Tuesday, May 14, 2013

क्योंकि गर्मियां भी जरूरी हैं

मौसम कोई भी हो  पर कुछ चीजें हमेशा एक जैसी ही होती रहती हैं हमारे जीवन में कोई ज्ञान नहीं मेरा एक सिंपल ओब्सर्वेशन है इस साल बहुत गर्मी पड़ रही है आप भी इस तरह के जुमले सुमते हुए बड़े हुए होंगे और गर्मियां हर साल कमोबेश एक जैसी ही पड़ती हैं पर जब हम इसे ज्यादा महसूस करते हैं तो उसके बारे में ज्यादा बात करते हैं तो मौसम कोई भी हो हम जल्दी ही उससे उकता जाते हैं तो सारा खेल फील करने का,फील से याद आया आजकल लोग फील बहुत करने लग गए हैं. अब अगर आप कुछ महसूस कर रहे हैं तो अच्छी बात है कि आपके अंदर भावनाएं जिन्दा हैं पर अगर आप हर छोटी बड़ी बात फील करने लग गए तो समझ लीजिए आपके एटीट्यूड में दिक्कत है नहीं समझे भाई गर्मी के इस मौसम का पहला फंडा गर्मी है तो प्यास लगेगी पर प्यास लगने के लिए आप गर्मी को दोष नहीं देंगे,प्यास लगना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है गर्मी में प्यास ज्यादा लगती है लेकिन प्यास सिर्फ गर्मी के कारण लगती है ऐसा नहीं है तो अपनी असफलता का श्रेय दूसरों के सर न डालें बल्कि उसे मानकर अपने अंदर आवश्यक परिवर्तन लाएं. अब कुछ लोग ऐसे भी होते हैं कि अपनी फील्ड में जरा सा सफल हुए नहीं कि तुरंत फील करने लग गए कि बाकी के सारे लोग नकारा हैं.हमारे एक मित्र हैं जिन्हें ये गुमान हो गया कि वो रेडियो प्रोग्राम की दुनिया के बेताज बादशाह हैं बस फिर क्या गर्मी के इस मौसम में जब दिमाग को ठंडा रखना ज्यादा जरूरी है वो अपने अंडरट्रेनी लोगों को बेवकूफ मान सार्वजनिक रूप से उनकी बेइज्जती करने लग  गए पर जब तक उनके ज्ञान का दीपक जलता बेचारे उस रेडियो स्टेशन से बाहर हो गए और जिस ट्रेनी को वो बेवकूफ मानते थे वो उनका बॉस बन गया.गर्मी के इस मौसम में जहाँ लोग शरीर को ठंडा रखने के तरीके बताते हैं मेरा दूसरा फंडा है चिल, दिमाग को ठंडा रखने का क्यूँ कि आपकी कौन कब कहाँ बजा के निकल जाएगा किसी को नहीं पता अब ज्यादा उम्रदराज होना योग्यता का कोई पैमाना नहीं है.यदि आप अपना काम जानते हैं तो अच्छी बात है,उसे अपने जूनियर को भी सिखाइये  पर सफलता को दिमाग गर्माने का मौका नहीं दीजिए उसे ठंडा रखिये  नहीं तो एक दिन आप भी लोगों के लिए वो बाजा बन जायेंगे जिसकी कोई भी बजा देगा.मौसम गर्म है इसका मतलब ये भी नहीं है कि ये मौसम बेकार है.हर मौसम की अपनी अहमियत है.गर्मी न होती तब हमारे जीवन में कितनी यादें न होतीं वो गर्मियों की छुट्टी,वो स्कूल खुलने का इंतज़ार और सबसे मजेदार बार बार नहाने से हुआ प्यार.हम गर्मी को तभी समझ पाते है जब हम जाड़े को जी के आते हैं मौसम कैसा भी हो  जिंदगी तो किसी भी हालत में चलती रहती है फिर गर्मियां बीतेंगी और बारिश आयेगी तो तीसरा फंडा उम्मीद का दामन मत छोडिये कोई भी चीज हमेशा के लिए नहीं है.चेंज इज इनेवीटेबल तो आप मौसम को बदलने के कोशिश में अपने शरीर को ठंडी चीजों का इतना आदी न बना दीजिए कि हमारा शरीर जरा सी गर्मी भी बर्दाश्त कर पायें बात एक दम सीधी है बदलाव के लिए तैयार रहें.यादों के साथ जीयें लेकिन उनसे चिपके नहीं जो बीत गया वो बीत ही गया,रिश्तों में अगर जज्बातों की गर्मी नहीं होती है तो वे औपचारिक हो जाते हैं.आप लोगों को नहीं बदल सकते पर अपने आप को तो बदल सकते हैं उन लोगों के लिए जो आपके अपने हैं.यूँ कि ज्ञान देने की आदत तो हमारी है नहीं अब अगर मेरी बातों से आपके दिमाग का दीपक जला है तो फिर इन्तजार किस बात का  चलिए गर्मियों का लुत्फ़ उठाया जाए.
आई नेक्स्ट में 14/05/13को प्रकाशित 

2 comments:

Dhiraj Pal said...

जिन्दगी में उतार चढाव ही हमें अपनी छमता का ज्ञान कराते हैं

Rajeev Ranjan said...

शानदार! मन की तपिश को आपने तो रूहाफ़्जा पिला दी जनाब!

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