Tuesday, March 13, 2018

टेलीविजन को पछाड़ता इंटरनेट

अब एक आम भारतीय के दिन की शुरुआत सुबह चाय पीते हुए अखबार पढने की बजाय इंटरनेट पर वीडियो देखने से होती है |मोबाईल एडवरटाइजिंग फर्म इनमोबी के एक शोध के मुताबिक़ एक औसत भारतीय सबसे ज्यादा वीडियो सुबह साढ़े छ से साढ़े नौ के बीच सबसे ज्यादा इंटरनेट पर वीडियो देखते हैं और सप्ताहांत में यह उपभोग सबसे चरम पर होता है एक जन माध्यम के रूप में टेलीविजन अब ज्यादा खतरे में है जबकि उसे समाचार पत्रों के मुकाबले ज्यादा मज़बूत माध्यम माना जाता रहा है वह भी तब जब वीडियो की लोकप्रियता अपने चरम पर है |
पिछले कुछ वर्षों  में मोबाईल वीडियो उपभोग बहुत तेजी से बढ़ा है और यह आंकड़ा 2017 में 2016 के मुकाबले दुगुना हो गया है जिसका बड़ा कारण सस्ते स्मार्टफोन और किफायती  इंटरनेट डाटा प्लान है |इनमोबी,ई मार्केटियरकॉम स्कोर और एम् एम् ए रिसर्च का संयुक्त शोध यह बताता है कि एक भारतीय औसतन साढ़े चार घंटे अपने स्मार्टफोन पर इंटरनेट एक्सेस करने में बिताता है जो उसके कुल माध्यम उपभोग का सैंतीस प्रतिशत है जो उसके टीवी देखने के समय से ज्यादा है इसी रिपोर्ट के अनुसार देश 2021 में कुल इंटरनेट डाटा उपभोग का दो तिहाई हिस्सा वीडियो पर खर्च किया जाएगा |भारतीय अपने स्मार्ट फोन का ज्यादा इस्तेमाल बात करने या सन्देश भेजने की बजाय इंटरनेट खंगालने में बिता रहे हैं जिसमें विभिन्न एप का इस्तेमाल शामिल है |एप इस्तेमाल में सबसे ज्यादा समय क्रमश: ई शॉपिंग ,यात्रा और तकनीक जैसी श्रेणियों में है |साल 2017 में विभिन्न एप डाउनलोड करने के मुकाबले में भारत का स्थान तीसरा रहा है जो कुल एप डाउनलोड का बारह प्रतिशत हिस्सा था |
उल्लेखनीय है कि साल 2017 में ही भारत इंटरनेट डाटा उपभोग के मामले में अमेरिका और चीन को पिछाड कर दुनिया में पहले नम्बर पर आ चुका है |  एरिक्सन मोबिलीटी रिपोर्ट के अनुसार देश में डाटा की खपत किस तेजी  से बढ़ रही है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की अभी  लोग हर माह औसतन 3.9 जी बी इंटरनेट डाटा की खपत कर रहे हैंजो साल 2023 में 18 जीबी तक पहुँच जाएगा  जबकि  साल 2014 में  यह आंकड़ा  मात्र 70 एम् बी प्रति माह  थायह बढ़ोत्तरी साल 2014 के मुकाबले 360 प्रतिशत ज्यादा होगी |
एक माध्यम के रूप में वीडियो की बढ़त देश में ज्यादा इंटरनेट डाटा उपभोग के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है |भारत जैसे देश में जहाँ अभी भी निरक्षरों की एक बड़ी संख्या है वहां वीडियो उनको मोबाईल इंटरनेट से जोड़ने का सबसे सुलभ विकल्प है |वो चाहे मनोरंजन का मामला हो या सूचनाओं का इसी कड़ी में शिक्षा भी शामिल  है जहाँ वीडियो का जादू सर चढ़कर बोल रहा है |मनोरंजन और सूचना के लिए वीडियो के हजारों विकल्प मौजूद हैं और ये हर बीतते दिन के साथ बढ़ते ही जा रहे हैं पर शिक्षा के क्षेत्र में बाईजू एप की सफलता भी यह बताती है लोगों को सीखाने के लिए वीडियो माध्यम से बेहतर विकल्प अभी हमारे सामने नहीं है |मोबाईल वीडियो की सफलता और टेलीविजन के एक माध्यम के रूप में पिछड़ने का बड़ा कारण कार्यक्रमों की विविधता है |
मोबाईल वीडियो उपभोक्ता की रुचियों के हिसाब से पर्संलाईज्ड कंटेंट उपलब्ध कराता है जबकि टेलीविजन अपनी लीक को तोड़ने के लिए नहीं तैयार है वो चाहे सूचना के क्षेत्र हो  जहाँ अब  टेलीविजन ख़बरें -परिचर्चा  बासी और उबाऊ हो चली हैं क्योंकि वो गति के मुकाबले में  इंटरनेट से मुकाबला नहीं कर पा रही हैं और कंटेंट के स्तर पर हमारी जानकरियों में कुछ नया नहीं जोड़ पा रही हैं वैसा ही हाल मनोरंजन के क्षेत्र में टीवी धारावाहिकों का भी है पर इंटरनेट धारावाहिक नवोन्मेष और नवाचारों से भरे हुए हैं |
टीवी ने शिक्षा के क्षेत्र में तो पाँव ही नहीं पसारे जो कुछ हुआ भी वो सरकारी टेलीविजन चैनलों में जो खासे नीरस और अपना प्रभाव छोड़ने में असफल साबित हुए पर यू ट्यूब ऐसे किसी भी मुद्दे पर आपको लाखों वीडियो का विकल्प देता है जिस मुद्दे पर आप कुछ सीखना या समझना चाहते हैं |वीडियो की ये सफलता में कुछ सवाल हैं जिनके जवाब अभी ढूंढे जाने हैं |टीवी एक व्यवस्थित माध्यम है जबकि इंटरनेट वीडियो को अभी व्यवस्थित होना है |लाभ  के लिए अभी भी विज्ञापन एक बड़ा स्रोत है हालाँकि अमेजन प्राईम और नेटफ्लिक्स के सब्सक्रिप्शन प्लान की सफलता ने इस मिथक को तोडा है कि लोग माध्यमों पर पैसा नहीं खर्च करना चाहते हैं पर अभी यह काफी शुरुआती  अवस्था में है |
अमर उजाला में 13/03/18 को प्रकाशित 

3 comments:

RADHA TIWARI said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (14-03-2018) को "ढल गयी है उमर" (चर्चा अंक-2909) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

RADHA TIWARI said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (14-03-2018) को "ढल गयी है उमर" (चर्चा अंक-2909) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

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