Saturday, May 23, 2015

तुम अच्छे से होगे

तुम अच्छे से होगे जानता हूँ
अपना ख्याल रख रहे होगे जानता हूँ 
जिंदगी आगे बढ़ चली होगी जानता हूँ 
सच क्या था और झूठ क्या है 
जानते होगे जानता हूँ 
कौन चुप रहकर भी बोला था जानता हूँ
और कौन बोलते हुए भी अनबोला था जानता हूँ
अब मैं, मैं नहीं और तुम ,तुम नहीं
जानता हूँ
मेरे संदेशे अब धडकनें नहीं बढाते होंगे
जानता हूँ
अब कभी नहीं आओगे ये कहने
मैं कभी नहीं जाउंगी
जानता हूँ
हमारा मिलना
बस इत्तेफाक था जानता हूँ
पर क्यूँ हुआ ऐसा
नहीं जानता हूँ
काश इतना पहले जान पाता
तो आज इतना नहीं जान पाता
पर कम से कम
अब ये जानता हूँ
तुम अच्छे से होगे ............

10 comments:

Garima's Archive said...

Lovely sir.... Awsum

akanksha gupta said...

Tm ache se hoge......well said lines sir

akanksha gupta said...

Heart touching lines...

arvind singh Yadav said...

Its really heart touching lines sir.... Bilkul mst hi..

meghna singh said...

The outstanding imagery in this poem is enhanced by your poetic choice of heavenly metaphors blended with the rhythm flowing from your heart. well composed sir

Sudhanshuthakur said...

दिल को छु लेने वाली कविता ।।

Suraj Verma said...

वाह सर। क्या बात है। बहुत दिनों बाद कोई कविता मैंने पढ़ा ,दिल मे समा गई।

Aastha Tiwari said...

जानते थे वो गुलेलों का निशाना हैं मगर,
खुश थे पंछी क्योंकि बैठे थे ठिकाना देखकर...

भावनाओं को शब्दों में पिरोने का हुनर जानते हैं सर आप...

बहुत अच्छी लेखिका नहीं हूँ मैं मगर... कभी जब अच्छी कविता पढ़ने को मिलती है... तो वो सुकून देती है...

asad khan said...

Ek choti si poem, lekin matlab itna gehra. Jis cheez ko padh ke connect kar le jao khudse. Wo alag hi jagah bana leti hai dil mei.

Sumbul Imran said...

This poem beautifully brings out the pain and the acceptance of the pain of two people who no longer are together.
What I really like about this poem is how the writer is not bitter, instead he reminisces the past, and still wishes the best for the other.

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