Tuesday, September 2, 2014

कभी अलविदा न कहना

गाने सुनने का शौक किसे नहीं होता, मुझे भी है प्यारे से मीठे गाने जिसे सुनकर बस आप गाने के लेखक की बरबस तारीफ़ कर उठें. आपने गौर किया होगा कभी कभी गानों की कुछ लाईनें कितनी बड़ी बात कह जातीं है.अब इसी गाने को ले लीजिए ‘चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना कभी अलविदा न कहना’ सच तो यही है जाना और आना प्रकृति का नियम है.अब देखिये न सावन आया और चला भी गया. हम सब थोडा और विश करते ही रह गए लेकिन बादल उतना बरसे नहीं. खैर छोडिये जब रियलिटी अच्छी न हो तो कुछ वर्चुअल रियलिटी की बात कर ली जाए वर्चुअल बोले तो फ़िल्में .हाँ भाई जब कोई चीज चली जाती है तो ज्यादा याद आती है.तो मुझे सावन की याद आती है.यूँ तो सावन सिर्फ साल का एक महीना है लेकिन इसका जिक्र आते ही जो तस्वीर हमारे जेहन में उभरती है वो है बरसात,हरियाली और झूले और जब इतनी सारी चीजें एक साथ हों तो हो गया न मामला पूरा फ़िल्मी.जी हाँ फिल्मों का सावन से गहरा रिश्ता रहा है या यूँ कहें बगैर बारिश के हमारी हिंदी फिल्में कुछ अधूरी सी लगती हैं ,अगर बारिश है तो गाने भी होंगे तो क्यों न इन गानों के बहाने ही सही जाते हुए सावन को याद किया जाए. सबसे पहले १९४९ में सावन शीर्षक से पहली फिल्म बनी उसकी बाद सावन आया रे सावन भादों , `सावन की घटा´, `आया सावन झूम के´, `सावन को आने दो´ और `प्यासा सावन´ नाम से फिल्में बनीं.
अब सावन का महीना है तो पवन तो शोर करेगा ही .शोर नहीं बाबा सोर जी हाँ ये गाना आज भी हमारे तन मन को मोर सा नचा देता है ,सावन का महीना पवन करे सोर (मिलन).जब पवन शोर करेगा तो बादल बिजली और बरसात आ ही जायेंगे ये सारे सावन राजा के दरबारी हैं. तभी तो सावन को राजा का खिताब दिया गया है ओ सावन राजा कहाँ से आये तुम (दिल तो पागल है.
कहते हैं आग और पानी का रिश्ता होता है चौंकिए मत इस रिश्ते को हमारे गीतकारों ने बड़ी खूबसूरती से गीतों में ढाला है "दिल में आग लगाये सावन का महीना " (अलग -अलग ) या फिर "अब के सजन सावन में आग लगेगी बदन में " (चुपके -चुपके ) एक फिल्म में रिम झिम गिरे सावनसुलग सुलग जाए मन” (दहक) एक खूबसूरत सा गीत और है जो सावन की रूमानियत का जिक्र करता है "तुझे गीतों में ढालूँगा सावन को आने दो"(सावन को आने दो) अब अगर सावन की बारिश का मज़ा घर में बैठ के लिया तो ये सावन के साथ अन्याय होगा "सावन बरसे तरसे दिल क्यों न निकले घर से दिल "(दहक). वैसे भी सावन बेशकीमती है और इसकी कीमत का अंदाजा करता ये गाना तेरी दो टकिया की नौकरी रे मेरा लाखों का सावन जाए” (रोटी कपडा और मकान ) वैसे भी सावन के महीने में इंसान तो क्या बादल भी दीवाना हो जाता है "दीवाना हुआ बादल सावन की घटा छाई" (कश्मीर की कली ) जब ऐसा सुहाना मौसम हो तो किसी की याद आ ही जायेगी "सावन के झूले पड़े तुम चले आओ "(जुर्माना ) यहाँ एक रोचक बात है कि सावन और झूलों का गहरा सम्बन्ध है घरों में झूले सावन के महीने ही में लगाये जाते हैं .बात तो सावन की चल रही है लेकिन इसे जिन्दगी से जोड़ दिया जाए तो सावन के दर्शन को समझना आसान हो जाएगा और जिन्दगी जीना भी.  पहला सबक जो आएगा वो जाएगा भी सावन भी चला गया लेकिन फिर आने के लिए तो सफलता और असफलता जिंदगी के हिस्से हैं कोई भी चीज परमानेंट नहीं हैं. 
तो सावन को याद करने के तरीके और मौके कई हो सकते हैं लेकिन बीत गया सावन यही कह गया है कि जिन्दगी अपने हिसाब चलेगी लेकिन अपने मन के आँगन में सूखा मत पड़ने दीजियेगा अपनी खुशियों आशाओं उमंगों के सावन को साल भर बरसने दीजियेगा इतना तो वादा मैं आप से ले ही सकता हूँ इस गाने के साथ कभी अलविदा न कहना.
आई नेक्स्ट में 2/09/14 को प्रकाशित 

15 comments:

shalini srivastava said...

Nice written ..

shalini srivastava said...

Nice written ..

juhi srivastav said...

Khushiyan jab hmra dharwaja khatkhati hai bahut si umeede aur zindagi bindass jeene ka mauka laati hai.....issi tarah saavan ka ye khoobsurat mausan hmre life me khushiyan naye mauke aur umeed Bhar deti hai.
Sir apki har ek baat bilkul sahi hai hame life Ki khushiyan aur dukh dono ek jaise handle karna chahiye . Fir ek din aisa hoga jab naaumeed Ki koi jagah nahi hog I.

Sonali Kanojia said...

Songs zest up our lyf.... v can easily connect our real lyf wid the beautifully written reel lyf sngs which drives our mood....nyc examples sir...

beauty said...

fully agree with u sir... songs change our mood n sometime taught very meaningful lesson to us... if we apply that in our real life then our life become more easy and stress free... ANJALI SINGH MJMC 1ST SEM..

soumya singh said...

truly said sir.some song narrate our lyf nd v get connected from those song ...music help us to get rid from our stress full life ....
SOUMYA SINGH MJMC 1 SEM

aditi verma said...

Muhbbt barsa dena tum savan aya...youngstr ka fev sng h ajkal.. u b barish k bhini bhini khushbu ho or khubsurt gane usme chand lgate h to kuch ane zindgi ka sbq dete h jaise tm sath hojb apne dunia ko dikha denge hm mout ko jeene andaz seekha denge.aditiverma

Vaishali Tiwari said...

nyc lines sir....
sawan ki barish ki vo phli boond jab mere chehre par girti hai mujhe mere ghar ki,mare papa k sath bitaye kuch pyare paloo ki,meri maa k sath garma garam pakode ki aur mujhe mere bhai k sath jhule jhule ki yaad dilati hai.....love the rainy season..

Vaishali Sharma said...

Badi hi khoobsurti se aapne sawan aur jindgi ke do alag alag phluoo ko ek hi shredi me laker khada kr diya . wajib hai ye sirf ap hi kr sakte hai , pure artical ko pdhtey hue maine ye jana ke sach me agr gaur se dekha jai to jindgi ke is kathin sawal ka jawab jisse hm kisi apne ke gujar jaane ke baaad jujhne lagtey hai , hmari prkrati aur ane wale sare hi mosam kitni sarlta se iska uttar de jate hai..
Ye sach hai jindgi kabhi bhut kuch kh kr bhi khokhli ho jati hai to kabhi jindgi me ghula sannata puri jindgi bayan kr deta hai..
Isi tarh ka kuch Kishore kumar ji ne kha hai apne is geet me “ chalte chalte mere ye geet yaad rakhna kabhi alveeda na khna”
Ye geet bhi isi tarh ki ek khaani hme drsha jata haii ,ye kuch aise maheen shabd hai jo insaan ki puri jindgi ka niskarh de jatey hai ..
Kuch mere shabd isme jodna chaungi..
Musafir hai jindgi rukna gustakhi hogi
Thair ke ek jhalk dekhna kbool hai ,
pr badaltey rutuo ko jhukana gustakhi hogi…

sushil kumar said...

सर बिलकुल सही कहा आपने 90 के दशक के गाने हमे यथार्थ से जोड़ देते हैं। उन गानो की लाईनो से हम खुद को जुड़ा महसूस करते है। 90 के दशक के गाने दिल की गहराईयो तक पाहुचते हैं और "बीते हुये लम्हो की कसक " को ताजा कर जाता हैं। उन गानो को सुनकर हम किसी के लिए 'सात रंग के सपने' चुनने लगते हैं तो कभी, 'दुनिया मे कितना गम है,मेरा गम कितना कम है' सोचकर अपने दर्द को भूलने की कोशिश भी करते हैं।

charu priyam said...

mujhe sawan ka har pal intjar reta hai sawan sabse beautiful pal hota hai

Nikita Sareen said...

उक्त पंक्तियां पूर्ण रूप से ये बताती हैं कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है । वक़्त हमेशा बदलता है और इस बदलते वक़्त के साथ ही इंसान खुद को उसी रूप में ढालते हुए जीता चला जाता है । एक तरफ वो ज़िन्दगी में खुशियां , प्यार , स्नेेह के रूप को जीता है तो दूसरी तरफ दुःख ,वियोग ,निराशा को भी जीता है । जब इंसान खुश होता है तो सावन आने पर ( अब के सावन ऐसे बरसे , बह जाए रंग मेरे चुनर से ) , ( मैंने प्यार किया तुम्हे रीज़न से , बस लव ही है रीज़न , सावन डा लव सीजन ) जैसे गाने गुनगुनाते है और जब वो दुखी होता है तो वही सावन उसे रुलाता है ।

Mehndi Agarwal said...

Every now & then we come across a song that aptly describes our current state of mind and we able to relate ourselves to it. Thoughts which otherwise are difficult to explain suddenly find words to express themselves. Music is not only a stress-buster but food for the soul.

NITYANAND GUPTA said...

A well written words in this article and use of metaphor shows that how life of a person change at different stages as same as seasons changes at a particular time interval in a year.Time never stop running, so make every moments countable and face every situations in life and enjoy life .Some of the songs touches our heart & soul because we relate ourself with them . Kabhi alvida na kehna ..

Navneet verma said...

BAHOT HI HASEEN SA MAUSAM HAI SAAWAN JO HUME ZINDGI JEENE KA EK KHOOBSURAT SA FALSAFA DE JAATA HAI VO KAHTA HAI JIS TARAH VO JETH, ASAADH JAISE BIGDE MAUSAM K BAAD SAMA KO APNI KHOOBSURATI HASEEN BANATA HAI USI TARAH HUMKO BHI APNI ZINDGI K BIGDE LAMHO K GUZARNE K BAAD ZINDGI KO KHOOBSURATI SE SAMET KR JEEVAN ME HARIYAALI BHR LENI CHAHIYE, KAUN JAANE KYA PATA K "KAL HO NA HO"...

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