Friday, June 14, 2013

फेसबुक ज्ञान

उधर तुम चैट पर जल रही होती हो कभी हरी तो कभी पीली और इधर वो तो बस लाल ही होता हैएप्प्स के बीच में फंसी जिन्दगी वो जाना भी नहीं चाहता था और जताना भी नहीं वो जितने एप्स डाउनलोड करता वो उतना ही दूर जा रही थी अब मामला हरे और लाल का नहीं था अब मसला जवाब मिलने और उसके लगातार ऑन लाइन रहने के बीच के फासले का था स्मार्ट फोन की कहानी और उसकी कहानी के बीच एक नई कहानी पैदा हो रही थीउसने स्माईली का प्रयोग करना शुरू कर दियापर दिल की भावनाओं को चंद चिह्नों में समेटा जा सकता है क्या ? रीयल अब वर्चुअल हो चला था |दो चार स्माईली के बीच सिमटता रिश्ता वो कहता नहीं था और उसके पास सुनने का वक्त नहीं थाएप्स की दीवानी जो ठहरी , सब कुछ मशीनी हो रहा था|सुबह गुडमार्निंग का रूटीन सा एफ बी मैसेज और शाम को गुडनाईट दिन भर हरी और पीली होती हुई चैट की बत्तियों के बीच कोई जल रहा था तो कोई बुझता जा रहा था|काश तुम टाईम लाइन रिवियू होते जब चाहता अनटैग कर देता है|वो तो हार ही रहा था पर वो भी क्या जीत रही थीकुछ सवाल जो चमक रहे थे चैट पर जलने वाली बत्ती की तरह रिश्ते मैगी नहीं होते कि दो मिनट में तैयार ,ये सॉरी और थैंक यू से नहीं बहलते इनको एहसास चाहिए जो व्हाट्स एप और टैंगो जैसे एप्स नहीं देते उसे आगे जाना था पर ये तो पीछे जाना चाहता था जब रीयल पर वर्चुअल हावी नहीं था क्या इस रिश्ते को साइन आउट करने का वक्त आ गया था या ये सब रीयल नहीं महज वर्चुअल थावो हमेशा इनविजिबल रहा करता था वर्चुअल रियल्टी की तरह जहाँ हैवहाँ है नहींजहाँ नहीं हैवहां हो भी नहीं सकता वो इनविजिबल ही आया था और इनविजिबल ही विदा किया जा रहा था शायद ब्लॉक होना उसकी नियति है.अब वो जवाब नहीं देती थी और जो जवाब आते उनमे जवाब से ज्यादा सवाल खड़े होते. चैट की बत्तियाँ उसके लिए बंद की जा चुकी थी इशारा साफ़ था अब उसे जाना होगा साइन आउट करने का वक्त चुका था. वर्चुअल रीयल नहीं हो सकता सबक दिया जा चुका था . जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है पीछे लौटने का नहीं|

3 comments:

SUNAINAA said...

arre sir kya likha hai.....

aap kya khaate hai jo badi asaani itna sateek likh dete hai...

"rishte maggie nahin hote " i luvd the line ... going to post on my FB status..

Umendra kumar Yadav said...

mukul,bahut achcha likha apne par jamana isi ka ha.

meghna singh said...

Very true sir! Although facebook and whatsapp are the two major sources of communication as well as social media, they both are somewhere destroying our personal relations and life. I also believe that these sources have merely encircled our lives in the vicious circle of emoticons, one sided comments and misconceptions. No one is able to share their emotions and feelings that are present deep in their heart.At times, we always find ourselves lonely when we need someone with us.

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