Tuesday, July 21, 2015

एक कहानी वर्चुअल दुनिया की

उधर तुम चैट पर जल रही होती हो कभी हरी तो कभी पीली और इधर वो तो बस लाल ही होता हैएप्प्स के बीच में फंसी जिन्दगी वो जाना भी नहीं चाहता था और जताना भी नहीं वो जितने एप्स डाउनलोड करता वो उतना ही दूर जा रही थी अब मामला बत्तियों के हरे और लाल होने का नहीं था अब मसला जवाब मिलने और उसके लगातार ऑन लाइन रहने के बीच के फासले का था.वो उसे अक्सर उसे पोक करता वो चुपचाप उस पोक मेसेज को डीलीट कर देती.स्मार्ट फोन की कहानी और उसकी कहानी के बीच एक नई कहानी पैदा हो रही थी,वो कहानी जो जी चैट की हरी लाल होती बत्तियों के बीच शुरू हुई और फेसबुक के लाईक,कमेन्ट में फलते फूलते स्मार्ट फोन के चैटिंग एप्स के बीच कहीं दम तोड़ रही थी. एक प्यारी सी लडकी जो अपने सस्ते से फोन में खुश रहा करती थी.उसकी उम्मीदों को पंख तब लगे ,जब उसने ,उसे एक स्मार्ट फोन गिफ्ट किया. लैपटौप की चैट से वो उब चुका था.वो तो चौबीस घंटे उससे कनेक्टेड रहना चाहता था.वैसे भी एक फोन ही था जिसे वो हमेशा अपने पास रखती थी. वो जीवन भर की  खुशियों को उसके  साथ टैग करना चाहता था जिससे उसके चेहरे की मुस्कराहट का खुशियों के साथ हैंग आउट जारी रहे.फिर उसका भी मानना था आदमी की स्मार्टनेस स्मार्टफोन से बढ़ती है.वो उसे महंगे गिफ्ट देने से डर रहा था.पता नहीं वो लेगी भी कि नहीं अगर उसे बुरा लग गया.इसी उधेड़ बुन में न जाने कितने दिन बीत गये.फोन पर वो हमेशा उससे अपने फ्यूचर ड्रीम्स  के बारे में बात किया करती थी.उसे सबसे ज्यादा अच्छा तब लगता जब वो पूछता मुझे छोड़ कर तो नहीं चली जाओगी और वो जवाब देती नहीं ,कभी नहीं.उसने अब तो फेसबुक पर अपना रिलेशनशिप स्टेट्स कमीटेड कर दिया था.ये वर्च्युल इश्क रीयल भी हो पायेगा वो अक्सर सोचा करता.दोनों में कितना अंतर था .वो एकदम सीधा सादा नीरस सा लड़का था और वो जिन्दगी से भरी हुई लडकी जो चीजों से जल्दी बोर हो जाती थी |उसके पास स्मार्ट के नाम पर मात्र एक फोन था जबकि वो अपने छोटे से पुराने फोन से चिपकी थी पर दिलों पर राज़ करने का हुनर उसे खूब आता था.आखिर उसने हिम्मत करके उसको ऑनलाइन एक फोन गिफ्ट कर ही दिया .फोन जैसे ही उसे मिला उसका एफबी स्टेटस अपडेट हुआ|गौट न्यू फोन फ्रॉम सम वन स्पेशल ,और वो कहीं दूर बैठा उसके स्टेटस पर आने वाले कमेंट्स और लाईक को देख देख कर खुश हो रहा था.
अब उसके पास भी स्मार्ट फोन था.उसे यकीन था अब दोनों चौबीस घंटे कनेक्टेड रहेंगे.हमेशा के लिए. अब बार -बार  कम्प्यूटर खोल कर उसे अपने एफबी मेसेज नहीं देखने पड़ेंगे.पर अब वो  व्हाट्स एप पर लम्बे –लम्बे मेसेज नहीं लिखती थी जैसा पहले एस एम् एस में किया करती थी .
  उसने स्माईली का यूज  करना शुरू कर दियापर दिल की भावनाओं को चंद चिह्नों में समेटा जा सकता है क्या ? रीयल अब वर्चुअल हो चला था .दो चार स्माईली के बीच सिमटता रिश्ता वो कहता नहीं था और उसके पास सुनने का वक्त नहीं थाएप्स की दीवानी जो ठहरी , सब कुछ मशीनी हो रहा था|सुबह गुडमार्निंग का रूटीन सा एफ बी मैसेज और शाम को गुडनाईट दिन भर हरी और पीली होती हुई चैट की बत्तियों के बीच कोई जल रहा था तो कोई बुझता सा जा रहा था|काश तुम टाईम लाइन रिवियू होते जब चाहता अनटैग कर देता है अक्सर वो सोचता .वो तो हार ही रहा था पर वो भी क्या जीत रही थीकुछ सवाल जो चमक रहे थे चैट पर जलने वाली बत्ती की तरह रिश्ते मैगी नहीं होते कि दो मिनट में तैयार ,ये सॉरी और थैंक यू से नहीं बहलते इनको एहसास चाहिए जो व्हाट्स एप और हाईक जैसे एप्स नहीं देते उसे आगे जाना था पर ये तो पीछे जाना चाहता था जब रीयल पर वर्चुअल हावी नहीं था क्या इस रिश्ते को साइन आउट करने का वक्त आ गया था या ये सब रीयल नहीं महज वर्चुअल थावो हमेशा इनविजिबल रहा करता था वर्चुअल रियल्टी की तरह जहाँ हैवहाँ है नहींजहाँ नहीं हैवहां हो भी नहीं सकता वो जी टॉक पर इनविजिबल ही आया था और इनविजिबल ही विदा किया जा रहा था शायद ब्लॉक होना उसकी नियति है.अब वो जवाब नहीं देती थी और जो जवाब आते उनमे जवाब से ज्यादा सवाल खड़े होते. चैट की बत्तियाँ उसके लिए बंद की जा चुकी थी इशारा साफ़ था अब उसे जाना होगा साइन आउट करने का वक्त चुका था. वर्चुअल रीयल नहीं हो सकता सबक दिया जा चुका था . जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है पीछे लौटने का नहीं.
आई नेक्स्ट में 21/07/15 को प्रकाशित 

7 comments:

Naincy Kashyap said...

JABSE FACEBOOK OR WHAT'SAAP YA OR BHI SOCIAL NETWORKING SITES AAYI HAI TABSE LOGO KO KISI SE KUCH BHI EXPRESS KRNA HOTA H TO VO SMILIES KA USE KRTE H SHAYAD FUTURE M LOGO K EXPRESSIONS KI KHATM HO JAYE LOG AB CHATING JAYEDA PASAND KRTE H NA KI MILNA...

Fatima Lubna said...

Technology is not the problem. But the way we use it is the main problem. Due to virtual reality feelings and emotions have lost their true meaning and essence.

S.Raaj said...

"changes are inevitable" as u often say sir, and badlav pragati ka niyam hai or uspe kisi ka zor nahi
loved the you concluded zindagi aagey bhadte rehne ka naam hai piche palatne ka nahi

aditi gupta said...

A fab one by your side,the thing is peoples are not having the time to entertain theirselves with a properous meet but just to chillofy at social platforms like whatsapp,fb,twitter & all other ones.
Virtuality is somewhat good but at an extent,as social media is not just to enjoy or doing the pranks but is even growing up like a promotion tool to the businesses,start ups & ya in short one can say it as 'social media optimization'.So,I think use it as a worthy tool not just to wasting time.

anam kidwai said...

Isnt it strange that as we are getting more and more mediums to Communicate, we have less and less to say to each other. We have facebook, whatsapp, hike and what not but no time or patience or interest in pouring our hearts out to our loved ones through these. The measages are getting shorter and shorter! But who knows. Maybe someday we will get bored of our virtual interactions and face to face interactions will be a thing again!

Vaishali Gupta said...

Virtual duniya ka pyar jyada lambe tym tak ni chal pata h.

shaista siddiqui said...

पर ये कहानी खतम नही होती अब तो फेसबुक वर्चुअल यादे भी ला कर रख देता है ।

पसंद आया हो तो