Wednesday, November 23, 2016

सोशल मीडिया से ताज़ा ख़बरों की दस्तक

ऐसे समय में, जब फेसबुक समेत सोशल मीडिया के लगभग सभी माध्यम झूठी और फर्जी खबरों की समस्या से जूझ रहे हैं, कुछ ऐसा भी हो रहा है, जो बहुत उम्मीद बंधाता है। इस साल अगस्त में जब फेसबुक ने लाइव फीचर शुरू किया था, तो किसी ने नहीं सोचा था कि कैसे फेसबुक में लाइव वीडियो फीचर का यह छोटा-सा ‘आइकन’ भारत को सिटिजन जर्नलिज्म की अगली पीढ़ी में ले जाने वाला है और टीवी पत्रकारिता के तौर-तरीके पर गहरा असर डालने वाला है। इस वक्त जब पूरा देश नोट बदलने के लिए एटीएम या बैंक के बाहर लाइन में लगा है, स्थिति की गंभीरता को दिखाने के लिए महज तस्वीरों से ही नहीं, बल्कि इस लाइव वीडियो का भी सबसे सटीक इस्तेमाल हो रहा है। अखबारों, टीवी चैनलों ने भी इस अवसर का फायदा उठाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। नए नोट पाने या पुराने नोट निपटाने के लिए लाइन में लगे लोगों को दिखाने और उनकी प्रतिक्रिया को समझने के लिए फेसबुक लाइव फीचर एक औजार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी दौरान, नमक की कमी को लेकर फैली अफवाह को खत्म करने में भी लोगों ने इस फीचर का बखूबी इस्तेमाल किया, जिससे स्थिति खराब नहीं होने पाई।
फेसबुक का यह फीचर प्रयोगकर्ताओं को रियल टाइम में सीधे प्रसारण की सुविधा देता है। यह ठीक है कि पहले लोगों ने मजे के लिए लाइव होना शुरू किया, मगर धीरे-धीरे इसमें गंभीरता आनी शुरू हो गई है। इस फीचर के मानक गढ़ने और सीखने में फेसबुक के भारतीय उपयोगकर्ताओं ने ज्यादा वक्त नहीं लगाया। जो यह भी बताता है कि देश नए मीडिया के प्रयोग के तौर-तरीके बहुत जल्दी आत्मसात कर रहा है। जिसे हम डिजिटल इंडिया कहते हैं, वह भले ही एक सरकारी प्रयास और नारा है, लेकिन सच यह है कि देश की युवा पीढ़ी डिजिटल बदलावों और औजारों को लेकर काफी सहज हो चुकी है। अब नए बदलाव की राह इसी सहजता से निकलेगी।
भारत में इस समय 15 करोड़ से ज्यादा लोग फेसबुक का उपयोग कर रहे हैं। अब आगे इस संख्या को लगातर बढ़ाते रहना फेसबुक की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसी ही चुनौती देश में सक्रिय सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्म की भी है। शोध बताते हैं कि लोगों का समाचार पाने का तरीका सोशल मीडिया के आने के बाद बदला है और वे समाचारों के लिए टीवी की बजाय सोशल नेटवर्किंग साइट्स की ओर रुख कर रहे हैं। फेसबुक के पास टेक्स्ट, तस्वीरें और वीडियो शेयर करने की व्यवस्था पहले से ही थी, पर लाइव वीडियो फीचर ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है। सिटिजन जर्नलिज्म की अवधारणा में जिस गति की कमी सोशल मीडिया साइट्स में महसूस की जा रही थी, उसको लाइव वीडियो ने भर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि इसका असर हमारे समाचार टीवी चैनलों पर भी जल्द दिखेगा।
यह भी मुमकिन है कि खबरों को पाने का उनका सबसे बड़ा माध्यम सोशल मीडिया ही बन जाए। ओबी वैन से सीधा प्रसारण बहुत जल्द ही इतिहास हो जाने वाला है। असल में, यही एक ऐसा तत्व है, जो एक आम इंटरनेट प्रयोगकर्ता के पास नहीं था, इसलिए उसकी निर्भरता समाचार और सूचना पाने के लिए टीवी पर थी। अभी तक की तकनीकी व्यवस्था में सीधे प्रसारण के कारण टीवी ज्यादा विश्वसनीय था, पर अब वह दूरी भी खत्म हो गई है। इस बीच भारत में लगातार स्मार्टफोन की संख्या बढ़ती जा रही है, जो इस बात का द्योतक है कि फेसबुक का यह फीचर अभी और ज्यादा लोकप्रिय होगा और लोगों को अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए टीवी चैनल जैसे महंगे माध्यम की जरूरत नहीं होगी। उनके पास खुद का अपना माध्यम होगा।
बेशक इसके रास्ते में कई बाधाएं हैं। सबसे बड़ी बाधा इंटरनेट की गति है। 4जी तकनीक का विकास और विस्तार इसकी गति को कितना तेज कर सकता है? इससे भी बड़ी चुनौती नागरिक पत्रकारिता के नाम पर सामग्री की भरमार की है। सोशल मीडिया इस अराजकता से निकलकर सुगठित रूप में कैसे निखरेगा, यह कोई नहीं जानता। फिर इसे विश्वसनीयता कायम करने के लिए भी संघर्ष करना होगा।
हिन्दुस्तान में 23/11/16 को प्रकाशित 

2 comments:

Poonam said...

सोशल मीडिया मे ताजा खबरों के नाम पर बिना सोचे समझे कुछ भी पेश कर दिया जाता है।

Aishwarya Shukla said...

social media per jayadha yakeen nhi karna chaiyeh

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