Tuesday, May 26, 2015

खोकर पाने का नाम जिंदगी

कभी कभी लिखना  कितना कुछ मुश्किल हो जाता है.अब मुझे ही देखिये कई  दिन से इस लेख के लिए विषय तलाश रहा हूं पर कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है.कभी कभी ऐसा होता है कि विचारों की भरमार होती है पर उस वक्त मैं उनको उतनी तवज्जो नहीं देता और फिर वे उड़ जाते हैं फिर कभी न आने के लिए और आज मुझे उनकी जरुरत है पर अब मैं उनको खो चुका हूं शायद याद करना इसी को कहते हैं.खोने पाने की इसी  उधेड़बुन में मुझे समझ में आया कि जिंदगी में पाने से ज्यादा खोना जरूरी है क्योंकि तब आप अपने आस पास की चीजों की ज्यादा कद्र करते हैं.अब देखिये न  हमारी जिंदगी में कितनी सारी चीजें  होती हैं पर हमें ज्यादा जरुरत  उन्हीं की होती है जो हमारे पास नहीं होती हैं.भाई यूँ ही तो किसी ने कह नहीं दिया था कि इफ यू रीच देयेर देयेर इज  नो देयेर,देयेर.यनि जब आप कोई चीज पा लेते हैं तो उसकी कद्र कम हो जाती है. आप समझ रहें न मैं क्या कहना चाह रहा हूं. जीवन में कुछ चीजों की कमी हो तो उनके प्रति हमारी ललक बनी रहती है.मैं एक उदाहरण से अपनी अपनी बात समझाता हूं .
बचपने में मुझे कहानियां पढ़ने का बड़ा शौक था वो भी परियों की मैं चाहता था कि काश कोई परी मेरे जीवन में भी हो जो मेरी सारी परेशानियों को दूर कर दे.धीरे –धीरे जब बड़ा हुआ तो यह समझ में आया कि परी जैसी कोई चीज तो होती ही नहीं अगर कोई परी मेरे जीवन में आ गई होती तो शायद किसी परी को पाने की चाह मेरे मन में है वो खत्म हो गई होती और मैं अपनी इस चाह का जिक्र यहां नहीं कर रहा होता.अब सोचिये जिंदगी के किसी मोड पर अगर मुझे कोई परी सही में मिल जायेगी तो मुझे कितनी खुशी मिलेगी,पर उस खुशी को महसूस करने के लिए मुझे उसकी कमी का एहसास होना भी जरूरी है.
जिंदगी में सब कुछ हमारे मन का नहीं होता पर जरा सोचिये कि यदि सब कुछ हमारे मन का हो रहा होता तो हम जिंदगी में कितनी खुशियों से महरूम होते.वैसे आप इतने न समझ तो हैं नहीं फिर भी मैं अपनी बात को और स्पष्ट करता हूं खुशी की पहचान वही कर सकता है जिसने दुःख झेला हो,जिंदगी की कद्र वही कर सकता है जिसने मौत को महसूस किया हो, किसी को पाने के एहसास को वही समझ सकता है जिसने जिंदगी में किसी को खोया हो. रोना ज़रूरी है उससे ज़्यादा जितना ज़रूरी होता है हंसना जीने के लिए, कहना ज़रूरी है उससे ज़्यादा जितना ज़रूरी होता है अक्सर खामोश रहना,चलना ज़रूरी है उससे ज़्यादा जितना ज़रूरी है गुमशुदा राहों पर रुक कर इंतज़ार करनामैं ज़रूरी हूँ खुद के लिए उससे ज़्यादा जितना ज़रूरी हैं  आप सब मेरे लिए. तो असल में जिंदगी की वो चीजें जो आपके लिए परेशानियों का कारण बनती हैं वो असल में ये वो चीजें हैं जिनसे रूबरू होकर आप जिंदगी का असली लुत्फ़ उठा सकते हैं.
छुट्टियों का मजा तो तभी है जब आप व्यस्त हों अगर आप खाली हैं तो रोज ही छुट्टी है पर क्या आप उन दिनों को एन्जॉय कर पाएंगे, नहीं कर पाएंगे क्योंकि आपके पास कोई काम नहीं है. कोई भी इंडीविजुअल   हमेशा ये दावा नहीं कर सकता है कि वो अपनी जिन्दगी में हमेशा सुखी या दुखी रहा है या रहेगा चेंज को कोई रोक नहीं सकता सुख के पल बीत गए तो दुःख के पल भी बीत जायेंगे .अमेरिका के प्रेसीडेंट ओबामा जिस दिन चुनाव जीते उसके एक दिन पहले उनकी नानी का निधन हो गया जिसे वो बहुत चाहते थे . दुख के साथ सुख भी आता है. अगर आपके साथ बहुत बुरा हो रहा है तो अच्छा भी होगा भरोसा रखिये.ऐसा हमारी आपकी सबकी जिन्दगी में होता है लेकिन हम सत्य को एक्सेप्ट करने की बजाय भगवान् और किस्मत न जाने किस किस को दोष देते रहते हैं अगर हम इस बदलाव को  एक्सेप्ट कर लें तो न कोई स्ट्रेस रहेगा और न ही कोई टेंशन लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है जब हमारे साथ सब अच्छा हो रहा होता है तो हम भूल जाते हैं कि जिन्दगी पाने  का नाम नहीं बल्कि खोने का नाम है  जहाज़ सबसे सुरक्षित पानी के किनारे होता है लेकिन उसे तो समुद्र  के लिए तैयार किया गया होता है बिना लड़े अगर आप जीतना चाह रहे हैं तो आज की दुनिया में आप के लिए कोई जगह नहीं है .जिंदगी को बेहतर बनाने का रास्ता दुश्वारियों से होकर गुजरता है भले ही असली दुनिया में परियां न होती हों पर उनके सपने अभी भी मुझे आते हैं.इसलिए आपके आस पास जो भी है चाहे वो रिश्ते हों या चीजें उनकी कद्र कीजिये क्योंकि जिंदगी में आपने कुछ भी पाया है वो जरुर कुछ खो कर पाया होगा. सोच क्या रहे हैं अगर आपने अपना कीमती समय न खोया होता तो क्या जिंदगी के इस फलसफे से परिचित हो पाते.  
आई नेक्स्ट में 26/05/15 को प्रकाशित           

10 comments:

arpit omer said...

आपका लेख पढ़ने के बाद मैंने कुछ बातें अपने जीवन में देखी हैं ... जिसे सोचने पर लगता है कि हाँ जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा अच्छा होगा .....

faisal qureshi said...

sir aapka article padne ke baad is dard bhari zindigi ko ek nayi disha mili....

Naincy Kashyap said...

KUCH KHO K PANE M HI USKI KADAR HOTI H JO HOTA H USE BHI JAYSDA CHAHIYE HOTA H USME LOGO KO KHUSH RHNA NHI AATA ..

arvind singh Yadav said...

Ye to life me aksar hota rehta hi ki kuch millta hi kuch khoo jata or jindagi ka nam hi hai kuch naya hona or hme aapni purani cheezo s kuch naya hi seekhne ko millta hi jiss trh aapke k articles s nilta hi ..

Karishma Lalwani said...

Ye to zindagi ka niyam hai kho kar pana. Zindagi me kuch kho janeke baad hi uski ahmiyat ka andaza hota hai islie to kho kar pane ka naam hai zindagi. Life me kuch bhi hamesha ke lie nhi hota or jo hota hai uski log aksar kadar nhi karte. Aapke article se kitna kuch pata chalta hai jiske bare me pehle kabhi socha bhi nahi.

neha bhandari said...

ye zindagi ek all time institute hai sir jaha har pal hme kuch naya sikhne ko milta hai....kbhi bhut kuch paa kar toh kbhi apna sab kuch kho kar.... lekin fir bhi hme chalte rhna chahiye kyuki kuch paa kar khone ka naam hi toh zindagi hai......:)

S.Raaj said...

the whole grist of the above article lies in a Single word called 'Patience'
and exactly to feel anything one should be acquainted wid its contrary.
viz poor can only feel rich the feel of being rich cuz he knows the worth he gave to be on that position a human born in rich can't have the same feeling cause that person never saw the misery one faced the worth one payed to get on that position.
so,its so very true without loosing you can't achieve anything
dr. kalam say "if you want to shine like a Star first burn like Sun "

S.Raaj said...

the whole grist of the above article lies in a Single word called 'Patience'
and exactly to feel anything one should be acquainted wid its contrary.
viz poor can only feel rich the feel of being rich cuz he knows the worth he gave to be on that position a human born in rich can't have the same feeling cause that person never saw the misery one faced the worth one payed to get on that position.
so,its so very true without loosing you can't achieve anything
dr. kalam said "if you want to shine like a Star first burn like Sun "

ANITA RAJ said...

sir aapke es article ko pdkar jindgi ke vo saare majnar ankho ke samne tair gaye jo hmse hmari bhot keemti cheej chura ke le gai. hmesha ke liye,uske bad ab jo manjar hai saamne hai, vah yahi ki "khokar paane k naam jindgi hai" ya fhir "paya huwa kho jana jindgi hai".

Nishit Gupta said...

just amazing ...what to say about this particular article . You fell short of thoughts, and I have paucity of words to describe it's beauty. This article is more like a poetry. I feel like sliding on your words and narration. The whole reading experience is like an " Introspection" The title more suited to this write up is " out of no where" and you are successful in building a very sensible plot that reflects the joy of " achieving something" it emanates from sense of "missing" or fear of "losing" something. A very well crafted article. simply ..enjoyed.

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