Wednesday, October 24, 2018

फिर छिड़ी रात बात फूलों की

मुझे बचपन से ही फूल-पत्तियों पर गिरी ओस बहुत अच्छी लगती है और इस दृश्य को देखने और महसूस करने का सबसे अच्छा मौसम है जाड़ा. फूल अपने आप में इस दुनिया की सबसे खूबसूरत कृतियों में से एक है. प्रकृति के इस अनोखे रूप को गीतकारों ने अपने-अपने तरीके से महसूस किया है. जैसे- 'फिर छिड़ी रात बात फूलों की, रात है या बारात फूलों की...' 
फूल न होते, तो दुनिया इतनी रंगीन नहीं होती. जितने कोमल फूल होते हैं, उतनी ही कोमल होती हैं हमारी भावनाएं. अब ये देखिये, एक भाई अपनी बहन के लिए प्यार जताने के लिए क्या गा रहा है- 'फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है...'
           फूलों से हमारा बहुत गहरा रिश्ता है. हमारे पैदा होने से लेकर मरने तक, हर खुशी हर गम में फूल हमारा साथ देते हैं. इस सीख के साथ जिंदगी कैसी भी हो, खूबसूरत तो है न! खुशबू दिखती नहीं, पर महसूस की जा सकती है. उसी तरह जिंदगी में खुशियां हर मोड़ पर बिखरी हैं, पर क्या हम उन खुशियों को खोजना जानते हैं? फूल कोमलता, शांति और प्यार का प्रतीक होते है. जहां प्यार, शांति का जिक्र होगा, वहां फूलों का जिक्र होना लाजिमी है. फिर हम भी तो यही चाहते हैं न कि एक ऐसी दुनिया हो, जहां चारों ओर शांति हो, प्यार हो. 
जब फूल खिलते हैं, तो दिल भी खिल जाता है. जब फूलों की बात चली है, तो गुलाब का जिक्र होगा ही. गुलाब को फूलों का राजा यूं ही तो नहीं कहा जाता और गानों में सबसे ज्यादा इसी फूल का जिक्र हुआ है. लाल गुलाब जहां प्यार का प्रतीक है, वहीं सफेद गुलाब मैत्री और शांति का.
         बचपन की शरारतों के बाद जब हम जवान होते हैं, तो हमारे मन में कुछ सपने पलने लगते हैं, कुछ उम्मीदें जागने लगती हैं, इन्हीं सपनों-उम्मीदों में एक सपना अपने घर का भी होता है और घर जब फूलों के शहर में हो, तो क्या कहना- 'देखो मैंने देखा है एक सपना, फूलों के शहर में है घर अपना...' पर अगर आपको सपने में फूल ही फूल दिखें, तो ऐसे ख्वाब को क्या कहेंगे? चलिये मैं आपको गाना ही बता देता हूं- 'देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए, दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए...' 
         अगर आप फूल की कोमलता का सम्मान नहीं करेंगे, तो यह अंगारा भी बन सकता है- 'फूल कभी जब बन जाये अंगारा...' जिंदगी में हर चीज की अपनी अहमियत होती है और यह बात रिश्तों पर भी लागू होती है. फूल को बढ़ने के लिए खाद-पानी की जरूरत होती है. तो रिश्तों को अपनेपन के एहसास की जरूरत होती है. जाड़ों में गर्मी का एहसास करने के लिए गर्म कपड़े पहनने के अलावा कुछ फूल भी लगायें. नये रिश्ते बनायें और पुराने रिश्तों पर जम गयी गर्द को झाड़ें, क्योंकि रिश्ते भी फूलों की तरह नाजुक होते हैं.
जाड़े का स्वागत अगर महकते हुए और महकाते हुए किया जाये, तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है भला.
प्रभात खबर में 24/10/18 को प्रकाशित 

2 comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पोलियो दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Anonymous said...

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