Monday, September 3, 2012

राजनीति का बड़ा पर्दा


राजनीति भी अजीब चीज है जब दूसरों के साथ हो तो मजा देती है जब खुद के साथ हो तो सजा पर फिर भी एक आम इंसान तो यही चाहता है कि उसका जीवन शांति से चलता रहे पर अपना सोचा कहाँ होता है आप भी सोच रहे होंगे कि ये राजनीति को मैं कहाँ से ले आया |अरे भाई अपने आस पास नजर दौडाइए देखिये हर जगह इसी की चर्चा है संसद थमी है राजनीति के कारण विश्वविद्यालय गर्म हैं होने वाले चुनाव के कारण और सिनेमा में गैंग्स ऑफ वासेपुर का कथानक भी राजनीति और माफिया के गठजोड़ पर ही है |वैसे हमारे जीवन में राजनीति का बड़ा महत्व है पर जब फिल्मों की होती है तो वहां भी राजनैतिक दांव पेचों को खूब दिखाया जाता है ये अलग बात है कि यहाँ गांधीगिरी,भाईगिरी तो चल जाती है पर नेतागिरी को पसंद करने वाले लोग कम ही होते हैं |1975 में आंधी फिल्म का विषय राजनैतिक था जिस कारण आपातकाल में फिल्म को कुछ समय के लिए प्रतिबन्ध भी झेलना पड़ा |फिल्म के गाने तो खूब चले पर फिल्म नहीं चली|1984 में दो फ़िल्में राजनैतिक विषयों को लेकर बनी राजेश खन्ना अभिनीत आज का एम् एल ए रामवतार और अमिताभ बच्चन अभिनीत इन्कलाब दोनों ही फिल्मों में राजनैतिक व्यवस्था की गंदगी से परेशान राजनैतिक चरित्रों को दिखाया गया था | हू तू तू (1999) भी राजनीति और अपराध के गठजोड़ पर बनी एक और फिल्म थी| नायक (2001) फिल्म में पहली बार एक नेता को आदर्श रूप में दिखाया गया जो एक दिन के लिए राज्य का मुख्यमंत्री बनता है और एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री से लोगों को निजात दिलवाता है | 2003 में मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित सत्ता फिल्म में दिखाया गया कि कैसे एक  राजनैतिक व्यक्ति अपनी सत्ता बचाने के लिए रिश्तों का  किस तरह दोहन करता  हैं| कोलकाता के युवकों और राजनीति की कहानी में लिपटी मणि रत्नम की फिल्म युवा  काफी कुछ कहती है |2009 में आयी गुलाल उत्तर भारत की छात्र राजनीति की हू ब हू  तस्वीर उतारती है |2010 में आयी फिल्म राजनीति जहाँ समसामयिक राजनीति की गंदगी को दिखाती है वहीं रण फिल्म बड़ी खूबसूरती से दिखाती है कि राजनैतिक घराने मीडिया का इस्तेमाल किस तरह से अपने फायदे के लिए करते हैं |मजेदार बात ये है कि राजनीति के कथानक पर बनी ज्यादातर फ़िल्में व्यवसायिक रूप से असफल रही हैं लेकिन तथ्य यह भी है कि हमारे समाज में राजनीति की भूमिका हमेशा रही है शायद इसीलिये हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में लगातार आगे बढ़ रहे हैं |देखा न आप बोर होने लग गए जब सीरियस मुद्दों पर बात शुरू होती है तो हमारा यही रवैया गलत लोगों को राजनीति में आगे बढ़ा देता है |हर फिल्म में राजनीति को नकारात्मक रूप में दिखाया जाता है जो इस बात का परिचायक है कि राजनीतिज्ञों पर हमारा भरोसा कम हुआ है |ऐसा हो क्यों रहा है यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है राजनीति में गंदगी गलत लोगों के उसमे आने के कारण है और इसको सुधारने की जिम्मेदारी हम यंगिस्तानियों की है |आपकी जिंदगी इसलिए कूल है क्योंकि आपको सिस्टम से मतलब नहीं है घर से कॉलेज या फिर ऑफिस दोस्तों के साथ चिल करना और मस्त रहना पर जरा ये भी तो सोचिये कि अगर हमारा सिस्टम राजनीति में गलत लोगों के आने के कारण बिगड  गया तो आपकी लाईफ भी डिस्टरब होगी क्यूँ लग गए न सोचने तो सही लोगों का चुनाव कीजिये और अगर आपको लगता है कि इस गंदगी को आप कम कर सकते हैं तो आइये राजनीति के मैदान में पर ये मत भूलिएगा जो बात आपको बुरी लगती है वो औरों को क्यों अच्छी लगेगी |
आई नेक्स्ट में 03/09/12 को प्रकाशित  

1 comment:

manoj kumar said...

बेहतरीन लेख, सर आपका हर लेख, हर दिन कुछ नया सिखाता है, इसके लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया..

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