Wednesday, October 23, 2013

डेंगू से निपटने की चुनौती

डेंगू भारत में एक महामारी का रूप लेता जा रहा। डेंगू मच्छरों द्वारा फैलाया जाने वाला एक विषाणुजनित संक्रामक रोग है जिसके लक्षण फ्लू के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं और कई मामलों में यह जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है। डेंगू विषाणु से संक्रमित होने के बाद संक्रमित व्यक्ति रोग का वाहक हो जाता है जिससे उसके आस-पास के लोगों में इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। चूंकि डेंगू के लक्षण फ्लू के लक्षणों से काफी मिलते-जुलते हैं अतः कई बार इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसका अभी तक कोई टीका नहीं है।  तमाम सरकारी दावों के बावजूद हर साल डेंगू से प्रभावित होने वाले लोगों का आंकड़ा पिछले साल की अपेक्षा बढ़ता जा रहा है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि आधिकारिक आंकड़ें वास्तविक आंकड़ों की तुलना  में काफी कम हैं क्योंकि इनमें सिर्फ वही  मामले गिने जाते हैं जिसमें मरीज इलाज़ कराने के लिए सरकारी अस्पतालों में जाते हैं, और जिनकी पुष्टि सरकारी प्रयोगशालाओं द्वारा होती है । डेंगू महामारी के बारे में आसियान देशों में जागरुकता फैलाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन आसियान के सदस्य देशों के साथ मिलकर प्रतिवर्ष 14 जून को आसियान डेंगू दिवस के रूप में मानता है।उष्णकटिबंधीय बीमारियों के विशेषज्ञ डॉ स्कॉट हैलस्टीड का मानना है कि भारत में हर वर्ष अनुमानतः लगभग तीन करोड़ सत्तर लाख लोग इस डेंगू फैलाने वाले वाइरस से संक्रमित होते हैं जिनमें से तकरीबन मात्र 2 लाख 27 हज़ार 500 लोग ही इलाज़ करने के लिए अस्पतालों में भर्ती होते हैं। आंकड़ों को कम करके प्रस्तुत किए जाने की प्रवृत्ति से  डेंगू की विकरालता  का वास्तविक स्तर समझ पाने में समस्या आती है जिससे  इससे निपटने के लिए जिस स्तर की व्यापक तैयारी की जानी चाहिए वह नहीं होती  नतीजा डेंगू से होने वाली मौतों में वृद्धि। भारत मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली इस घातक बीमारी का केंद्र बनता जा रहा है। स्वास्थ्य प्रबंधन के अभाव में इसने खतरनाक  रूप धर लिया है और पिछले  कुछ वर्षों में डेंगू बच्चों में बीमारी और उनकी असमय मृत्यु का एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है। 1970 से पूर्व केवल 9 देशों ने डेंगू को महामारी के रूप में झेला था। परंतु 21 वीं सदी के पहले दशक तक आते आते तकरीबन 100 देशों में इस बीमारी ने अपने पाँव पसार लिए हैं। आंकड़ो भारत में डेंगू के फैलाव की कहानी खुद कह रहे हैं| इस वर्ष तीस सितम्बर तक पूरे देश में डेंगू से अब तक 109 मौतें दर्ज़ की गई हैं जबकि 38,000 से ज्यादा मामले दर्ज किये गए | भारत में हर साल डेंगू और उसके कारण मृत्यु की संख्या बढ़ती जा रही है स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस साल डेंगू से दक्षिण भारत  के राज्य  सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। केरल में डेंगू के 7,000 मामले और 23 मौतेंआंध्र प्रदेश में 5,680 से ज्यादा मामले और 12 मौतेंउड़ीसा में 5,012 मामले और पांच मौतें और तमिलनाडु में 4, 294 मामले दर्ज़ किए गएयहां किसी की डेंगू से मौत नहीं हुई गुजरात और महाराष्ट्र में भी डेंगू के क्रमश: 2,600 से ज्यादा मामले मौतें दर्ज़ किये गये । स्वास्थ्य जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर व्यवस्था ना होने के कारण डेंगू भारत जैसे तमाम अल्पविकसित देशों के लिए एक ऐसी स्वास्थ्य  चुनौती बनता जा रहा है|जिस पर अगर ध्यान न दिया गया तो नतीजे भयावह होंगें|  जरुरत जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेंगू सामन्यतः शहरी गरीब इलाकों, उपनगरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों को अधिक प्रभावित करता है पर  उष्ण कटिबबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय देशों के समृद्ध क्षेत्रों में भी इसका काफी प्रभाव पड़ता है। पिछले 50 वर्षों में डेंगू के मामलों में 30 गुना इजाफा हुआ है और प्रतिवर्ष 5 से 10 करोड़ लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं।तस्वीर का एक और रुख लोगों के नजरिये और साफ़ सफाई के प्रति जागरूकता का न होना भी है डेंगू जैसी बीमारियाँ तब फैलती हैं जब हम अपने आस पास की जगहों की पर्याप्त सफाई नहीं करते और जलभराव को होने देते हैं|भारत में कूड़ा प्रबंधन जैसी अवधारणायें अभी कागज़ में ही हैं व्यवहार में कुछ ठोस नहीं हुआ है|हमारे महानगर पर्याप्त रूप से गंदे हैं और इसके लिए सबको प्रयास करना होगा|डेंगू का कोई इलाज़ नहीं है। सुरक्षा एवं सावधानी ही इससे निपटने का एकमात्र रास्ता है यही है की इन्हें फैलाने वाले मच्छरों को न पनपने दिया जाये। ठोस कूड़े का सही से निस्तारण, पानी के भंडारण की उचित व्यवस्था तथा पानी को जमा होने से रोकना ही वह प्रमुख कदम हैं जिनके द्वारा हम डेंगू फैलाने वाले मच्छरों को फैलने से रोक सकते हैं।
 अमर उजाला में 23/10/13 को प्रकाशित 

4 comments:

HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन भैरोंसिंह शेखावत, आर. के. लक्ष्मण और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन भैरोंसिंह शेखावत, आर. के. लक्ष्मण और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

नीलिमा शर्मा said...

अच्छी जानकारी

deepanker sharma said...

सर इस लेख को पढने के बाद मै अब डेंगू से सचेत हो गया हु|सर धन्यवाद जो आपने डेंगू के बारे में इतनी अच्छी जानकारी दी |

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