Tuesday, January 14, 2014

तू भी ऑनलाइन है ........

नए साल में आप सब जरुर खुशियों के साथ टैग हो गए होंगे,खुशियों के साथ हैंग आउट जारी होगा और चिली वेदर में चिलेक्स कर रहे होंगें अब चूँकि नया साल है तो मैंने सोचा क्यूँ न आपके साथ एक नयी लैंग्वेज में कम्युनिकेट किया जाए मैंने कहीं पढ़ा था इस नए साल में कुछ नया कीजिये जो किया है उसके सिवा कुछ कीजिये तो मैंने भी सोचा कि कुछ ऐसा करूँ जो पहले न किया हो पर ऐसा क्या ? बड़ा वाला क्वेशन मार्क था तभी मेरे व्हाट्स एप पर एक मेसेजनुमा जोक आया कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है... अगर तुम  १०:३० बजे ही सो जाती है तो तुम्हारे  व्हाट्सएप्प पर "लास्ट सीन २:३० ए एम" क्यों दिखाता हैहा हा और मेरे दिमाग की बत्ती जल गयी असल में नए नए मोबाईल एप हमारी जिन्दगी में किस तरह असर डाल रहे हैं इसका अंदाजा हमें खुद नहीं है.एसएमएस में तो आप झूठ बोल कर निकल सकते थे कि मेसेज नहीं मिला पर ये नए नए चैटिंग एप और लास्ट सीन वाला स्टेट्स आपकी सारी हकीकत आपके दोस्तों और परिचितों के सामने बयां कर देते हैं.अब सोचने की बारी आपकी है यूँकि ये बात आपको क्यूँ बताई जा रही है और इससे आपको क्यूँ फर्क पड़े,गुड क्वेश्चन तो भाई मामला ये है कि फैमली प्लानिंग वाला स्लोगन तो  आपने सुना ही होगा कि बच्चे दो ही अच्छे हाँ भाई ज्यादा बच्चे आफ़त ही होते हैं उसी तरह से यारी दोस्ती करना अच्छी बात है पर यारी दोस्ती जब ज्यादा लोगों से हो जायेगी तो आपको समस्या आयेगी ही क्यूंकि एक ओर मोबाईलनेट  रेव्ल्युशन ने हमें ग्लोबली कनेक्टेड तो कर दिया ही है वहीं कहीं हम बैकवर्ड न घोषित कर दिए जाएँ इस दौड़ में जितने चैटिंग एप इंटरनेट पर उपलब्ध हैं वो सबके सब हमारे मोबाईल पर होने चाहिए इस ललक ने कब हमें इतना एक्सप्रेशन लेस कर दिया कि हमें अपने रीयल एक्सप्रेशन को भूल टेक्नीकल एक्सप्रेशन यानि इमोजीस के गुलाम बन गये.हंसी आये या ना आये हा हा लिख कर कोई स्माईली बना दो सामने वाला यही समझेगा कि आप बहुत खुश हैं पर क्या आप वाकई खुश हैं? क्यूँ अब मैं थोडा सा हंस लूँ, अक्सर हम चैट पर यही कर रहे होतें वर्च्युल चैटिंग में हम जीवन की रीयल प्रोब्लम का सल्यूशन ढूंढने लग गए हैं .हमारी फोनबुक में बहुत से लोगों के नंबर सेव रहते हैं और हम जितने ज्यादा चैटिंग एप डाउनलोड करेंगे हम उतने ही ज्यादा खतरे में रहेंगे क्यूंकि कोई न कोई चैटिंग एप हर कूल डूड के मोबाईल में रहता है और इससे कोई भी ,कभी भी आपको संदेसा भेज सकता है. यह जाने बगैर कि आप बात करने के मूड में हैं कि नहीं दूसरी चीज है आपकी प्राइवेसी,चैटिंग एप और कुछ न बताएं तो भी ये तो सबको बता ही देते हैं कि आप किसी ख़ास एप पर कितने एक्टिव हैं अगर इससे बचना है तो कुछ और एप डाउनलोड कीजिये. ये तो आप भी मानेंगे कि बगैर काम की चैटिंग खाली लोगों का काम है या आप इमोशनली वीक है और रीयल लाईफ में आपके पास कोई नहीं हैं जिससे आपकी उँगलियाँ मोबाईल के की पैड पर भटकती रहती हैं कि कहीं कोई मिल जाए?
मेरे यंगिस्तानी डूड लोगों मामले और भी हैं ज्यादा चैटिंग ये बताती है कि आप फोकस्ड नहीं हैं चैटिंग करने के लिए उम्र पडी है ये टाईम कुछ पाने का ,कुछ कर दिखाने का है.बात जिन्दगी की हो या रिश्तों की हम जितने सिलेक्टिव रहेंगे उतना ही सफल रहेंगे और यही बात एप और चैटिंग पर भी लागू होती है,जो आपके अपने है उन्हें वर्च्युल एक्सप्रेशन नहीं रीयल एक्सप्रेशन की जरुरत है.ईमोजीस आँखों को अच्छी लगती हैं पर जरुरी नहीं कि दिल को भी अच्छी लगे. जो रिश्ते दिल के होते हैं उन्हें दिल से जोडिये नहीं तो एक वक्त ऐसा आएगा जब आप होंगे और आपकी तन्हाई मोबाईल की फोनबुक भरी होगी पर दिल की गलियां सूनी होंगीं तो अपने अपनों से मिलने जुलने का सिलसिला बनाये रखिये बी सिलेक्टिव, बी फोकस्ड और हाँ दोस्ती  और चैटिंग कम ही अच्छी  

आई नेक्स्ट में 14/01/14 को प्रकाशित 

2 comments:

jessica yadav said...

Although new apps and social nerworking sites have bridged the gap between distant dear ones but there are pros and cons of it too.

Dimple Badlani said...

It is very well said sir we as a student should focus on our studies or career rather than wasting in our time on chatting in Facebook or whatsaap.These sites only kill our precious time nd we are very happy or enjoying it by chatting with friends or relatives nd we just ignore this that one day we have to struggle hard for our career or future.

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