Wednesday, February 9, 2011

कठिन कार्य

एक दिन पढाई से जी उकताया
तब मन में विचार ये आया
कार्य ऐसा करूँ मैं अभी
जो किया न हो किसी ने कभी
इस प्रश्न ने मुझे किया परेशान
पढ़ना लिखना मेरा सब हो गया हराम
सोच -सोच कर मैं घबराया
कार्य ऐसा कुछ समझ न आया
मन में उभरा एक दार्शनिक प्रश्न
क्या इतना आसान है मानव जीवन
तभी हृदय से निकली एक आवाज़
आसान नहीं है बजाना जीवन का साज

प्रतिदिन धरती पर लाखो आते जाते हैं
कुछ दुनिया का कुछ ले जाते हैं
कुछ दुनिया को कुछ दे जाते हैं
अचानक मन में कौंधा एक विचार
जीवन जीना ही सबसे दुरूह कार्य
मैं दुनिया को कुछ दे जाऊँगा
सद्कर्मों से जीवन अपना सफल बनाऊंगा

जीवन की पहली कविता जब मैं दसवीं में पढता था 

24 comments:

deepudarshan said...

sir samay ke hisab se bhut hi achi kbita hai

deepudarshan said...

samay ke hisab se bhut hi achi kbita hai sir

डॉ. मनोज मिश्र said...

,कक्षा १० में ही इतनी अच्छी रचना का लेखन,आपको बधाई.

Shambunath said...

ग़ज़ब का दर्शन है। जिससे कभी न कभी हर किसी को दो चार होना ही होता है।

जीवन की पहली कविता जब मैं दसवीं में पढता था

पूत के पांव पालने में ही दिख गए थे...

कविता का जो दर्शन है उससे कहीं भी नहीं लगता कि ये दसवीं के किसी छात्र की कविता है।


साधुवाद

ANUBHA GUPTA said...

sir 10th standard me aapne itni acchi kavita likhi....gud sir...

ANUBHA GUPTA said...

sir, 10th standard me aapne itni acchi kavita likhi..gud sir

Rohit, we the people of India.............. said...

achchi hai..

Rohit, we the people of India.............. said...

achchi hai.

Meraj said...

बहुत अच्छी कविता लिखी है
ज़िन्दगी की पूरी हकीकत को कविता के माध्यम से बता दिया है

Meraj said...

बहुत अच्छी कविता लिखी है
ज़िन्दगी की पूरी हकीकत को कविता के माध्यम से बता दिया है

Dr. Mukul Srivastava said...

@दीपू ,मनोज जी ,अनुभा ,शम्भू दोस्त आप सभी का आभार

Dr. Mukul Srivastava said...

@रोहित जी मेराज मियां आप का भी शुक्रिया

Saumitra verma said...

sir kavita aur aap ke blog ka naya design dono he bahut acche hai...

s k singh said...

♫ Mehak teri aaj bhi meri sanso me hai, Har 1 ada teri meri aankho me hai,Bhale mita de apne dil se mera vajood, Magar teri jagah aaj bhi meri aankho me hai.



thanks 4 this poem

Bhawna Tewari said...

बहुत खूबसूरत भाव...अच्छा लगा सर..

आग़ाज़.....नयी कलम से... said...

suruwat aisi thi ....tabhi to aaj aapne blog ki duniya me tahalka macha rakha hai.......

Priyanka said...

sir bahut acha likha hai,wo bhi itni choti age me,tabhi to sir aj ap is mukaam par hain

virendra kumar veer said...

sir bahut achi kavita hai, jiwan ko jina sikha diya aur jindagi haqikat se roobaru kara diya aapne.

AAGAZ.. said...

A good beginning makes a good ending..

CHANDNI GULATI said...

well i must say sir , dat v r really lucky to have u as our teacher,,,,us waqt ki itni achchi soch....

ARUSHIVERMA said...

Poetry is meant for some special peoples which can not be by every one with soo much of depth in to it.

sana said...

10 class me itni achi poem sir..........its just wow!!!!!!!!

pragati said...

sir bht achi poem h,10 cls mai apne itne achi poem likhi.sir,we r vry lucky ,aap jaisa teacher mila.

meghna singh said...

nice written. "life is not a bed of roses" until we will not get sweat we will not get the sweet also. life mein kuch karne ke hardwork and dedication is a must.

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