तो आती है .हर दिन के लिए नए सिरे से अपने आपको तैयार करने के लिए , नयी प्लानिंग और अपने क़दमों के निशाँ छोड़ते हुए आगे के सफर पर निकलना .मुझे याद है जब बचपन में मैं जब भी परेशान होता था पापा कहते थे अँधेरा बस छंटने को है और सचमुच रौशनी की किरणे मन में फूंटने लगती थी . हर रात आने वाले दिन का आने वाली उमीदों का संदेशा लेकर आती है . नेचर का अपना एक अनुशासन है आप भी जीवन में अनुशासन का पालन कीजिये रात कटेगी और सूरज का उजियारा आप के भी जीवन में आएगा लेकिन क्या आप इतना वेट कर पायेंगे . वो कहते हैं न कि हर गलती कुछ न कुछ सिखा ही देते है वैसे ही रात भी हमें मौका देती है हमें अपने आप से बात करने का , अपने आप के अन्दर झाँकने का ,हमने क्या सही किया क्या ग़लत किया.
जिस तरह सारे दिन एक जैसे नहीं होते हैं और उसी तरह से सारी रातें भी एक जैसी नहीं होती हैं किसी रात आप अपने किसी अज़ीज़ दोस्त की पार्टी में नाच गा रहे होतें तो किसी रात आप बिस्तर पर स्ट्रेस के कारण जगते हुए काट देते हैं और किसी रात आप ऐसा मस्त सपना देखते हैं कि आप सुबह होने ही नहीं देना चाहते हैं यही कहानी हर रात कहती है "ये रातें नयी पुरानी कहती है कोई कहानी" (जूली ) है ।जिन्दगी भी तो हमें यही कहानी सुनाती है वो चाहे दिन हो या रात सब एक जैसा नहीं होता लेकिन रात के बाद आप दिन का वेट इसलिए करते हैं क्योंकि दिन एनर्जी, फ्लो का सिम्बल है और ये इसलिए है कि आप को पता है कि कोई दिन आपका होने वाला है इसलियी आप उस दिन का वेट कर रहे हैं.हम उम्मीदों  भरे दिन का इन्तिज़ार हँसते हुए गाते हुए झूमते हुए करना है दोस्तों से पूछते हुए वेयर इस दा पार्टी टुनाईट  .सपने उम्मीदों यादों इन्तिज़ार भरी रात और इसके बाद आनेवाले हर चमकते हुए दिन के साथ आपको छोड़कर मैं विदा लेता हूँ . फ़िर मुलाकात होगे जिन्दगी के किसी नए रंग के साथ
आई नेक्स्ट मैं १४ जनवरी २००९ को प्रकाशित

11 comments:

"अर्श" said...

aap par lekhani ki asim kripa hai ,bahot khub likha hai aapne...dhero badhai aapko....

agar gazal pasand ho to mere blog pe aapka khasa swagat hai...

arsh

Priya said...

hi sir...

well said sir...'andhere bhar nahi hoti raat' night stands for so many things as u said...we should be thankful to it bcoz if, it wouldn't been there then we would never got the chance to taste the importance n grace of the day that comes after night gets over isn't it........

free to express said...

Wow sir finally a new year treat for us...Whenever I read ut blog I always wonder how simply n beautifully u present an extra ordinary image from ordinary topics?? WEll candidly "Raat" is a phase of hope, planning, peeping inside us, n analysing our deeds...one thing more, while writing this comment a thought has just flashed in my mind that may be in life we all work hard, do all earning in life so that we can get a beautiful n pleasent night.N Raat has attached so much 'APNAPAN'its is totally for oneself n thats the best part of it...

शान्तनु कुमार श्रीवास्तव said...

अच्छा लगा आपका ये लेख पढ़कर, मैं भी कुछ इससे जुड़ा हुआ ही सोच रहा था, लेकिन ज़रा अलग है, जल्दी ही बताऊंगा, वैसे आपका ये लेख पेंटिंग सा लग रहा है, मैं इसमे कुछ जोड़ना चाहूँगा...
कहते हैं रात जिसे बड़ी खूब होती है,
कभी अँधेरा,
कभी चाँदनी
कभी सोच,
कभी ख्वाबो की धुप होती है,
रात वाकई बड़ी खूब होती है।

sheel said...

hi..
compliments for this article, specially on being creative to give raat a new phase....keep it up...

Best

mnonika.s world said...

sir that is v good and keep writing. you write very well i read ur features in i next i gain lots of things and we love you lot good bye sir, monika mmc2

pratibha said...

very nice mukul ji

archana chaturvedi said...

Raat jesa sukun kai or nai mil sakta raat hume apne liye samye deti hai jb ki din ko hum dusro ko liye samye dete hai
bhut aacha or majedaar lekh hai

virendra kumar veer said...

aaap ka ye lekh abhut hi majedaar hai. raat hi to hai jo hume tanhai aur akele pan ka ahsaas karati hai. aapne sahi kaha sir sabhi rate ek aisi nahi hoti koi parti me gaa aur dance kar raha hota hai to koi kisi ki yaad me raat kat dete hain.raat me jo sukun, bechani, ahasaas, hota hai o din me nahi milta.

"aab muje raat din tumhara hi khayal hai kya khau pyar me diwano jaisa haal hai..................."

sonu kigam ka ye gana raat bahut hi majedaar kar deta hai


"raat kee hatheli par chand jagmgata hai uske narm kirano me tumko dekhata hu to dil dhadak sa jata hai.................."

samra said...

sir mujhe to raat mein do kaam karne ache lagte hai ek to sona or ager neend na aye to gaane sunna...

ARUSHIVERMA said...

Night is certainly more novel and less profane than day.

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