Tuesday, August 13, 2013

क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता

अच्छा भाई लोगों ये बताया जाए की फेसबुक पर आप किस की फोटो ज्यादा लाईक करते हैं लड़के की या लडकी की अरे दिमाग मत लगाइए मैं कोई जेंडर का मसला नहीं उठाने जा रहा हूँ तो टेल पर इस बात का ध्यान रहे ये पब्लिक फॉर्म है सब आपके दिल की बात जान जायेंगे अरे कह दीजिये न लड़कियों की उफ़ नहीं मानेंगे न शर्माने की क्या बात है आप जानते हैं ये पब्लिक फोरम है तो थोडा स्मार्ट बन लिया जाए और हल्का सा झूठ बोल दिया जाए नहीं,नहीं मैं लड़कियों की फोटो नहीं ज्यादा लाईक करता प्रोफाईल पिक देख कर फ्रैंड रिक्वेस्ट नहीं भेजता,झूठ आप बोल रहे हैं या मैं इसका फैसला बाद में लेकिन  मोबाईल फोन और इंटरनेट  हमारे जीवन में बहुत सी सहूलियतें लाया है पर आप माने न माने मोबाईल ने हमें झूठ बोलना भी खूब सिखा दिया है लेकिन ये मुआ इंटरनेट भी न कुछ भी सीक्रेट रहने नहीं देता. हमारे दिमाग में क्या चल रहा है वो सबको बता देता है पर हम हैं कि फिर भी बाज नहीं आते झूठ बोलने से. झूठ बोलना एक कला है जो सदियों से चली आ रही है जिसका एक रूप बहाना बनाना भी है.वो दौर गया कि आप बीमार होने का बहाना बना कर दिन भर मजा करें पर आज बीमार होने का स्टेटस डालकर दिनभर लोगों से सिम्पैथी बटोरते हुए कमेन्ट का जवाब दे रहे हैं तो लोग आपका झूठ पकड़ लेंगे की आप कितने बीमार हैं. हम दूसरों से झूठ बोलने के साथ कब अपने आप से झूठ बोलना शुरू कर देते हैं ये हमे जब तक समझ में आता है जिन्दगी आगे बढ़ चली होती है और हम हाथ मलते टाईप की हरकत करते रह जाते हैं.मैं आपको प्रवचन नहीं दूंगा कि झूठ बोलना पाप है पर जब आप अपने आप से झूठ नहीं बोलेंगे तो किसी से भी नहीं बोलेंगे तो झूठ बोलने के बहाने आप अपने आप से झूठ बोलने की शुरुवात कर रहे होते हैं.मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता हूँ जो जिन्दगी में आगे बढ़ना चाहते हैं नाम कमाना चाहते हैं पर अपने आप से झूठ बोलते हैं और जब काम नहीं कर पाते तो फिर एक बहाना तैयार अगर ऐसा होता तो काम हो जाता, कोई मुझे समझता नहीं,जो आप समझ रहे हैं वैसा कुछ नहीं है वगैरह वगैरह पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें जी हाँ आप माने या न माने नॉलेज सोसाइटी के इस युग में कोई ज्ञान लेना नहीं चाहता स्कूल और कॉलेज में इतना कुछ बताया जा रहा है और जो नहीं बताया जा रहा है वो सब गूगल पर है. जो कहीं नहीं बताया,सिखाया  जा रहा है वो है झूठ बोलना,फिर भी हम सीख जाते हैं.अब यूँ की मैं इस बहस में नहीं पडूंगा की कब झूठ बोलना,बहाने बनाना  ठीक है कब नहीं क्यूंकि सब स्मार्ट हैं पर झूठ तो झूठ ही न कहें यूँ होता तो क्या होता पर जिन्दगी जीने की कोई शर्तें नहीं होती आप अपना बेस्ट दीजिये और जिन्दगी आपके हिसाब से आपको बेस्ट देगी पर होता ये है कि झूठ बोलते बोलते हम अपने आप को भी बेवकूफ बनाते रहते हैं हमारे एक मित्र हैं उन्हें चैटिंग करने में बहुत मजा आता है मैंने उनसे पूछा की दिन भर चैटिंग करते हो तो काम कब करते हो बोले वो तो मैं कर लेता हूँ और वो कौन से लोग हैं जो दिन भर खाली रहते हैं जो आप से बतियाते हैं वो नाराज हो गये बोले आपका दिमाग खुराफाती है.जाहिर वो अपने आप से झूठ बोल रहे हैं. एक वक्त में एक ही काम अच्छा हो सकता है जब आप अपने करियर के शुरुवाती दौर में हो तो चैटिंग आपको आपके काम से डीस्ट्रेक्ट करती है. काम जरुर आप कर लेंगे चैटिंग के साथ, पर वो उतना अच्छा नहीं होगा.तो आज के लिए इतना ही सीधी बात नो बकवास हाथ मलने रह जाने से बेहतर है अपनी जिन्दगी पर जम रही झूठ की मैल को साफ़ करते रहा जाए वो भी डायरेक्ट दिल से.तो अब बताइए झूठ कौन बोल रहा है आप या मैं 
आई नेक्स्ट में 13/08/13 को प्रकाशित  

2 comments:

Bhawna Tewari said...

hum bhi jhoot nai bolte sir... achcha hai

Dr. Mukul Srivastava said...

शुक्रिया भावना

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