Tuesday, September 9, 2014

कैम्पस में बंधे बंधाए ढर्रे से आजादी

कभी आपने सोचा कि कैम्पस या उच्च शिक्षा में इतनी आजादी क्यूँ रहती है पढ़ाई की फ़िक्र करना स्कूल के दिनों में होता है जब आपकी पढ़ाई की नींव रखी जा रही होती है|कैम्पस में आप एक सांचे में ढल कर आये होते हैं इसलिए आपको फ्री छोड़ दिया जाता है |यह मानकर कि अब आप समझदार हैं और इसीलिये कैम्पस में लेक्चर को आधार बना कर पढ़ाई होती है नोट्स नहीं दिए जाते स्कूल के दिनों की तरह रट्टाफिकेशन यहाँ नहीं होता है|स्वायत्तता और आजादी का नाम है कैम्पस,जहाँ से कुछ सीखकर आप समाज और अपने विषय को एक नयी दिशा देंगे और ये जिम्मेदारी आप पर ज्यादा है |क्यूँ ,क्यूंकि आप युवा हैंदेश में 20 से 35 वर्ष के आयु वर्ग की आबादी 2021 तक बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है|जो 2001 में करीब 58 प्रतिशत थी। वर्ष 2020 में भारत की 125 अरब की आबादी की औसत आयु 29 साल की होगी जो चीन और अमेरिका के लोगों से भी युवा होगी ,बात है न मजेदार अब जरा सोचिये इतने सारे युवा आंकड़े और भी हैं वर्ष 2011 और 2016 के बीच करीब 6.35 करोड़ नए लोग कामकाजी आबादी में शामिल होंगे जिनमें20 से 35 वर्ष की आयु के लोगों की संख्या सबसे अधिक होगी।मुझे पता है आंकड़े आपको बोर करते हैं पर भविष्य की बेहतरी का रास्ता आंकड़ों के जंगल से होकर गुजरता है| पर कुछ चीजें कभी नहीं बदलती जैसे जब तक हम पढेंगे नहीं तब तक आगे बढ़ेंगे नहींवैसे भी आज का युग मोबाईल और इंटरनेट का है हर हाथ में गूगल है आप मेरी लिखी किसी बात को दो मिनट में क्रॉस चेक कर सकते हैं,गूगल बाबा की कृपा से|वैसे बात कैम्पस में आये बदलाव की चल रही थी तो पढ़ने के तौर तरीके भी बदले हैं और टेक्नोलॉजी पर हमारी निर्भरता बढ़ी है|3 का स्क्वायर रूट रटने या कागज कलम से निकालने की जरुरत नहीं,किसी जगह की राजधानी पता करनी हो यानि पढ़ाई की समस्या कोई भी हो समाधान एक है गूगल कर लो डूड कुछ जोड़ना या घटाना हैमोबाईल निकला जेब से और उँगलियाँ उसके टच पर थिरकने लग गयीं|सेकेंडो में जवाब हाजिर अब नोट्स एक्सचेंज करने के लिए व्हाट्स एप पर ग्रुप है तो क्लासेज की सूचना के लिए फेसबुक पेज,सब कुछ इतना आसान हो गया है |आप हर पल हर क्षण कनेक्टेड हैं अब देखिये न सोशल नेटवर्किंग की इस दुनिया में आधी से ज्यादा आबादी युवाओं की हैपर इस पूरी प्रक्रिया में आपने गौर किया होगा हमारी निर्भरता “गूगल” और तकनीक  पर ज्यादा बढ़ी है और सेल्फ स्टडी पर जोर कम हुआ है|इन सबका असर हमारी क्रिएटिविटी (सर्जनात्मकता) पर पड़ रहा है|जरा सोचिये स्कूल में हम कितना क्रिएटिव हुआ करते थे वो चाहे हार्बेरियम फाईल बनाना हो घर की बेकार की चीजों से कोई मॉडल  कितना तेज़ हमारा दिमाग चलता था पर अब वो दिमाग गूगल का मोहताज है बस समस्या की जड़ यही है |दिमाग का कम इस्तेमाल और तकनीक का ज्यादा बचपने में मेरे पिता जी कहा करते थे बेटे दिमाग का इस्तेमाल जितना ज्यादा करोगे वो उतना ही तेज होगा और जितना कम करोगे वो उतना ही कुंद हो जाएगा उनकी ये सीख कब मेरे लिए जीवन का दर्शन बन गयी पता ही नहीं पड़ा ,किस्सा छोटा सा है फलसफा बड़ा टेक्नोलॉजी की मदद पढ़ाई में आगे बढ़ने में लीजिये पर तकनीक पर पुरी तरह निर्भर मत हो जाइए वैसे भी निर्भरता किसी भी चीज पर हो बुरी ही होती है |मेरा अनुभव यह कहता है जब मुझे तकनीक की जरुरत सबसे ज्यादा होती है उसी समय पर वो धोखा दे देती है तो हमेशा बैक अप रखिये |बैक अप तभी होगा जब आप दिमाग का इस्तेमाल ज्यादा करेंगे| गूगल पर हर विषय से सम्बन्धित अरबों जानकारियां हैं पर अगर हमारे कैम्पस में सिर्फ गूगल का बोलबाला रहेगा तो उस पर नयी जानकारियां कहाँ से आयेंगी |यहीं बात दिमाग के इस्तेमाल की है अपनी नयी जानकारियों को आगे बढाने के लिए गूगल का इस्तेमाल कीजिये न कि दूसरों से प्राप्त जानकरियों को आप आगे बढ़ाते रहें|जहाँ सब कुछ इतनी तेजी से बदल रहा है वहां ज़माने से कदमताल करने के लिए आपको एक्स्ट्रा स्मार्ट होने की जरुरत है तो शुरुवात आज से ही क्यूँ न की जाए|
अमर उजाला माई सिटी में 09/09/14 को प्रकाशित 

9 comments:

kashika mehrotra said...

Nice analysis Sir....as it is said...with great power cums great responsibility....we received d power of internet to knw abt anything in just seconds via google but we all forget our responsibility i.e. Google is for enhancing d limit n depthness of our knowledge but not to get dependent on it....

Rabinshu Sharma said...

यह एक ऐसा विषय है जिसे आज के यूथ को समझना होगा। स्मार्ट होना चाहिए लेकिन इतना भी एक्सट्रा स्मार्ट नहीं जिससे की हम अपने मस्तिष्क हो हानी पहुंचाए। यूनिवरसिटि जैसी जगह पर जो आजादी मिलती है उसे विध्यार्थीयों को सही रूप मे इस्तेमाल करना चाहिए और गूगल बाबा के आदी न हो कर उसे जरूरत पर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

aditi verma said...

Whi bat na sir k ati har cheez ki buri hoti hai n zarurt k hisab se gugl ka use krna chahiye n bat sahi hai agr ap safal hona chahte h to apka creative hona zruri hai.aditiverma

soumya singh said...

soo true, google is a search engine but we cant deny from the fact that google also paralyzing our brain and power to generate creative ideas .
SOUMYA SINGH MJMC 1 SEM

beauty said...

yes sir... u r right.. we r depending soo much on internet n google... n we became lazy towards our duties nd work. we should understand that google nd internet is aldo made by a man.. so being human we should use our brain more than the internet... Anjali singh mjmc 1st sem

pawan singh said...

hamara yuth bahut hi smart hai janha tak google ki bat hai ham google pe adhyan to kar sakte hai lekin sir jo samajik taur tarike jo ham aapke lector ke madhyam se sikhte hai wo google pe knha

janha tak campus kul ki bat hai agar hampe sichaka jara bhi asar rahega to ham apni sahi disha kud chun lenge lakchya sahi hona chahiye sir.

Ashutosh Jaiswal said...

Good one sir...sahi mei technology ne hame aisa surround kiya hai ki hamari dependance iske upar hadh se jyada ho gyi hai aur ham ek parasite bante jaa rahe hai.....hame uss "thin line" ko samajhna hoga jo jarurat aur aadat ke beech mei farak karti hai aur uss "line" ke paar jaane ke dushparinaamo ko samajhna hoga.. tab ham swayam faisla kar sakenge ki inn suvidhaao ka upyog apne rozmarra ke karyo mei kab aur kitna kiya jaana chahiye.
Ashutosh Jaiswal
MJMC 1st semester

sushil kumar said...

इंटरनेट पर हमारी निर्भरता ने हमे व्यावहारिक ज्ञान से दूर कर दिया है । गुरु शिष्य के संबंध या सहपाठियों के बीच सामंजस्य की स्तीथी अब नहीं रही । जूनियर सीनियर के बीच का आदरशात्मक माहौल समाप्त सा हो गया है । दिमागी कसरत भी छुट गयी है । सर आपका यह लेख हमे प्रेरणा प्रदान करेगा। हम आपके आभारी हैं॥
सुशील कुमार
MJMC 1st SEMESTER

Suraj Verma said...

इन्टरनेट ने हमारे दिमाग का कसरत कराना बन्द कर दिया है। हमारी ज्ञान की निर्भरता अब व्यवहारिक नहीं रही। गूगल बाबा ने सब कुछ आसान कर दिया है। यही वजह है की कैंपस में आज़ाद पंछी की तरह आप पढाई कर सकते है।

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