Monday, December 31, 2007

नया साल और मैं

३१ दिसम्बर २००७ रात को १०.३० पर सोने की नाकाम कोशिश
११.०० कोशिश एक बार फिर नाकाम
११.३० इस बार मैंने फैसला कर लिया था नहीं उठना है लेकिन .......................................
आप भी सोच रहे होंगे कि ये माजरा क्या है
अगर नींद न आने पर कोई लेख लिख रहे हैं तो सॉरी ले लो जी इस ब्लोग को जवान लोग पढ़ते हैं और उनेह खूब नींद आती है
और अगर आप को नींद नहीं पड़ती तो हम क्या करें
खैर ये लेख मैं महज़ अपनी कुंठा मिटाने के लिए लिख रहा हूँ
ये हर साल मेरे लिए एक समस्या रहती है जब ३१ तारीख को यार दोस्त पूछना शुरू करते हैं
क्या कार्यकर्म है ?
कहाँ जा रहे हो ?
क्या करोगे ?
अब मैं क्या कहूँ कि जब सारी दुनिया पागल हो तो मैं भी पगला जाऊँ
मैं वापस मुद्दे पर लौटता हूँ ये लेख मैं महज़ इसलिए लिख रहा हूँ कि मेरे घर के आस-पास इतना शोर है कि मैं चाह कर सो नही सकता तो सोचा क्यों न अपना गम बांटा जाये और किसी सोते हुए को जगाया जाये (मेरी कॉलोनी में कुछ भाई लोग डी जे पर मस्त हैं और मेरा सोना हराम है )
ये नया साल है क्या मुझे नही पता
मेरा अबोध मन कहता है कि ये एक मथेमतिकल टर्म है और कुछ नहीं
नए साल में क्या सूर्य पश्चिम से उगता है ?
नए साल में क्या सूर्य पूरब में डूबता है ?
नए साल में क्या पूरे भारत में बिजली रहती है ?
नए साल में क्या सब खुश रहते हैं ?
नए साल में क्या देश में इम्मान्दारों की नयी जमात पैदा हो जाती है ?
आदि आदि आदि और आदि
ये कुछ इसी तरह का मामला है कि गिनती पढेंगे तो पहले १ आएगा फिर १०० आएगा
ये नए साल का मामला भी कुछ ऐसा ही है
नया साल मतलब जो बच्चा है वो जवान होगा जो जवान है वो बूढा होगा जो बूढा वो भगवन के पास जाएगा
जीवन का चक्र चलता रहेगा तो ख़ुशी मनाने के लिए किसी खास दिन का इंतज़ार क्यों ?

जब सारे दिन एक ही जैसे रहते हैं तो हर दिन को नए दिन की तरह अच्छा बनाने की कोशिश हम क्यों नहीं करते सिर्फ पार्टी मना लेने हुडदंग मचा लेने से पूरा साल अच्छा रहने वाला है तब तो सारी दुनिया इस दिन पागल होकर रोड पर होगी
खैर वो एक गाना याद है न

कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हककीकत आधा फ़साना
चश्मा उतारो फिर देखो यारो
दुनिया वही है चहेरा पुराना


नए साल की शुभकामना की औपचारिकता निभाते हुए (नही तो आप मुझे पिछड़ा समझेंगे )इस उम्मीद में मैं आपसे विदा लेता हूँ कि आप साल के हर दिन को नए साल के पहले दिन जैसा खूबसूरत बनाने की कोशिश करेंगे, और हाँ

किसी का भी दिल नहीं दुखायेंगे

इस नये साल में मेरी इतनी बात मानेंगे ना

चलते चलते

इस नए साल में कुछ नया कीजिए
जो किया है उसके सिवा कीजिए
ख़त बधाई का बेशक लिखें दोस्तों
दुश्मनों के लिए भी दुआ कीजिए


आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा

रात्री १२.45

8 comments:

Priyanka Singh Sisodiya said...

A BRAND NEW GOOD MORNING SIR'

I know you'll say what's so new about it but sir fact is fact we have to except it.Sir, if in this busy n short life we get a reason to celebrate n smile then what's wrong in that.We should take everything positively' see at this moment people wish even the fortotten ones and make all the possible ways to have good things in the so called new year ' we also try our level best to avoid things that went wrong in the previous year and this is only possible when we are able to differentiate b/w the two years.....but very correct thing said by you at the end and undoubtedly we'll do the same..........sorry for anything wrong it was my perception.

nikku sultan ka darbar said...

hello sir, halanki aapke lekh der se padh raha hun par jab jaago tabhi savera,aapki hi mashhur panktiyan hain na!! khair bada garv mahsus hota hai jab aapke vichron se rubru hota hun. mujhe aapki baat se puri sahmati hai. halanki priyaka ka thinking point of view bhi galat nahi kaha jayega kyoki ye virtual world hai. aakhir hum har kisi ka matam kyo nahi manate, roz hi karodo ki sankhya me log is dhrti ko alvida kahte hain...kahir is duniya ko badalne ke liye hum aap kafi nahi hain,,, its a continuous cycle and it is going whr it shoud go,,, prakriti ka yahi manna hai...agar kuch galat likh diya ho to shishya samajh kar maaf kariaga,
sadaiv aapka
nikhil

nikku sultan ka darbar said...

hello sir, halanki aapke lekh der se padh raha hun par jab jaago tabhi savera,aapki hi mashhur panktiyan hain na!! khair bada garv mahsus hota hai jab aapke vichron se rubru hota hun. mujhe aapki baat se puri sahmati hai. halanki priyaka ka thinking point of view bhi galat nahi kaha jayega kyoki ye virtual world hai. aakhir hum har kisi ka matam kyo nahi manate, roz hi karodo ki sankhya me log is dhrti ko alvida kahte hain...kahir is duniya ko badalne ke liye hum aap kafi nahi hain,,, its a continuous cycle and it is going whr it shoud go,,, prakriti ka yahi manna hai...agar kuch galat likh diya ho to shishya samajh kar maaf kariaga,
sadaiv aapka
nikhil

जिन्दगी और बता तेरा इरादा क्या है said...

जीवन का चक्र चलता रहेगा तो ख़ुशी मनाने के लिए किसी खास दिन का इंतज़ार क्यों ?.....बड़ा ही मौलिक प्रश्न है गुरु जी....

archana chaturvedi said...

mera to najrriya kheta hai ki jo log jindgi ko shui mayene me jina nai chata hai vo jine ke bhane dhunte hai par jine or pine valo ke liye mhurt thodhi niklte hai na sahi baat.........

virendra kumar veer said...

JIWAN CHALATA RAHEGA TO KHISHI MANANE KE LIYE HUM KISI KHAS DIN KA INTJAAR KYUN KARE JINDAGI HAIN KABHI BHI KHUSIYA MANA SAKTE HAIN. KHUSIYA KE LIYE KISI MAHURAT KI JARURAT NAHI PADTI. JO JINDAGI SAHI MAYNE ME JINA CAHTE HAI UNHE KISI BAHANE KI JARURAT NAHI PADTI HAI.

samra said...

mein aapki is baat se sehmet hun ki kisi cheez ko celebrate kerne ke liye koi din muqarrar ker dena sahi nahi hai lekon sir is daur mein insaan choti choti khushiyan jeena chahta hai kyunki aapne woh to suna hoga kya pata "kal ho na ho" isiliye jaise mil raha hai celebrate karo koi din bhi ho.. khushiyan manane ka bahana hona chahiye.......or jahan tak ache kaamo ki baat hai woh aap sahi keh rahe hai hum logon ko ache kaam kerne chahiye har saal ek nayi seekh de jata hai usse humein seekhna chahiye and usko sahi way mein apply kerna chahiye apne aane wali zindigi mein...

Shivanshu Gupta said...

यहाँ हर कोई इतना उलझा हुआ है या शायद उलझे होने की वजह वो खुद है क्यों की कभी उसने जानने की कोशिश ही नही करी की आखिर खुश होने के लिए उन्होंने साल में से सिर्फ चंद दिनों को ही क्यों चुना हुआ है , मैं खुद कभी सोच के भंवर में ये सोचते हुए खो जाता हूँ की दुनिया ने अपनी खुशियों को भी जाहिर करने के लिए तारीखें मुकरर कर रखी है.....

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