Wednesday, July 15, 2015

भविष्य का हार्ड डिस्क

१९९० के दशक में आये पहले व्यक्तिगत कंप्यूटरों पर यदि आपने काम किया हो तो आपको अंदाज़ा होगा कि उनकी प्रोसेसिंग क्षमता आज के कंप्यूटरों के मुकाबले नगण्य थी. आज के आधुनिक प्रोग्राम तो उन कंप्यूटरों पर शायद ही चल पाएं. विगत कुछ वर्षों में कंप्यूटरों की कार्य क्षमता में काफी तेज़ी से इजाफा किया है पर उसके साथ ही उनपर काम करने के लिए के बनाये जाने वाले प्रोग्रामों की जटिलता भी बढ़ी है जिससे कि उनके धीमा होने का आभास होता है. आज-कल की तेज़ी से भागती-दौड़ती जिन्दगी में जहाँ हर आदमी के पास वक़्त की कमी है यदि कंप्यूटरों की गति में इजाफा हो जाए तो शायद कुछ वक़्त लोग अपने लिए भी निकाल पाएंगे. यदि आप कुछ इसी तरह की इच्छा रखते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. यदि आपका कंप्यूटर भी आपको कछुए की चाल से चलता हुआ लगता है तो चैन की सांस लीजिये क्योंकि आने वाले समय में आपके कंप्यूटर की हार्ड-डिस्क की गति आज की तुलना में लगभग १०,००० गुना अधिक हो जाएगी. रोम की ला सपिएँज़ा विश्विद्यालय ने निज़मेगेन स्थित रैडबाउंड विश्वविद्यालय और मिलान की पॉलिटेक्निक के साथ मिलकर क्वांटम मैकेनिक्स पर आधारित कुछ नए प्रयोगों के आधार पर ऐसा संभव होने की सम्भावना है. यह थोडा जटिल विषय है. अभी चुम्बकीय सहायता से डाटा रिकॉर्ड करने की सीमा एवं गति किसी भी धातु या अन्य ऐसी वस्तु के चुम्बकीय गुणों में फेरबदल की सीमा पर आधारित है. आमतौर पर ऐसा वीस डोमेन के द्वारा किया जाता है. ऐसा उस माध्यम के कुछ भागों पर एक विशिष्ट चुम्बकीय दिशा के आक्षेप द्वारा किया जाता है. १९५६ में आई बी एम् द्वारा पहली हार्ड डिस्क बाज़ार में उतारी गयी थी. तब से लेकर आज तक अधिक प्रभावी एवं बेहतर डाटा भण्डारण को लेकर किये गए प्रयासों ने हार्ड डिस्क की डाटा भण्डारण क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है. १९५६ में आये पहले प्रोटोटाइप के मुकाबले आज की हार्ड डिस्कों की डाटा भण्डारण क्षमता लगभग ५ करोड़ गुना अधिक है. हालाँकि अभी जो तकनीकी इस्तेमाल की जा रही है वह अपनी क्षमता के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है. इस तकनीकी द्वारा एक बिट डाटा को पढने के लिए १ नैनोसेकंड का समय लगता है. वैज्ञानिकों के अनुसार इसे और घटाया नहीं जा सकता है. एक बिट के भण्डारण के लिए काफी बड़ी संख्या में वीस डोमेन्स का इस्तेमाल करना पड़ता है. इस डाटा को बार-बार होने वाले ताप परिवर्तनों से सुरक्षित रखना एक बहुत बड़ी समस्या है और यही आज की तकनीकी की सबसे बड़ी खामी है जो आज की हार्ड-डिस्क की क्षमता को निर्धारित करती है. इसी लिए अब नैनोसेकंड से भी नीचे के समय-माप पर शोध किया जा रहा है. इस शोध के क्षेत्र को “फेमटोमैगनेटिस्म” का नाम दिया गया है. इसमें एक्सचेंज इंटरेक्शन का अध्यन किया जाता है जो कि अत्यंत ही तीव्रगति के समय मापकों पर कार्य करता है. यह एक्सचेंज इंटरेक्शन पदार्थों के चुम्बकीय गुणों का निर्धारण करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सामान्यतः एक अणु का अपना एक चुम्बकीय क्षेत्र होता है जिसे कि एक चुम्बकीय सुई के रूप में देखा जा सकता है. अणु के इसी गुण का इस्तेमाल कर के वज्ञानिक हार्ड डिस्क की क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं. यदि यह प्रयोग सफल हो गया तो आने वाले समय में हमारे कंप्यूटरों की गति कई गुना बढ जाएगी. हालाँकि यह तकनीकी आम आदमी तक कब तक और किन दामों में पहुँच पायेगी यही कह पाना अभी मुश्किल है पर इतना अवश्य है कि इसके आने से कंप्यूटरों की दुनिया बदल जाएगी. एक बात और है कि चूँकि यह तकनीकी अन्य सभी तकनीकी की ही तरह विदेशी मुल्कों में बनायीं जा रही है शायद इसके भारत आने में थोडा और समय लगे. पर यह उम्मीद की जा सकती है कि बाज़ार की शक्तियां इस तकनीकी के इस्तेमाल से बनी हार्ड डिस्कों को जल्दी ही भारत तक ले आएँगी. भारत कंप्यूटरों का एक बहुत बड़ा बाज़ार है. मेक इन इण्डिया के आने के बाद से इस क्षेत्र में तेज़ी से निवेश आने की सम्भावना है. भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता पर कोई शक नहीं कर सकता. जरूरत है तो सिर्फ थोड़े निवेश और सहायता की. यदि यह सहायता उन्हें मिल गयी तो वह दिन दूर नहीं जब ऐसे शोध हमारे देश में भी होंगे और हम उन्हें कम से कम दामों पर आम जनता तक पहुंचा सकेंगे.   

हार्ड डिस्क क्या है?
अब बात करते हैं उस चीज की जिसकी मदद से छोटे से कंप्यूटर में हजारों का डेटा महफूस रहता है। हम बात कर रहे हैं हार्ड डिस्क की। जिस तरह से हम अपनी वार्डरोब में कपड़े लगा के रखते हैंउसी तरह हार्ड डिस्क भी एक ऐसी अलमारी है जिसमें विभिन्न वस्तुओं को संभाल के रखा जा सकता है। इसमें डेटा स्टोर करने के लिए फोर्मैटिंग की जाती है ताकि अलग-अलग खंड बनाये जा सकें। हार्ड डिस्क सिस्टम की फाइल्स को सहेज कर सुरक्षित रखने वाला वह यंत्र हैं जो डिजिटल जानकारी चुम्बकीय रूप से लिख और पढ़ सकती हैं। इसकी खासियत यह है कि बिजली न होने पर भी यह हार्ड डिस्क आंकड़ों को सुरक्षित रखने की क्षमता रखता है। हार्ड ड्राइव/हार्ड डिस्क से आंकड़ों को बेतरतीब (रैंडम -एक्सेस) तरीके से पढ़ा जाता हैं। इसका मतलब है कि आंकड़ों के समूह को ड्राइव में किसी भी जगह लिखकर सुरक्षित किया जा सकता हैंइन्हें सीक्वेंस में सेव करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। पूरे कंप्यूटर डिवाइस में एकमात्र यह ही एक ऐसा हिस्सा है जिसमें सबसे ज्यादा बिजली की खपत होती है। इसका कारण है इसके अंदर लगी मैग्नेटिक डिस्क जो कि तेजी से घूमती है।डेटा भंडारण यन्त्र को उसकी भंडारण क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर विश्लेषित किया जाता हैं। डेटा भंडारण यन्त्र की क्षमता बाइट्स में होती हैं१०२४ बाइट को १ किलोबाइट कहा जाता हैं उसी तरह से १०२४ किलोबाइट को १ मेगाबाइट कहा जाता हैं। १०२४ मेगाबाइट को १ गीगाबाइट कहते हैं और १०२४ गीगाबाइट को १ टेराबाइट कहा जाता हैं। डेटा भंडारण यन्त्र का पूरा भंडारण स्थान उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध नहीं होता क्यूंकि कुछ हिस्सा  ऑपरेटिंग सिस्टम को रखने और कुछ और हिस्सा फाइल सिस्टम के लिए और कुछ हिस्सा संभवतः अंदरुनी अतिरेकता  गलती सुधारने और डेटा पुन:प्राप्ति के लिए होता हैं। आंकडों को लिखने वाले नोक(हेड) के पटरी तक पहुंचने के समय और पढ़ते वक़्त वांछित क्षेत्र के नोक के नीचे तक पहुंचने में लगने वाले समय और आंकड़ों के यन्त्र से आवागमन की गति के आधार पर प्रदर्शन क्षमता का निर्धारण किया जाता है|
आज के डेटा भंडारण यन्त्र मेज पे रखे जा सकने वाले डेस्कटॉप कंप्यूटर के लिए ३.५ इंच और गोद में रखे जा सकने वाले कंप्यूटर में २.५ इंच के होते हैं। डेटा भंडारण यन्त्र मुख्य प्रणाली से साटायूएसबी या एस.ए.एस(सीरियल अटैच्डSCSI) जैसे मानक विद्युत् चालक तारो से जुड़े होते है२०१४ तक डेटा भंडारण यन्त्र को अतिरिक्त या सहायक भंडारण के क्षेत्र में ठोस अवस्था वाले संचालक के रूप में टक्कर देने वाली तकनीक थी फ्लैश मेमोरीआने वाले समय में यह माना जा रहा हैं की हार्ड डिस्क अपना अधिपत्य जारी रखेगी लेकिन जंहा गति और बिजली की कम खपत ज़्यादा ज़रूरी हैं वहा ठोस अवस्था वाले उपकरण (सॉलिड स्टेट डिवाइस) को हार्ड डिस्क के जगह इस्तेमाल किया जा रहा हैं।

हार्ड डिस्क का उपयोग
हार्ड ड्राइव डेटा को डिजिटली सहेज के रखता है और यह तब भी सुरक्षित रहता है जबकि आप इसकी पॉवर ऑफ कर देते हैआज यह सब बातें साधारण सी लगती हैपर कुछ समय पूर्व यह सब इतना आसान भी न था। आज कल ऐसे सॉफ्टवेयर्स भी आसानी से डाऊनलोड किये जा सकते हैं जिनसे डिलीट किया हुआ डेटा भी आसानी से रिकवर किया जा सकता है। हार्ड डिस्क अलग अलग साइज की अवेलबल है।
आविष्कार से अब तक का सफ़र
दुनिया की सबसे पहली हार्ड डिस्क आईबीएम कम्पनी ने बनाई थीहालाँकि आज की तुलना में वह पांच गुना ज्यादा बड़ी थीतब भी बहुत कम डेटा सेव हो पाता था। इसमें केवल 5 एमबी डेटा स्टोर किया जा सकता था |वर्ष1980 में आईबीएम ने दोबारा से हार्ड डिस्क पर काम किया और  एक नयी हार्ड डिस्क बनायीं जिसकी स्टोरेज की क्षमता पहले से कई अधिक ज्यादा थी (करीब 2.5 GB से अधिक )पर फिर भी वेट में वो बहुत बड़ी थी उसका वजन करीब 250 किलो और साइज किसी फ्रिज के बराबर का था तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि तबसे लेकर अब तक हार्ड डिस्क में कितने बदलाव आ चुके हैं। यह बदलाव आगे भी होते रहेगे।
हार्ड डिस्क के कुछ नए विकल्प?
आजकल हार्ड डिस्क के स्थान पर एसएसडी  (सॉलिड स्टेट ड्राईव) का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। हार्ड डिस्क के स्थान पर लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं।हार्ड डिस्क और इसमें अंतर सिर्फ इतना है कि इसमे हार्ड डिस्क की तरह कोई मूविंग पार्ट नहीं होता। इनमे डेटा छोटी छोटी माइक्रोचिप  पर सेव होता है और इसी वजह से इनमे डेटा एक्सेस करने की स्पीड भी अधिक होती है लेकिन फिर भी महंगे होने के कारण आमतौर पर इनका प्रयोग नहीं किया जाता है। महंगे लैपटॉप्स पर इनके इस्तेमाल का प्रचलन बढ़ा है।
कैसे तय होती है इसकी स्पीड
डेटा स्टोरेज की स्पीड तय करने के भी कई मानक है। स्टोर्ज को मापने की सबसे छोटी इकाई होती है बाइट और इन्हें बढ़ते हुए क्रम में इस तरह समझ सकते है
1 KB -1024 Bytes
1 MB-1024 KB
1 GB -1024 MB
1 TB -1024 GB
हार्ड डिस्क के प्रकार-
हार्ड डिस्क दो प्रकार की होती है- एक्सटर्नल और इंटरनल। यह दोनों अपने अपने सब पार्ट्स में बंटे हुए हैं। हार्ड डिस्क मूलत: दो भागों में विभाजित है- पोर्टेबल और डेस्कटॉप। पोर्टेबल वह हार्ड डिस्क होती है जिसे कहीं भी आसानी से ले  जाया सकता है और यह यूजर फ्रेंडली होती है। वहीँ डेस्कटॉप हार्ड डिस्क ड्राइव 60 जीबी से लेकर4 टीबी तक का डेटा सेव कर सकती है। हार्ड डिस्क के प्रकार को विस्तार में जानने के लिए नीचे पढ़ें-
डेस्कटॉप हार्डडिस्क
ये विशिष्ट रूप से 60 जीबी से 4 टीबी तक आंकडों को सेव करने की क्षमता रखता है। इनमें ऑंकणों की स्थानांतरण गति 1जीबी/सेकेंड होती हैं। अगस्त 2014 तक सबसे अधिक क्षमता वाला डेस्कटॉप हार्डडिस्क 8 टीबी तक आंकणों को सुरक्षित रख सकता था।
मोबाईल (लैपटॉप) एचडीडीज
यह मोबाईल में होते हैं तो जाहिर सी बात है आकार में अन्य के मुकाबले छोटे होंगे। अपने डेस्कटॉप और औद्दोगिक समकक्षों की तुलना में ये छोटे और कम क्षमता वाले होते हैं। छोटे प्लेटों(प्लाटर) की वजह से इनकी क्षमता कम होती है।ये औद्दोगिक बाजार मे उपयोग के लिये बनायी जाती हैं।
उद्यम हार्ड डिस्क
विशिष्ट तौर पे कई उपभोक्ताओ द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले संगणक जिनपर की उद्यम सॉफ्टवेयर चलते हैं द्धारा उपयोग किये जाते हैं। जैसे की: लेन-देन डेटाबेसइंटरनेट का आधारभूत ढांचा (ईमेलवेब सर्वरई-व्यापार इत्यादि)नियर लाइन भंडारण। उद्यम एचडीडी सामन्यत: 24 घंटे सातो दिन बिना किसी परेशानी के उच्च प्रदर्शन करते हुए चलते रहते हैं। यहाँ अत्यधिक भंडारण क्षमता पाना लक्ष्य नहीं होता है इसलिए मूल्य की तुलना में क्षमता काफी काम होती है। क्योकि अन्य के मुकाबले यह धीमी गति से घूमते हैं तो इसमें बिजली की खपत कम होती है।
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक हार्ड डिस्क
ये वो एचडीडी होते है जो वीडियो रिकॉर्डरया फोर वीलरकार आदि में लगे होते हैं। चूंकि ये अधिकतर हिलते रहने वाले उपकरणों में लगे होते हैं इसलिए इन्हे आघात प्रतिरोधी बनाया जाता है।


हार्ड डिस्क के इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण तारीखें 
1973- हार्ड डिस्क लांच करने वाली कपनी आईबीएम द्वारा विनचेस्टर का लांच। विनचेस्टर एक नए किस्म की ऐसी हार्ड डिस्क ड्राइव थी जो बिजली चले जाने के बावजूद भी प्लेटर से पूरी तरह से अलग नहीं होती थी। जैसे ही डिस्क घूमना बंद करता थायह उस ही जगह पर रुक जाता था। फिर से शुरू होने पर डिस्क हेड वही से शुरुआत करता था।

1980यह वह समय था जिसके बाद से हार्ड डिस्क के भाव इतने कम हो गए कि सबसे सस्ते कम्प्यूटर्स में भी इनका इस्तेमाल किये जाने लगा1980 के दसक के शुरुआत में हार्ड डिस्क ड्राइव बहुत मेहेंगे हुआ करते थे।

1983- आईबीएम द्वारा आई०बी०ऍम० पीसी/एक्स टी  लॉन्च किया था जिसमें एक 10 मेगाबाइट का अंदरूनी एचडीडी था और इसके बाद से ही व्यक्तिगत कम्प्यूटर्स में अंदरूनी एचडीडी नियमित तौर से इस्तेमाल होने लगे ।

2011थाईलैंड में आयी  बाढ़ ने कई डेटा भंडारण यन्त्र उत्पादक सयंत्रों को नुकसान पहुंचाया था जिससे 2012-2013 के बीच डेटा भंडारण यन्त्र के कीमतों में इज़ाफ़ा हुआ था।


प्रभात खबर में 15/07/15 को प्रकाशित
 

1 comment:

ANKIT Yadav said...

THE HARD DISK OF FUTURE WILL BE TEN THOUSAND TIMES FASTER , RESEARCHES SAY
THIS suggest that people made time for him due to these technologies..
to increase the hard drive storage capacity, they have been able to decrease the size of magnetic grains which comprise the data Bits.................

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