Tuesday, June 27, 2017

सिक्किम यात्रा ;चौथा भाग

बादल पर पाँव है 
हम लोगों को नामची जाना था यह तो पता था पर वहां है क्या इसकी जानकारी किसी को भी ठीक ठाक नहीं थी |छान्गू झील के कार्यक्रम में परिवर्तन होने के कारण यह वैकल्पिक व्यवस्था थी खैर मुझे इससे मतलब नहीं था कि वहां क्या होगा मैं तो देश के पूर्वोत्तर भाग के इस हिस्से की हरियाली को अपनी आँखों में भर लेना चाहता था ये बात अलग है कि सावन का महीना दूर था |तिस्ता एक बार फिर हमारा साथ दे रही थी |बीच बीच में बारिश हो रही थी सूरज का नामोनिशान नहीं था |रास्ते बादलों से भरे हुए थे |हमारी गाडी जब उनके बीच से गुजरती थी तो एक ठंडा सा अहसास होता है |प्रार्थना झंडियों से भरे रास्ते हमें याद दिला रहे थे यहाँ प्रकृति से बड़ा कोई नहीं है |
सड़क किनारे लगी प्रार्थना झंडियाँ 
रंग बिरंगी प्रार्थना झंडियाँ जहाँ पूजा की प्रतीक थीं वहीं सफ़ेद झंडियाँ शोक और म्रत्यु का |सच है पहाड़ लोगों को धीरज धरना सिखा देते हैं तभी शायद देश के इस हिस्से में सब कुछ शांत थमा है सब अपनी बारी का इन्तजार करना जानते हैं किसी को किसी से आगे जाने की कोई जल्दी नहीं है वो चाहे गाड़ियाँ हों या इंसान, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की तरह बात –बात में प्रतिक्रिया नहीं देते शायद उनको मालूम है जन्नत की हकीकत |मैं शान्ति से सडक पर गाड़ियों का अनुशासन देख रहा था सामने वाली गाडी को पास देना ,उस पहाडी मोड़ पर जब दो गाड़ियाँ अगल –बगल होती हैं दोनों ड्राइवरों का हँसते मुस्कुराते हुए हाल चाल लेना बता रहा था ये देश का वह हिस्सा नहीं है जहाँ मैं रहता हूँ हाँ यह देश का वह हिस्सा जरुर है जहाँ कोई भी शांति से जीना चाहेगा बगैर किसी को हराए हुए जीतना चाहेगा |पहाड़ आपको जीना सिखा देते हैं मैं सोच रहा था वैसे भी जब आपके हाथ में कुछ न हो तो आप अपने आप धीरज धरना सीख जाते हैं यहाँ के निवासियों को यह भ्रम नहीं है कि वे शक्तिशाली है यहाँ कोई शक्तिशाली है तो वह सिर्फ और सिर्फ प्रकृति है |रास्ता कहीं अच्छा और कहीं बहुत खराब है जगह –जगह सडक बनाने का काम चल रहा था |तीन घंटे की यात्रा के बाद हम नामची पहुंचे |
सर्वेश्वर धाम परिसर 
नामची इलाका गंगटोक की तरह विकसित और साफ़ सुथरा था उसके तीन किलोमीटर के बाद हमारी मंजिल थी जिसके बारे में हमें सिर्फ इतना पता था कि कोई पूजा स्थल है पर वह किस धर्म का है हमें नहीं पता था |गाडी पार्किंग में लगी हमें ड्राइवर ने कहा आप लोग सामने चले जाइए कुछ सीढियां चढ़ कर हम एक विशाल परिसर में पहुंचे पर अभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा  था |सुरक्षा जांच के बाद आगे बढे एक आदमकद भगवान शिव की प्रतिमा दिखी मन में एक निराशा सी आयी मतलब एक मंदिर जिसका कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं है ये दिखाने इतनी दूर लाये |

प्रकृति का साथ 
मंदिर तो हमारे इलाके में बहुत से हैं इसी उधेड़बुन में उस सुरक्षा जांच के क्षेत्र से बाहर निकले जहाँ भगवान शिव की वह मूर्ति लगी हुई थी, पर अब जो हमारे साथ होने वाला था वो न भूतो न भविष्यति वाला मामला था हम जैसे ही बाहर निकले तो लगा जैसे हमारे सारे भ्रम दूर किये जा रहे हैं कोई पर्दा खुल रहा हो दूर एक विशाल शिव जी की मूर्ति दिखी |इतनी विशाल हिन्दू देवता की मूर्ति मैंने अभी तक नहीं देखी थी हाँ बुद्ध जी की विशाल प्रतिमाएं मैंने खूब देखी थी |मैं एकटक उसको देखते हुए आगे बढ़ रहा हूँ मूर्ति  के चारों ओर मंदिर ही मंदिर रामेश्वर का भी मंदिर भी वहां दिख रहा था पर मैं तो सिक्किम में हूँ यहाँ कैसे यह मंदिर ?
एक सौ आठ फीट ऊँची मूर्ति सर्वेश्वर धाम 
सवाल ही सवाल जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था धरती का कैनवास बड़ा होता जा रहा था |सबसे पहले मैं अपने सारे सवालों का जवाब चाहता था पर मेरी पत्नी दर्शन करना चाहती थी पर उसी वक्त उस परिसर के समस्त मंदिरों के आधे घंटे के लिए बंद होने का समय हो चुका था इसलिए मेरे पास अपने सारे सवालों का जवाब पाने का मौका था |मैंने एक गार्ड को भरोसे में लिया और उससे कुछ पता किया शोफोलोक पहाडी पर बने इस विशाल मंदिर की आधारशिला साल 2005 में रखी गयी और साल 2013 में इसे लोगों के लिए खोल दिया गया जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने किया |शिव जी की मूर्ति की उंचाई एक सौ आठ फीट है और यहाँ देश के बारह ज्योतिर्लिंग और चार धाम के सभी मंदिरों की प्रतिकृति बनाई गयी है मकसद इतना है जो लोग अपने जीवन में इन मंदिरों में न जा पायें वे यहाँ आकर उनके दर्शनों का लाभ उठा सकें |हमें लग ही नहीं रहा था कि हम किसी  मंदिर परिसर  में है चारों ओर शांति पहाड़ बादल भीड़ के नाम पर लोगों के कुछ झुण्ड और कुछ भी नहीं ,किसी तरह के पंडों का कोई आतंक नहीं हमने शान्ति से उस पूरे परिसर का जायजा लिया |
सर्वेश्वर धाम की यह फोटो गूगल के सौजन्य से 
मैंने न तो चार धाम देखें हैं न ही बारह ज्योतिर्लिंग इसलिए मेरे लिए एक विजुअल ट्रीट जैसा मामला हो गया |प्रतिक्रतियां  इतनी शानदार है कि आप धोखा खा सकते हैं कि  ये असल है या नकल वैसे भी सिक्किम में बौद्ध धर्म ज्यादा प्रचलित है इसलिए मोनेस्ट्री के प्रदेश में इतना शानदार मंदिर मन को लुभा रहा था जहाँ  धर्म के नाम पर कोई लूट नहीं थी जहाँ प्रसाद के दुकानों की भरमार नहीं थी जो आपसे कुछ खरीदने के लिए कह रही हों |इस परिसर में बैठकर प्रकृति से एकाकार हो सकते हैं कहने को यह धार्मिक स्थल था पर माहौल किसी पर्यटक स्थल जैसा था जगह –जगह लोग सेल्फी लेने में व्यस्त थे पर एक सीमा  रेखा  जरुर थी पर्यटक स्थल वाली उच्चश्रृंखलता नहीं थी |मंदिर में घूमते –घूमते दो घंटे बीत चुके थे इसलिए अब बारी पेट पूजा की थी |मंदिर परिसर में एक विशाल कैंटीन है जहाँ खाने पीने का सारा सामान बाजार भाव से महंगा उपलब्ध है आप यहाँ बाहर से खाने पीने का कोई सामान नहीं ला सकते हैं जो लेना है यहीं से खरीदीये |
साईं मन्दिर 
आज का दिन धर्म के नाम रहने वाला था इसके बाद मुझे बताया गया हम एक और मंदिर जायेंगे जो साईं बाबा का मंदिर है |मेरे मन में जिज्ञासा थी देश के इस हिस्से में भी साईं बाबा की पूजा कैसे होती होगी और यह जिज्ञासा मुझे इस मंदिर की ओर ले गयी ,यहाँ के साईं बाबा मंदिर की ख़ास बात यह थी कि यह मंदिर दो मंजिल का था नीचे के परिसर में शिर्डी के साई बाबा की मूर्ति थी तो ऊपर वाले परिसर में सत्य साईं बाबा की मूर्ति लगी थी और उसी मंदिर परिसर में भगवान शिव की भी पूजा हो रही थी |सिक्किम में मेरा एक और दिन समाप्त हो रहा था |
जारी..................................

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