तुम्हारा ई मेल मिला ऐसा लगता है परीक्षा के दबाव में तुम परेशान हो तुम्हें लगता है इन परीक्षाओं में अगर तुम अच्छे मार्क्स नहीं ला पाए तो तुम्हारा भविष्य ख़राब हो जाएगा और ये स्ट्रेस तुम्हेंठीक से पढने नहीं दे रहा है .मुझे खुशी है की मेरा बेटा मुझ पर इतना भरोसा करता है और अपनी सारी प्रोब्लम्स को परेंट्स के साथ शेयर करता है .
Wednesday, March 10, 2010
मैं हूँ न ......................
तुम्हारा ई मेल मिला ऐसा लगता है परीक्षा के दबाव में तुम परेशान हो तुम्हें लगता है इन परीक्षाओं में अगर तुम अच्छे मार्क्स नहीं ला पाए तो तुम्हारा भविष्य ख़राब हो जाएगा और ये स्ट्रेस तुम्हेंठीक से पढने नहीं दे रहा है .मुझे खुशी है की मेरा बेटा मुझ पर इतना भरोसा करता है और अपनी सारी प्रोब्लम्स को परेंट्स के साथ शेयर करता है .
Friday, March 5, 2010
सीधी बात नो बकवास
Tuesday, March 2, 2010
पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर रेडियो फीचर
आप चाहें तो इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं
http://www.4shared.com/file/232651837/fe5c028c/PU_Feature.html
Thursday, February 25, 2010
चिकन कला पर एक रेडियो फीचर
और बताएं
Wednesday, January 20, 2010
मोहे रंग दे बसंती

क्यों कुछ बसंत की यादें ताज़ा हुई न अब अगर यादें ताज़ा हो रही हैं तो इससे बेहतर गाना क्या हो सकता है "आया झूम के बसंत नाचो मेरे संग " वैसे ये त्यौहार बसंती रंग से जुड़ा हुआ है मतलब खेतों में नयी फसल फूलों के खिलने का मौसम ,ये बसंती रंग है बड़ा प्यारा इसमें प्यार की मादकता भी है "पिया बसंती रे " तो क्रांति की आग भी "मेरा रंग दे बसंती चोला ओ माई रंग दे बसंती चोला " इसमें दुःख की वेदना भी है "ओ बसंती पवन पागल न जा रे न जा ओ बसंती पवन पागल " तो मिलन की सुहानी खुशी भी जितनी डाइवर्सिटी आपको इस रंग के नेचर में मिलेगी उतनी और किसी भी रंग में नहीं ये डाइवर्सिटी इस फेस्टिवल में भी है बच्चे , बूढ़े और जवान सभी के पास इस फेस्टिवल को एन्जॉय करने के अपने अपने रिसन हैं ठण्ड जाने को है और गर्मियां अभी आयी नहीं इस से बेहतर सीसन और क्या हो सकता है तो क्यों न गाया जाए ये गाना " संग बसंती , रंग बसंती , छ गाया मस्ताना मौसम आ गाया "(रजा और रंक ), मुझे लगता है कि ये सीसन हमें सोचने का मौका देता है कि जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है शायद इसीलिए बसंती रंग मस्ती का रंग भी माना जाता है और ये मस्ती पीक पर होती है बसंत पंचमी के दिन चलिए आप बच्चे नहीं रहे जो स्कूल से आपको छुट्टी मिल जायेगी और आप इसकी मस्ती को एन्जॉय कर पायेंगे , जिन्दगी की भगा दौड़ी में पता ही नहीं चलता कि बसंत कब आया और कब चला गाया .अजी छोडिये मैं आपसे एन्जॉय करने को कह रहा हूँ और आप खुश न हो पाने का रिसन दिए जा रहे हैं .त्यौहार दिल से मनाया जाता है चलिए आपके पास टाइम नहीं है तो हम बता देते हैं कि बसंत पंचमी को सेलेब्रेट करने का इंस्टैंट तरीका . थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद कीजिये और याद कीजिये दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे जिसमे सरसों के फूल से लदे हुए पेड़ों के बीच शारुख खान और काजोल का मिलन हो रहा है थोडा और फ्लश बैक्क में चल सकते है बस आपको सिलसिला फिल्म का वो गाना याद कर सकते हैं " देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए दूर तक निगाह में गुल खिले हुए" चारों और फूल ही फूल
वैसे भी साथियों बसंत पंचमी का मतलब सिर्फ त्यौहार मानना नहीं इसे जीना है इस फेस्टिवल की सारी एनेर्जी अपने अन्दर ले लीजिये और फिर देखिये आपकी जिन्दगी भी कितनी बसंती हो जायेगी और आप गुनगुना उठेंगे पिया बसंती रे
Saturday, January 9, 2010
A Journey Inside
यात्रा मंजिल पर पहुँचने का जरिया है मंजिल को पाने के लिए यात्रा तो करनी पड़ेगी ,यात्रा करना और यात्रा को जीना दो अलग अलग बातें हैं आपने यात्रायें तो बहुत की होगी लेकिन आपको क्या याद पड़ता है कि किस यात्रा को आपने जीया था चलिए आज किसी यात्रा को जीया जाए यात्रा हमारे जीवन का अहम् हिस्सा है और जीवन भी एक यात्रा तो ही है हर दिन कुछ नया कुछ अनोखा हाँ ऐसा होता है लेकिन हम अपनी जिन्दगी की दुश्वारियों में उस अनोखे पन को देख ही नहीं पाते किसी भी जर्नी में नया क्या होता है जरा सोचिये वही इंसान और वही नेचर हाँ नया होता है इंसानों का पहनावा , उनका कल्चर नेचर का नया रूप कहीं पहाड़ , नदी समुद्र वगैरह आप परेशान मत होइए हम चल पड़े हैं अमेरिका की यात्रा को जीने मत भूलियेगा इस यात्रा में हमारी साथी है जिन्दगी हमारी यात्रा दिल्ली से शुरू हुई दिल्ली से अबुधाबी , अबुधाबी से न्यू योर्क और न्यू योर्क से लोस एंजलिस ये सारे शहर हमारी यात्रा के पड़ाव थे इनसे गुज़रे बगैर मंजिल तक नहीं पहुंचा जा सकता है जिन्दगी के भी कई पड़ाव होते हैं बचपने से लेकर बुढ़ापे तक और हर पड़ाव हमारे एक्सपीरिएंस में इजाफा करता है .
आइये आगे चलते हैं उम्मीद करता हूँ आप मेरे साथ इस यात्रा का लुत्फ़ उठा रहे होंगे न्यू योर्क शहर में जब हम उतरे तो हमारा स्वागत बर्फ बारी ने किया क्रिसमस के मौसम में इससे अच्छा स्वागत क्या हो सकता है उसके बाद जोरदार बारिश मुझे लगा ये प्रकर्ति के स्वागत का अनोखा तरीका है. कहते हैं रोग कितना भी गंभीर क्यों न हो अगर डॉक्टर हंस कर बात कर ले तो आधी बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है इमीग्रैसन ऑफिसर ने हंसकर हमारा अमेरिका में स्वागत किया तो मेरी थकान वहीं ख़तम हो गयी , खैर यात्रा जारी रही वहां से लोस एंजलिस की उड़ान थोड़ी देर में हम होटल के रास्ते में थे चौड़ी चौड़ी सड़कें जिनपर सरपट दौड़ते चौपहिया वाहन रौशनी से जगमगाता शहर वैसे जब हमारा विमान लोस एंजलिस एअरपोर्ट पर लैंड कर रहा था तो नीचे मैंने रौशनी में जगमगाता शहर देखा क्या खूबसूरती से समकोणपर काटती सड़कें पूरा शहर एक खूबसूरत लैंड एस्केप लग रहा था .
इस वक्त पूरा अमेरिका उत्सव के रंग में रंगा है चारों तरफ क्रिसमस की धूम है शाम को रौशनी में धुले शहर को देखने का अज़ब मज़ा है चारों तरफ रौशनी घर के अन्दर क्रिसमस ट्री और घर के बाहर बिजली की सजावट और क्रिसमस की झांकी मैं भी सोच रहा था इंसान कहीं भी रहे दुनिया के किसी कोने में खुशियाँ मनाने के तरीके एक जैसे ही होते हैं खुशियों की जबान कोई भी समझ सकता है इसके लिए किसी भाषा को जानना जरुरी नहीं होता मुझे ऐसा लग रहा था कि हम दीपावली का त्यौहार मनाने की तैयारी कर रहे हों . हलकी बारिश और सर्द हवा मौसम को खुशगवार बना रही थी और मैं अपने आप को इस खूबसूरत मौसम में खोज रहा था सही है दोस्तों यात्रा में मन दार्शनिक हो जाता है हम अपनी तलाश में निकल पड़ते हैं जिसका मौका जीवन की भाग दौड़ में कम ही मिलता है . जिस शहर में मैं था उसके आस पास का एनवोइरमेंट कई मामलों में अनोखा है यहाँ पर्वत है समुद्र है रेगिस्तान और ज्वालामुखी भी और जिन्दगी भी ऐसी ही है सुख है दुख है और कभी कभी नीरसता भी लेकिन जिन्दगी तो जिन्दगी है मैं जोशुवा ट्री नेशनल पार्क कैलिफोर्निया देखने गया असल में ये एक रेगिस्तान है जो सैकडों किलो मीटर में फैला है हाँ यहाँ के रेगिस्तान हमारे रेगिस्तान से एक दम अलग हैं यहाँ रेत की जगह चट्टानें हैं और जोशुवा पेड़ जो दुनिया में सिर्फ यही पाया जाता है जिसको दूर से देखने पर लगता है कोई इंसान बाहें पसारे आसमान की तरफ देख रहा है सन्नाटा ऐसा कि कभी कभी अपने न होने का एहसास होता है प्रकर्ति के इस अद्भुत रूप को देखने के बाद बारी थी कुछ इंसानी दुनिया की रंगीनी को देखने की हम चले होलीवूड .रौशनी से नहाया हुआ चारों ओर रौशनी और साल की पहली बारिश से भीगता शहर मै भी भीग रहा था . अब हमें लौटना था लेकिन मेरा मन तो भीग चुका था यात्रा की सुहानी यादों सेशायद यात्रा को जीना इससे को कहते है आप क्या कहते हैं
आई नेक्स्ट में ९ जनवरी को प्रकाशित
सवाल
तुम्हारे लिए काफी पीना महज एक क्रिया है
पर मेरे लिए ये विशेषण
जब तुमने बनाई हो
खैर तुम नहीं समझोगी
तुम्हारे लिए सब काम हैं जीवन के
जैसे मैं एक काम हूँ
दोस्त
जैसा कुछ
या फिर काफी सारी अच्छी होती हैं ?
क्योंकि क्रिया, क्रिया होती
जिसमें कारण नहीं ढूंढा जाता
मेरी जिन्दगी के व्याकरण में
वर्तनी की बहुत गलतियाँ है
तो बचा क्या
क्योंकि सारे सवालों का जवाब
तुम्हारे पास : क्या ....
मैं क्यों हूँ
तुम्हारे जीवन में
जब सब
कॉफ़ी एक जैसी होती है
फिर क्यों रुक जाती हैं कभी -कभी
तुम्हारी उँगलियाँ
मोबाईल से स्क्रोल करते हुए
उस कॉफ़ी को बनाने लिए
एक बात बताओगी
क्या ढूंढती रहती हैं
तुम्हारी उँगलियाँ ?
उस मोबाईल में
जहाँ मैं भी झांकना चाहता हूँ
क्योंकि तुम्हारे दिल में
झाँकने के सारे दरवाजे बंद हैं
चलो कुछ और बाते करते हैं
जिसमें न कॉफ़ी हो न तुम्हारी बातें
कुछ ज्ञान की
कुछ विज्ञान की
क्योंकि
तुम्हारे लिए काफी पीना महज एक क्रिया है
पर मेरे लिए ये विशेषण
जब तुमने बनाई हो
