Friday, October 25, 2013

बुराई के बिना अच्छाई का क्या वजूद

दीपावली आ रही है पर मैं आप को याद क्यूँ दिला रहा हूँ,आप की समझदारी पर मुझे हमेशा भरोसा रहा है.हम तो आपको कुछ और याद दिला रहे हैं अच्छा ये तो आप सब जानते हैं कि दीपावली रात का त्यौहार है पर जरा गौर करिये हम जब दीपावली के बारे में किसी से पूछते हैं तो क्या कहते हैं अरे दीपावली किस दिन है. ट्विस्ट कहानी में यहीं है जब रात का त्यौहार है तो दिन की बात क्यूँ ? तो दीपावली के बहाने ही सही  मैंने जरा सा रात के बारे में सोचा तो न जाने क्या क्या याद आया, वैसे याद से कुछ आपको याद आया क्या ?भाई याद का सीधा कनेक्शन रात से है.जब आप मन से अकेले होते हैं तो कितना कुछ याद आता है. रात के सन्नाटे में मन के किसी कोने से कितनी यादें निकल पड़ती हैं. रात अपने आप में एक फीलिंग है सुबह का इंतज़ार करते हुए रात काटना और बात है लेकिन रात को जीते हुए रात काटना बिल्कुल अलग मामला  है. हमारे जीवन में रात और दिन की सेम इम्पोर्टेंस है पर जब भी हम लाईफ की बात करते हैं तो बात सिर्फ दिन की होती है.फेसबुक हम सब की जिंदगी का हिस्सा है तो आपने ऐसे कई लोगों की प्रोफाईल को देखा होगा जिनके हजारों मैं फॉलोवर्स हैं और मन मैं कसक उठी होगी कि काश हमारी प्रोफाईल मैं भी कुछ ऐसा मामला होता पर जो लोग आगे बढते हैं उसमें उनकी मेहनत और डेडीकेशन के अलावा उनके बहुत सारे फौलोवार्स का भी कंट्रीब्यूशन होता है.बात समझे दिन इसलिए दिन है क्यूंकि रात है.सिंपल समझिए वो फेमस  लोग जो दिन की तरह चमकते हैं उनके पीछे हमारे जैसे कई फालोवर रात की तरह होते हैं. सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर लोगों के फौलोवर्स बनने की बजाय कुछ ऐसा करें कि लोग आपको फोलो करें.मैं बात को थोडा और सिंपल करता हूँ जब हम काले रंग के बारे में जानेगे तभी तो ये जान पायेंगे कि कौन कितना गोरा है.यानि इस जीवन में सबकी अपनी अपनी युटिलिटी है और कोई भी वेस्ट नहीं है.मैंने कहीं पढ़ा था बुराई कि सबसे बड़ी अच्छाई ये है कि वो बुराई है तो अगर कोई आगे बढ़ रहा है और आप उस जगह नहीं पहुँच पा रहें तो फ्रस्टेट न हों,अपने आप को पहचाने हो सकता हो आप उस काम के लिए बने न हों और वो काम करें जिसके लिए आप बने हों. जैसे रात, दिन नहीं हो सकती और दिन, रात नहीं. भाई इस फेस्टिव सीजन में मैं अपनी बात को फेस्टिवल के थ्रू ही कहूँगा तब शायद आप मुझे समझें तो मामला यूँ है कि आप होली में  पटाखे छुडाएं तो लोग आपको क्या कहेंगे पागल तो कोई भी काम शुरू करते जोश के साथ होश का भी इस्तेमाल करें महज इसलिए कि आजकल इसका बड़ा क्रेज है ,इसमें पैसा बहुत है जैसी बातों को ध्यान में रखकर कोई काम मत शुरू कर दीजिए. जिस तरह सारे दिन एक जैसे नहीं होते हैं और उसी तरह से सारी रातें भी एक जैसी नहीं होती हैं किसी रात आप अपने किसी अज़ीज़ दोस्त की पार्टी में नाच गा रहे होतें तो किसी रात आप बिस्तर पर स्ट्रेस के कारण जगते हुए काट देते हैं और किसी रात आप ऐसा खूबसूरत सपना देखते हैं कि सुबह होने ही नहीं देना चाहते हैं.सबसे इम्पोर्टेंट हमारी जिंदगी में बहुत सारे ऐसे लोग है जिनका हमारी सफलता में योगदान होता है तो उनको भी नहीं भूलना चाहिए याद है न रात है तभी तो दिन है,तो दीपावली आपने हर साल मनाई होगी इस साल दीपावली की रात अपने उन दोस्तों के साथ मनाई जाए जो आपकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकते हैं. अब तो आप मान ही लीजिए कि दीपावली तभी तक प्रकाश का त्यौहार है जब तक इस धरती पर अँधेरा है क्यूंकि कोई दिन में कोई पटाखे नहीं फोड़ता तो कैसा लगा आपको दीपावली का रात कनेक्शन
आई नेक्स्ट में 25/10/14 को प्रकाशित 

2 comments:

deepanker sharma said...

सर जैसा की आपने लिखा है हमें वही कार्य करना चाहिए जिसके लिए हम बने हो, मगर सर ये भी कहा जाता है की कोई भी कार्य मुश्किल नहीं होता है ,अगर सच्ची लगन और मेहनत से काम करे तो उसमे हमे सफलता जरुर मिलती है| सर जैसे की हम लोग प्रतियोगी परीक्षाये देते है तो हमारी प्राथमिकता तो यही रहती है बस किसी भी तरह नौकरी लग जाय और नौकरी लग जाने के बाद हमे अंको के आधार पे विभाग दे दिए जाते है तो क्या विभाग देने वालो को पता होता है की व्यक्ति इसी सेवा के लिए बना है या वे अंको के आधार पे निष्कर्ष निकाल लेते है |

MANOVIKA SONI said...

बहुत अच्छा लगा ....मज़ा आ गया कुछ अलग तरह से दिवाली को जानने का मौका मिला |

पसंद आया हो तो