Saturday, December 3, 2011

अब आपके सारे राज बताता है मोबाईल


वक्त के बदलाव के साथ काफी कुछ बदला है अब देखिये ना मोबाईल जिसे इस देश में आये अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ (वैसे भी पन्द्रह साल का वक्त ज्यादा होता भी नहीं ) कितना तेजी से बदल गया पहले सिर्फ बात करने से शुरू हुआ सफर अब मल्टीमीडिया सेट के सहारे मनोरंजन ,जानकारी और काम के मामले में कहाँ से कहाँ पहुँच गया .हमारी पीढ़ी के लोगों के लिए बेसिक फोन स्टेटस सिम्बल हुआ करते थे और क्लास से मॉस तक का सफर तय करने में फोन ने ज्यादा वक्त नहीं लिया वैसे इसमें फिल्मों का भी बड़ा योगदान रहा है तकनीक को जब जनसंचार का साथ मिल जाता है तो वो लोगों तक जल्दी पहुँचती है और उसके प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ती है पुराने वक्त में फोन की लोकप्रियता का अंदाजा इस गाने से लगाया जा सकता है जो आज भी लोगों की जुबान पर चढा हुआ है मेरा पिया गए रंगून वहां से किया है टेलीफोनअब तो आप समझ गए होंगे कि मैं मोबाईल फोन और संगीत के सम्बन्ध पर बात कर रहा हूँ वक्त के साथ साथ टेलीफोन बदल गया है और उनकी जगह मोबाईल ने ले ली है और अब गाने भी बदल गए हैं. जी हाँ व्हाट इस योर मोबाईल नम्बर करूँ क्या डायल नम्बरचलिए मुद्दे पर लौटते हैं आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में इंसान के पास अगर कुछ नहीं है तो वो है वक्त..जिसके सामाधान के लिए उसने मोबाइल से दोस्ती कर ली है। इस 8-10 इंच की मशीन ने व्यक्ति की जिंदगी में वो जगह बना ली है जो शायद उसके अपनों की भी नहीं होगी। क्योंकि भागदौड़ के सफर में उसके पास अपनों का साथ तो रह नहीं पाता लेकिन मोबाइल के जरिये अपनी इस दूरी को वो कम जरूर कर लेता है। मोबाइल ने जहां उसे अपनों के करीबकिया है, वहीं उसके शौक को भी जिंदा रखा हुआ है। अब आप पूछेगें कि भईकैसे? तो गौर से सुनिए...हम में से काफी लोग ऐसे हैं जिन्हें काम से लौटते समय काफी देर हो जाती है...अपनी थकान को मिटाने के लिए और अपने आप को रीफ्रेश करने के लिए अपने मोबाइल पर वो गाने सुनते हैं।  क्योंकि संगीत के बिना हर आदमी का लगभग जीवन अधूरा है, यहां लगभग इसलिए बोला क्योंकि ये बात वो लोग नहीं मानेगें जिन्हें संगीत से कोई लेना देना नहीं है।अपने मनपसंद पुराने गीतों  को अपने मोबाइल के एफएम पर या अपने रिकार्डिंग सेटअप पर सुनने का मजा ही कुछ और होता है। मधुर संगीत के बीच व्यक्ति अपनी थकान,अपनी परेशानियां भूलकर कुछ देर के लिए उस दुनिया में पहुंच जाता है जहां कोई गम नहीं होता। ये तो इंसान, मोबाइल और फिल्मी गानो का एक रिश्ता हमने आपको बताया लेकिन फिल्मी गानों से तो इंसान की जिंदगी का हर पहलू जुड़ा हुआ है, इस बात से तो कोई इंकार नहीं कर सकता। कुछ लोग अपने मनपसंद गीतों को अपनी मोबाइल की रिंगटोन या कॉलर टोन बना लेते हैं। अपनी खुशी और गम को अपने गीतों से व्यक्त करनेवाले इन लोगों के बारे में अंकशास्त्रियों का कहना है कि अगर आप किसी व्यक्ति के स्वभाव और हाव-भाव जानना चाहते हैं तो उसके मोबाइल पर कॉल कीजिये। आप उसकी रिंगटोन या कॉलर ट्यून सुनकर उसके बारे में पता लगा सकते हैं। जैसे कि अगर कोई रोमांटिक धुन सुनायी दे तो आप समझिये वो इंसान प्यार की कद्र करता है, अगर आपको कोई कॉमेडी धुन सुनायी दे तो ये समझ लीजिये वो इंसान काफी मस्त-मौला है और अगर किसी की रिंगटोन या कॉलर पर आपको किसी के चीखने, हंसने या कोई डॉयलॉग सुनायी पड़े तो समझ लीजिये वो इंसान काफी आक्रामक है। सोचिए अंकशास्त्री इस तरह की बातें करते हैं,जब इस विद्या की खोज हुई थी किसी ने नहीं सोचा होगा कि  मोबाइल नाम की किसी चीज का अविष्कार भी होगा,लेकिन हमारे अंकशास्त्रियों ने इस पर भी रिसर्च करके एक नया सिद्धांत लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया, जिसके पीछे कारण एक ही है कि आज लोगों की जरूरत बना मोबाइल उसके व्यक्तित्व की परिभाषा और उसपर बजने वाले गीतों से उसके स्वभाव को जानने का जरिया बन गया  है। तो सोच क्या रहे हैं अपने स्वभाव के अनुसार जरा अपनी कॉलर टोन सेट कीजिये यदि आप ज्यादा नेट फ्रेंडली नहीं तो भी कोई मुश्किल वाली बात नहीं है बस आपको अपने सर्विस प्रोवाईडर की वेबसाईट पर जाना है और वहां से अपने मनपसंद संगीत को चुनना है कुछ सेवाएं मुफ्त हैं कुछ के लिए आपको पैसे देने पड़ सकते हैं पर जब बात आपकी पर्सनाल्टी से जुडी हो तो कुछ पैसे खर्च करने में बुराई क्या है .
जनसंदेश टाईम्स में 3/12/11 को प्रकाशित 

5 comments:

nitin said...

sir aap ka lekh bhut hi khoobsurat hai. khawab kuch aisaa ho ki jindgi noor ho jaye aur agar nokia jaisa mobile ho toh aap apne raj btane par majboor ho jaye.

bolo bindasssssss......... said...

sahi kaha sir apne mobile ne hamari jindagi badal di.azaadi ke mayne badal diye hain

deepudarshan said...

guruji such me mob ne sab kuch badal kar rakh diya hai aur ab age dekhie kya kya badlta hai

ghazi said...

wah wah kya baat hai.

Suraj Verma said...

सुबह ‘चार’ पर मुर्गे उठकर,
हर दिन बांग लगाते थे।
सोने वाले इंसानों को,
' उठो-उठो' चिल्लाते थे।
किंतु आजकल भोर हुए,
आवाज नहीं यह आती है।
लगता है कि अब मुर्गों की,
नींद नहीं खुल पाती है।
मुर्गों के घर चलकर उनको,
हम मोबाइल दे आएं।
और अलार्म है, कैसे भरना,
उनको समझाकर आएं।
चार बजे का लगा अलार्म,
मुर्गे जब उठ जाएंगे।
कुकड़ूं कूं की बांग लगेगी,
तो हम भी जग जाएंगे।
मुन्नूजी ने इसी बात पर,
पी.ए. को बुलवाया है।
दस हजार मोबाइल लेने,
का आर्डर करवाया है।
मोबाइल ने हम लोगों की लाइफ ही बदल दी, यदि हम किसी को मैसेज करे इमोजी के साथ तो दूसरे वाले को बिना कुछ कहे ही पता हो जाता है की इंसान खुश है या नहीं। मोबाइल ने वाकई में बहुत कुछ बदल दिया है हमारी लाइफ में।

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