Friday, August 9, 2019

इंटरनेट और निजता का मुद्दा

सोशल मीडिया पर आने से जिस तथ्य को हम नजरंदाज करते हैं वह है हमारी निजता का मुद्दा और हमारे दी जाने वाली जानकारी.जब भी हम किसी सोशल मीडिया से जुड़ते हैं हम अपना नाम पता फोन नम्बर ई मेल उस कम्पनी को दे देते है.असल समस्या यहीं से शुरू होती है .  इस तरह देश के सभी नागरिकों का आंकड़ा संग्रहण कर लिया गया .उधर इंटरनेट के फैलाव  के साथ आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण हो उठें .लोगों के बारे में सम्पूर्ण जानकारियां को एकत्र करके बेचा जाना एक व्यवसाय बन चुका है और  इनकी कोई भी कीमत चुकाने के लिए लोग तैयार बैठे हैं .कई बार एक गलती  किसी कंपनी की उस लोकप्रियता  पर भारी पड़ जाती है जो उसने एक लंबे समय में अर्जित की होती है. पिछले साल  पहले कैंब्रिज एनालिटिका मामला सोशल नेटवर्किंग साईट  फेसबुक के लिए ऐसा ही रहा. इस कंपनी पर आरोप है कि इसने अवैध तरीके से फेसबुक के करोड़ों यूजरों का डेटा हासिल किया और इस जानकारी का इस्तेमाल अलग-अलग देशों के चुनावों को प्रभावित करने में किया. इनमें 2016 में हुआ अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव भी शामिल  है. पिछले दिनों यह समाचार सुर्ख़ियों में रहा जिसमें यह खबर आई कियूएस फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी)सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक से बिलियन डॉलर यानी 35 हजार करोड़ रुपये वसूलने वाला है। यह जुर्माना किसी सोशल मीडिया कंपनी पर अब तक का लगने वाला सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले साल 2012 में गूगल पर भी 22 मिलियन डॉलर (154 करोड़ रुपये) का जुर्माना लग चुका है। एफटीसी ने निजता का उल्लंघन और यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल करने के लिए फेसबुक पर जुर्माना लगाने जा रहा है।  निजता से जुड़ा यह मामला भले ही अमेरिका का हो पर इसकी गूंज भारत में सुनाई दी |अभी यह मामला चल ही रहा था तो एक और खबर ने दुनिया में हलचल मचा दी कि न्यूज वेबसाइट ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेजनएपल व गूगल के कर्मचारी स्मार्ट स्पीकर और वॉयस असिस्टेंट एप के जरिए ग्राहकों की बातें सुन रहे हैं। हालांकि इन कंपनियों का दावा है कि वे अपना प्रोडक्ट अपडेट करने के लिए बातें रिकॉर्ड करते हैं।
अमेजन की टीम हाल ही लॉन्च एलेक्सा व ईको स्पीकर की वॉयस की रिकॉर्डिंग भी करती है। उसका कहना है कि ऐसा वे ग्राहकों की मंजूरी लेकर ही करते हैंताकि भाषा व उनके कमांड को ज्यादा बेहतर बना सकें। भारत में अभी आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस से लैस स्मार्ट स्पीकर में अमेजन का एलेक्सागूगल का असिस्टेंट व एपल का सीरी शामिल है। हाल में अमेजन एलेक्सा ने पोर्टलैंड की महिला व उनके पति की निजी बातें रिकॉर्ड की और पति के दोस्त को  भेज दी। महिला ने शिकायत की तो कंपनी ने जांच के बाद माफी मांगी।
दोनों ही मामले लोगों के डेटा और उनके निजता से जुड़े हुए हैं पर अपनी निजता के प्रति जैसी संवेदनशीलता अमेरिका और यूरोप के देशों में दिखती है |भारत के लोग उससे बेखबर हैं |मोबाईल क्रांति ने लोगों के हाथ में ऐसा यंत्र दे दिया जिससे कुछ भी निजी नहीं रह गया है |आप जैसे ही अपने मोबाईल को इंटरनेट से जोड़ते हैं |आपका कुछ भी निजी नहीं रहा जाता यह अलग बात है कि गूगल जैसी कम्पनियां बार –बार यह दावा करती हैं कि वे लोगों की निजता का ख्याल रखती हैं और उनके डेटा को किसी भी थर्ड पार्टी के साथ शेयर न किया जाता है |लेकिन तथ्य यह भी है किकिसी भी ऑनलाइन कम्पनी का विज्ञापन कारोबार तभी तेजी से बढेगा जब उसके पास ग्राहकों की गोपनीय जानकारी हो जिससे वह उनके शौक रूचि आदतों के हिसाब से विज्ञापन दिखा सकेगी वहीं साईबर अपराधियों की निगाह भी ऐसे आंकड़ों पर रहती है,पर ऐसी घटनाएँ न हों और अगर हों तो दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्यवाही हो ऐसा कोई भी प्रावधान अभी तक भारतीय संविधान मे नहीं किया गया है .अभी तक ऐसे किसी मामले को निजता के अधिकार के  हनन के तहत देखा जाता है .नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है. किसी नागरिक की आधार सूचना हो या कोई अन्य किस्म की डिजीटल सूचना- उन पर सेंध लगाने की कोशिश  अंततः नागरिक गरिमा ही नहींराष्ट्रीय संप्रभुता को भी ठेस पहुंचाएगी. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी एन श्री कृष्णा की अध्यक्षता में गठित समिति ने पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंप दिया है .इस बिल में “निजी” शब्द को परिभाषित किया गया है.इसके अतिरिक्त इसमें सम्वेदनशील निजी डाटा को बारह  भागों में विभाजित किया गया है.जिसमें पासवर्ड,वित्तीय डाटा,स्वास्थ्य डाटा,अधिकारिक नियोक्ता,सेक्स जीवन,जाति/जनजाति,धार्मिक ,राजनैतिक संबद्धता जैसे क्षेत्र जोड़े गए हैं.इस बिल को अगर संसद बगैर किसी संशोधन के पास कर देती है तो देश के प्रत्येक नागरिक को अपने डाटा पर चार तरह के अधिकार मिल जायेंगे .जिनमें पुष्टिकरण और पहुँच का अधिकारडाटा को सही करने का अधिकारडाटा पोर्टेबिलिटी और डाटा को बिसरा देने जैसे अधिकार शामिल हैं .इस समिति की  रिपोर्ट के अनुसार यदि इस बिल का कहीं उल्लंघन होता है तो सभी कम्पनियों और सरकार को स्पष्ट रूप से उन व्यक्तियों को सूचित करना होगा जिनके डाटा की चोरी या लीक हुई है कि चोरी या लीक हुए डाटा की प्रकृति क्या है ,उससे कितने लोग प्रभावित होंगे ,उस चोरी या लीक के क्या परिणाम हो सकते हैं और प्रभावित लोग जिनके डाटा चोरी या लीक हुए हैं वे क्या करें .ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति का डाटा चोरी या लीक हुआ है वह उस कम्पनी से क्षतिपूर्ति की मांग भी कर सकता है .फिलहाल यह बिल संसद की मंजूरी के इन्तजार में है,लेकिन सिर्फ़ कानून के बन जाने से सबकुछ ठीक हो जाएऐसा संभव नहीं है. इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा. इस कानून का उद्देश्य  आम लोगों को यह जानकारी देना है कि आपका डाटा कौन ले रहा है और उसका इस्तेमाल कौन कर रहा है.क़ानून के तहत लोगों का निजी डेटा केवल पहले से बताए गए उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा. कंपनियों को यह बताना होगा कि वो डेटा की जानकारी कैसे और क्यों ले रहे हैं. कंपनियों को यूज़र्स का डेटा सुरक्षित करने की ज़रूरत है और अगर उनका डेटा लीक होता है तो उन्हें बताना होगा कि यह उनके लिए कितना ख़तरनाक हो सकता है.भारत ने इस दिशा में काफी देर से ही एक सार्थक कदम उठाया है .इसके साथ ही लोगों को भी सोशल मीडिया के प्रयोग करते वक्त सावधानी बरतनी होगी कि उन्हें कितनी जानकारी लोगों को देनी है .वक्त बे वक्त चेक इन्स की जानकारी हो या घर से दूर छुट्टियाँ मनाने का मामला ,हमें यह बात हमेशा जहन में रखनी होगी इंटरनेट पर कुछ भी गोपनीय नहीं है .
दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 09/08/2019 को प्रकाशित 

1 comment:

अनीता सैनी said...

जी नमस्ते,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (10-08-2019) को "दिया तिरंगा गाड़" (चर्चा अंक- 3423) पर भी होगी।


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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है

….

अनीता सैनी

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