प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और कोई भी समस्या अपने साथ कई अन्य तरह की चुनौतियाँ भी लाती है ग्रीन पीस संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल वायु प्रदुषण से बाढ़ लाख लोग अकाल मृत्यु का शिकार हो जाते हैं पिछले दो दशकों से जबसे देश वैश्वीकरण की राह चला है देश की हवा लगातार रोगी होती जा रही है |पेट्रोल डीजल और अन्य कार्बन जनित उत्पाद जिसमें कोयला भी शामिल है |तीसरी दुनिया के देश जिसमें भारत भी शामिल है प्रदूषण के मोर्चे पर दोहरी लड़ाई लड़ रहे हैं | पेट्रोल डीजल और कोयला ऊर्जा के मुख्य श्रोत हैं अगर देश के विकास को गति देनी है तो आधारभूत अवस्थापना में निवेश करना ही पड़ेगा और इसमें बड़े पैमाने पर निर्माण भी शामिल है निर्माण के लिए ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पेट्रोल डीजल और कोयला आसान विकल्प पड़ता है दूसरी और निर्माण कार्य के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान और पक्के निर्माण भी किये जाते हैं जिससे पेट्रोल डीजल और कोयला के जलने से निकला धुंवा वातावरण को प्रदूषित करता है | ऊर्जा के अन्य गैर परम्परा गत विकल्पों में सौर उर्जा और परमाणु ऊर्जा महंगी है और इनके इस्तेमाल में भारत काफी पीछे है |
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत में काफी अंतर है। उदाहरण के लिए पचहतर प्रतिशत ग्रामीण परिवार रसोई के ईंधन के लिए लकड़ी पर, दस प्रतिशत गोबर की उपालियों पर और लगभग पांच प्रतिशत रसोई गैस पर निर्भर हैं। जबकि इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए बाईस प्रतिशत परिवार लकड़ी पर, अन्य बाईस प्रतिशत केरोसिन पर तथा लगभग चौवालीस प्रतिशत परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं। घर में प्रकाश के लिए पचास प्रतिशत ग्रामीण परिवार केरोसिन पर तथा अन्य अडतालीस प्रतिशत बिजली पर निर्भर हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी कार्य के लिए नवासी प्रतिशत परिवार बिजली पर तथा अन्य दस प्रतिशत परिवार केरोसिन पर निर्भर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले लगभग अस्सी प्रतिशत ऊर्जा बायोमास से उत्पन्न होता है। इससे गाँव में पहले से बिगड़ रही वनस्पति की स्थिति पर और दबाव बढ़ता जा रहा है। भारत की हवा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सर्कार सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है पर उनपर भी प्रदूषण का असर पड़ रहा है एनवायरमेंटल साईंस एंड टेक्नोलॉजी लेटर्स जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के प्रदूषित वायुमंडल के कारण सौर ऊर्जा का सत्रह प्रतिशत नुक्सान हो रहा है जिससे करीब 776 मेगावाट बिजली बनाई जा सकती थी |भारत के सन्दर्भ में प्रदुषण से सौर ऊर्जा को होने वाले नुक्सान की यह अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है जो हमें चेता रही है कि अगर हमारा विकास का मॉडल समावेशी नहीं होगा तो ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत भी सफल न हो पायेंगे |
अमर उजाला में 23/08/17 को प्रकाशित





